मेरा बिलासपुर

भाई की याद में विजय ने लगाया आक्सी प्लांट.. कहा..टूट गया हूं..बहू का सामना कैसे करूं..मां को क्या जवाब दूं ?.बेटी से क्या बोलूं..अजय ने छोड़ा कई सवाल..पूरा करूंगा अधूरा काम..सेवा ही लक्ष्य

बिलासपुर— नर्मदानगर निवासी और जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष विजय केशरवानी ने आज छोटे भाई अजय. केशरवानी की याद में आक्सीजन के 13 पौधे लगाए। जानकारी देते चलें कि अजय केशरवानी की आज से ठीक तेरह दिन पहले 7 मई को कोविड संक्रमण से मौत हो गयी है। अजय केशरवानी की याद को हमेशा ताजा बनाए रखने विजय केशरवानी ने तेरहही कार्यक्रम के दौरान परिवार के साथ मोहल्ले के गार्डन में विधि विधान से आक्सीजन प्लांट लगाया। इस दौरान भावुक विजय केशरवानी ने कहा कि छोटे भाई की मौत उनके लिए बहुत बडी आपदा है। उनकी याद में आक्सीजन प्लांट लगाया है। ताकि अब पर्यावरण से अधिक से अधिक लोगों को प्राण वायु मिल सके। अब यह अभियान हमेशा चलता रहेगा। क्योंकि कोरोना प्रकोप के चलते..आक्सीजन की कमी ने ही उनके भाई को हमेशा हमेशा के लिए छीन लिया।              

                     जानकारी देते चलें कि विजय केशरवानी पहले दौर के कोरोना काल से लेकर वर्तमान तक तन मन धन से गरीबों का आसू आंसू पोछते रहे। विजय केशरवानी कब आसूओं के समुन्दर में घिर गए खुद उन्हें ही नहीं पता चला। कोरोना का कहर केशरवानी परिवार पर इस कदर टूटा कि..संभलने का मौका भी नहीं मिला। देखते ही देखते पूरा परिवार कोरोना की भंयकर चपेट में आ गया।

                          जानकारी हो कि विजय केशरवानी कोरोना के पहले प्रकोप काल से गरीबों के बीच लगातार सक्रिय रहे। इसमें उन्हें ना केवल संगठन बल्कि परिवार का भी भरपूर योगदान मिला। यही कारण है कि लोगों के बीच  पहुंचकर विजय केशरवानी ने कोरोना पीड़ितों के घाव पर मरहम लगाया। कोरोना के दूसरे दौर में भी विजय केशरवानी ने सेवा अभियान को बनाकर रखा।  ठीक इसी दौरान मई के पहले सप्ताह में केशरवानी परिवार का सबसे काबिल सदस्य अजय केशरवानी कोरोना का शिकार हो गए। 19 मई को परिवार के सदस्यों ने तेरहृवी कार्यक्रम में भावुक होकर याद किया। आने वाले समय में फिर कभी किसी को आक्सीजन की कमी का सामना नहीं करना पड़े…कालोनी के गार्डन में आक्सीजन के 13 प्लांट का रोपण किया।

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                  इस दौरान कभी गमगीन नजर आ रहे जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने बताया कि वह अन्दर से टूटन महसूस कर रहे हैं। ना केवल उनका…और पार्टी का..बल्कि अजय के कई बड़े अधूरे काम को पूरा करना है। साथ ही उन गरीबों का भी आंसू पोछना है..जिन्हें कोरोना ने अपना शिकार बनाया है।

                 भावुक विजय केशरवानी ने बताया टेस्ट के बाद छोटे भाई को 21 अप्रैल को अपोलो में  भर्ती कराया। सही समय पर भर्ती कराया था। इसलिए कभी सोचा भी नहीं कि आज अजय हमारे बीच नहीं रहेगा। इसी दौरान अपोलो में 100 बेड़ कोविड मरीजों को समर्पित किए जाने को लेकर भी नए सीईओ से बातचीत भी हुई थी। विजय ने कहा होनी को कुछ और ही मंजूर था। और उनका छोटा भाई हमेशा हमेशा के लिए उन्हें छोड़कर बहुत दूर चला गया।

