कचरे के ढेर के बीच बिलासपुर शहर को कैसे मिलेगी रैंकिंग …?

बिलासपुर।स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 के लिए निगम प्रशासन अपनी तैयारियों में इस कदर लगा हुआ है कि नालिया होटलों के कूड़े करकट से बजबजा रही है जिसकी सुध वर्तमान पार्षद भी नही ले रहे है। शहर के बीच पुराना हाई कोर्ट रोड की हालत सबसे खराब है। यहाँ फैले ठेलों के अतिक्रमण की वजह से वाहनों की पार्किंग सड़क में आ गई है। कोचिंग सेंटरों का यह गढ़ पूरी तरह अस्त व्यस्त हो गया है। सिंगल यूज प्लास्टिक कागज के दोने, पानी का खाली पाउच ठेलों और होटलों का जूठा, गन्ने का चुरा सब कुछ इस रोड की अगल बगल की नालियों में भरा पड़ा हुआ है। निचले इलाकों की नालियां जाम है। सिर्फ खानापूर्ति के लिए मुख्य नालियों की सफाई हो चुकी है।

बीते दिनों निगम कमिश्नर अजय त्रिपाठी ने सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने शहर के सभी वार्डों में निगम के इंजीनियर और अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई थी जो वार्ड प्रभारी के रूप में काम भी कर रहे है। वार्ड प्रभारीयो को निर्देश भी है कि रोजना सुबह सात बजे से अपने वार्डों का भ्रमण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लेंगे तथा आवश्यकता अनुसार जोन कार्यालय से समन्वय बनाकर कार्यों को पूर्ण कराएंगे पर ऐसा सिर्फ सड़क की सफाई में दिख रहा है। आसपास की नालियों और गली मोहल्लों की हालत बद्द से बत्तर है।

स्मार्ट सिटी बिलासपुर के पुराना हाई कोर्ट रोड में सुबह और शाम ठेले, दुकानदारों और कोचिंग के दोपहिया व चार पहिया वाहनों के अतिक्रमण की वजह से यहाँ रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है। 100 फुट की सड़क 20 फुट में सिमट जाती है। सबसे अधिक बिगड़े हुए हालात इंद्रजीत कांप्लेक्स से गांधी चौक के बीच में बने हुए है । जिसमे स्टेट बैंक के पास स्थिति नियंत्रण के बाहर है। नगर निगम और ट्रैफिक विभाग यहाँ की व्यवस्था के प्रति आंखें बंद किया हुआ है।

यहाँ के वार्ड पार्षद का निवास भी इसी सड़क के किनारे ही है। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ भारत अभियान जैसी महत्वकांक्षी योजना की विचारधारा के बिल्कुल विपरीत चल रहे है। जल्द ही शहर की सफाई व्यवस्था में नगर निगम की गंभीरता परखने केंद्रीय टीम औचक निरीक्षण के लिए कभी भी आ सकती है। ऐसे में शहर के महत्वपूर्ण मार्ग की तस्वीर से क्या रैंकिंग मिलेगी इस का अंदाज लगाना बहुत ही सरल है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में इस बार थोड़ा बदलाव भी हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा जारी मापदंड के अनुसार युवाओं के साथ ही मोहल्ले के सीनियर सिटिजन से कुछ ज्यादा ही फीडबैक लिए जाएंगे। इनके अनुसार ही रैंकिंग तय की जाएगी। फीडबैक के अलावा सार्वजनिक जगहों की पड़ताल भी करेंगे। जिसमे बिलासपुर नगर निगम कितना खरा उतरता पाता है।

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