25 मामलों में हुई सुनवाई..महिला आयोग अध्यक्ष ने बताया..मारपीट मामलेमें कुछ नहीं बोलूंगी..सच भी सामने आ जाएगा..राजनीति करना ठीक नहीं.. आप ही बताएं..क्या प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखूूं

बिलासपुर— राज्य महिला आयोग में चार नए सदस्यों की नियुक्ति की गयी है। सभी ने अपनी जिम्मेदारियों को संभाल लिया है। बिलासपुर में आयोग के सामने कुल 25 प्रकरण आए। इसमें 10 प्रकरणों को निराकरण किया गया है। यह जानकारी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने दी। महिला आयोग अध्यक्ष ने बताया कि आरोप में कोई दम नहीं है कि सुनवाई के दौरान वकीलों को प्रवेश दिया जाता है। रायपुर घटनाक्रम के बारे में उन्हें कुछ नहीं कहना। क्योंकि मामला अभी कोर्ट में है।  

                   कलेक्ट्रोरेट स्थित मंथन सभागार में राज्य महिला आयोग की मौजूदगी में पीड़ितों की सुनवाई हुई। किरणमयी नायक ने बताया कि सुनवाई के दौरान 25 प्रकरण सामने लाया गया। 21 मामलों में एक पक्ष के लोग ही उपस्थित हुए। जबकि 4 प्रकरण में कोई नहीं पहुंचा है। 10 प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया है।

10 प्रकरण नस्तीबद्ध..किरणमयी नायक

                           नस्तीबद्ध किए गए 10 प्रकरणों में ज्यादातर मा्मला आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है। बेलतरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का मामला सामने आया। कर्मचारी ने माफी मांगा है। स्कूल प्राचार्य के खिलाफ शिकायत मिली है। फीस को लेकर बच्चों की मार्कशीट नहीं दिए जाने की बात सामने आयी। प्रकरण का निराकरण किया गया। एक आरक्षक ने बलात तरीके से नीजि मकान पर कब्जा किया है। मामले को एसपी के संज्ञान में लाया गया। आरक्षक ने जल्द ही मकान खाली किए जाने की बात कही है। आयोग की तरफ से जल्द ही पुलिस कप्तान को पत्र लिखा जाएगा। जांजगीर महाविद्यालय प्राचार्य के खिाफ प्राध्यपकों की शिकायतों को दूर किया गया है। एक अन्य मामले में बिना तलाक अलग रहने वाली दम्पत्ति की शिकायत को गौर से सुना गया। बच्ची की भरण पोषण को लेकर पिता की तरफ से 3000 रूपए प्रति महीने दिए जाने का निर्देश दिया गया है। दोनों पक्षों ने निर्णय पर खुशी जाहिर की है।

सवाल जवाब..कुुछ का बताया..कुछ को टाला

               सवाल जवाब के दौरान किरणमयी नायक ने बताया कि आयोग का हमेशा प्रयास रहता है कि आपसी सहमति से विवाद को दूर करें। आयोग ने लिखित ही नहीं बल्कि पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से सामने आने वाली गतिविधियों को भी संज्ञान में लिया है। और फैसला भी किया है।

               विपक्ष की शिकायत है कि सुनवाई के दौरान वकीलों को नियम विरूद्ध प्रवेश दिया जाता है। सवाल के जवाब में किरणमयी नायक ने बताया विपक्ष के आरोप में कोई दम नहीं है। सुनवाई के दौरान ना तो किसी वकील को प्रवेश दिया जाता है। और ना ही बाहरी लोगों की दलील ही सुनी जाती है। आयोग केवल दोनो पक्षों को सुनता है। फैसला भी उसी के अनुसार होता है।

             एक सवाल के जवाब में महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि बाल संरक्षण अधिकारी कि नियुक्त उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर का है। महिला आयोग का दायरा 18 साल से  ऊपर का है। बाल संरक्षण की जिम्मेदारी आयोग के दायरे में नहीं है।

            किरणमयी नायक ने  रायपुर में सुनवाई के दौरान मारपीट में पीए की भूमिका पर कुछ भी बोलने से इँकार कर दिया। महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि मामला अभी जांच के दायरे में इसलिए अभी कुछ भी बोलना उचित नहीं होगा। हां इतना जरूर है कि कुछ लोग इसे राजनैतिक हवा दे रहे हैं। लेकिन..जल्द ही सच सामने आ जाएगा।  

क्या प्रधानमंत्री को पत्र लिखूं

             महंगाई के चलते महिलाएं प्रताड़ित हो रही हैं। क्या आप इस बात को संज्ञान में लेंगी। सवाल के जवा्ब मे महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह का मामला सामने अभी नहीं आया है। आप ही बताएं ..क्या इसके लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखूं।

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