लडता रहा जनता की लड़ाई

            याद दिलाते चलें कि  विजय केशरवानी भाई को अपोलो में भर्ती करने के बाद जनता की लड़ाई लड़ते रहे। शासन प्रशासन के सहयोग से गरीब जनता की लड़ाई में उन्हें सभी जगह जीत मिली। लेकिन जान से प्यारा छोटे भाई ने उन्हें हरा दिया। विजय ने दुख जाहिर करते हुए कहा कि छोटे भाई ने उन्हें सेवा का एक भी मौका नहीं दिया। हम सबको छोड़कर चला गया।

मां  और अपनी बच्ची को छोड़ाया..बहू का सामना करने का साहस नहीं

काफी भावुक नजर आए विजय ने बताया कि छोटे भाई की नारजगी उससे हो सकती है..क्योंकि वह छोटा है। लेकिन वह मां का बहुत लाड़ला था। बावजूद इसके उसने मां को भी छोड़ दिया..उसे अपनी मासूम बच्ची का भी ख्याल नहीं आया। आज भी उसकी पत्नी का सामना करने से डररता हूं।समझ में नहीं आ रहा है कि बहू को क्या जवाब दूं। अजय को गए पूरे तेरह दिन हो चुके हैं। मां से मुंह छिपा रहा हूं। समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे सिर उठा कर मुंह दिखाऊं। खुद अपने से सवाल कर रहा हूं कि आखिर उनके साथ ऊपर वाले ने ऐसा क्यों किया।

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गरीब पीड़ितों की तन मन धन से सेवा

                 जानकारी हो कि जिला कांग्रेस अध्य़क्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद विजय केशरवानी ने संगठन के निर्देश पर पिछले एक साल से तन मन धन से अपने आपको कोविड पीड़ितों की सेवा में झोंका। चाहे कोटा में आदिवासी और गरीबों के बीच राशन वितरण का मामला हो…. या फिर लिंगियाडीह समेत आस पास के क्षेत्रों में गरीबों तक राशन पहुंचाने की बात हो।  विजय केशरवानी को जरूरत मंदों ने जब चाहा अपने अपने बीच पाया। 

                            देश में जब पहली बार लाकडाउन लगा…लोगों के नंगें पांव में जूता चप्पल पहनाते समय सबसे आगे विजय केशरवानी को ही देखा गया। इस दौरान उन्होने ना केवल राशन वितरण किया.. बल्कि एक एक व्यक्ति को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की। पीड़ित चाहे  झारखण्ड, विहार, राजस्थान उत्तर प्रदेश समेत किसी राज्य के क्यों ना हो। उन्होने कोविड काल में मरने वाले परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए संगठन और सरकार के समेकित प्रयास से प्रयाग दर्शन कराया।

कोविड अस्पताल के लिए किया संघर्ष

                        चाहे जिला आर्युवेदिक अस्पताल को कोविड सेन्टर बनाने का मामला हो..या फिर रेलवे कोच को कोविड बोगी बनाये जाने का अभियान हो। विजय केशरवानी ने विपरीत हालात में दम लगाया। और सफलता भी उन्हें मिली। इस दौरान जिसने भी उन्हें आवाज दिया..वह ना केवल पहुंचे.. बल्कि अपने खर्च पर कोविड मरीजों का इलाज भी किया।

               सेवा कार्य के दौरान उन्हें पता भी नहीं चला कि कोविड का कहर उनकी तरफ भी बढ़ रहा है। कोविड का कहर सबसे पहले विजय के छोटे भाई पर टूटा। उस समय विजय तोरवा मुक्तिधाम में कोविड के शिकार दो मृतकों का अंतिम संस्कार कर रहे थे। क्योंकि मरने वालों के परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। जिसका जिम्मा विजय ने संभाला । 

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सेवा के बीच मिली खबर

                  इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि छोटा भाई अजय पाजीटिव है। आनन फानन में विजय ने भाई को भर्ती कराया। जब घर लौटे तो मां की हालत भी खराब थी। इसके बाद हाथ पैर मारकर मां को भी अपोलों में इलाज के लिए भर्ती किया। हालात को भांप ही विजय ने खुद का टेस्ट कराया… तो पता वह भी पाजीटिव हैं। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उन्हें अभी धैर्य की परीक्षा जो देनी थी। खबर मिली कि छोटे भाई की पत्नी के अलावा उनकी पत्नी भी कोरोना पाजीटिव है।  उस समय विजय टूट गए गए…जब घर में मौजूद तीन मासूम बच्चियां भी कोरोना पीड़ित मिले।

103 डिग्री बुखार में करते रहे मां भाई की सेवा

                भाई को अपोलो में भर्ती कराने के बाद विजय केशरवानी खुद 103 डिग्री कोरोना बुखार की आग में झुलसते रहे। हिम्मत नहीं हारते हुए खुद की जिन्दगी दांव पर लगाकर कोरोना से संक्रमित पत्नी और बहू की इलाज की व्यव्था की। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि बच्चियों को भी कोरोना हो गया है। तत्काल सभी बच्चियों को परिजनों के हवाले कर होम क्वारंटीन किया। लेकिन इस दौरान कोरोना पीड़ित गरीबों का आंसू पोछना नहीं छोड़ा। गंभीर अवस्था में रहते हुए सभी का सहयोग किया। अन्त में उन्हें मां भाई के बाद खुद के कोरोना इलाज को लेकर अपोलो में भर्ती होना पड़ा। डॉक्टरों ने बताया कि विजय की हालत बहुत नाजुक है। बावजूद इसके  जीवट विजय केशरवानी ने हार नहीं मानते हुए कोरोना पर फतह हासिल किया। खुद अपोलो प्रबंधन को भी मानना पड़ा कि विजय ने दवा के साथ अपनी दृ़ढ़ इच्छा शक्ति से कोरोना को हराया है।

ठगी के शिकार पीड़ितों ने की शिकायत

लेकिन भाई की मौत ने अन्दर तक तोड़ा

                  इलाज के दौरान जब विजय को पता चला कि छोटा भाई नहीं रहा…मां बहुत गंभीर है…बच्चे बहू  और पत्नी की कोरोना से जंग अभी चल रही है। पल पल की जानकारी के बाद विजय को पूरी उम्मीद थी कि सब ठीक हो जाएगा। छोटे भाई के नहीं रहने की खबर के बाद विजय अन्दर तक टूट गए। गुमसुम विजय इस खबर के बाद अपोलों की छत देखते रह गए। कुछ नहीं बोला..शरीस से ठीक होकर घर तो आए..लेकिन अन्दर से पूरी तरह से विखरे हुए।

लगाया आक्सीजन का 13 प्लांट

           19 मई को विधि विधान से अजय केशरवानी का तेरहवी मनाया गया। विजय केशरवानी ने अपने भाई और कोरोना काल में आक्सीजन से मरने वालों की याद में आक्सीजन का तेरह प्लांट लगाया। विजय ने कहा..मौत मेरे भाई की ही नहीं..सभी की मौत दुखद है। हमने आक्सीजन का प्लांट लगाया है। मैं इऩका जीवन भर सेवा करूंगा। आगे भी जब तब आक्सीजन प्लांट ही लगाउंगा। क्योंकि कोरोना में लोगों की मौत की वजह आक्सीजन है। कोशिश रहेगी की वातावरण में आक्सीजन की कभी कमी ना हो। 

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