मेरा बिलासपुर

कार्यशाला को आईजी मीणा ने बताया…विवेचना के दौरान सावधानी जरूरी..नशा के व्यापारियों की संपत्ति को करें कुर्क

रेंज के नामांकित 8 राजपत्रित अधिकारियों समेत विवेचक स्तर के 80 पुलिस अधिकारी शामिल

बिलासपुर—पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर ड्रग कानून प्रवर्तन के प्रदर्शन, प्रभावशीलता और  समझ को बेहतर बनाने बिलासपुर रेंज के जिलों में पदस्थ पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन PROCEDURES & MANDATORY PROVISIONS OF NDPS ACT” विषय पर विशेषज्ञों ने विस्तार के साथ जानकारी को साझा किया।कार्यशाला का शुभारंभ आईजी बद्री नारायण मीणा, पुलिस कप्तान पारूल माथुर की विशेष उपस्थिति में हुआ। रेंज के जिलों से नामांकित 8 राजपत्रित अधिकारियों समेत विवेचक स्तर के 80 पुलिस अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला में एनसीबी इन्दौर मध्यप्रदेश के आईओ रामखिलाड़ी मीणा और संयुक्त संचालक अभियोजन, जांजगीर-चांपा  माखन लाल पाण्डेय ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। 
 पुलिस कप्तान पारूल माथुर ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होने बताया कि स्वापक पदार्थ और  मनःप्रभावी अधिनियम, 1985 के तहत मामलों में अपराधी को सजा दिलाया जाना पुलिस विभाग की अहम जिम्मेदारी है। इस प्रकार का अपराध समाज के लिए बडी चुनौती है। अपराधी को सजा हो इसके लिए आवश्यक है विवेचना उच्च स्तर की हो।  प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की खामी न हो। न्यायालय में अपराधी को सजा दिलाये जाने की सफलता के लिए आवश्यक है कि पूरी कार्यवाही पारदर्शी और विधिक प्रावधान के अनुरूप हो। 
आईजी बद्री नारायण मीणा ने बताया कि कार्यशाला के आयोजन को समझने की जरूरत है। जब कोई व्यक्ति नशे में लिप्त होता है तो उसका दुष्प्रभाव परिवार, समाज पर पड़ता है। वह अपराध में लिप्त होता जाता है।  इन स्थितियों पर विचार करना सभी का दायित्व है। अधिनियम के तहत सबूत का भार आरोपी पक्ष पर है कि वह अपने को निर्दोष को सिद्ध करें। एनडीपीएस एक्ट की प्रक्रिया को पुलिस अधिकारी जटिल समझते हैं। जबकि अधिनियम में ही विवेचना के प्रत्येक कड़ी के प्रावधान निहित हैं।
 अधिनियम के तहत मामलों में दोषमुक्ति के कारणों पर प्रकाश डालते हुए मीणा ने बताया कि इसका मूलभूत कारण है कि विवेचक अधिनियम का अध्ययन नहीं करते हैं। जिससे विवेचना के दौरान प्रक्रियात्मक त्रुटि होती है। जिसका लाभ आरोपी को मिलता है। व्यापार में संलिप्त सभी व्यक्तियों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही किया जाना चाहिए। अवैध व्यापार से अर्जित परिसंपत्तियों का पता लगाकर उसकी कुर्की की कार्यवाही किया जाना चाहिए। 
एन.सी.बी.इन्दौर से कार्यशाला में प्रशिक्षण देने पहुंचे  रामखिलाड़ी मीणा ने एनडीपीएस एक्ट के बारे में विस्तार से बताया। उन्होने आसूचना, प्रवर्तन और समन्वय के अनुसार कार्य करते हुए नशीले पदार्थो की आपूर्ति में कमी लाने की गुर बताये।  नारकोटिक्स ड्रग्स और सायकोट्रापिक पदार्थों की पहचान, ड्रग डिटेक्शन में नवीनतम उपकरणों के साथ फिल्ड टेस्ट किट का उपयोग करना बताया। 
   संयुक्त संचालक माखन लाल पाण्डेय,ने एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत होने वाली  कार्यवाही में प्रक्रियात्मक त्रुटियों को साझा किया।  एनडीपीएस मामलों की केस स्टडी के साथ आरोपियों के दोषमुक्त होने के कारणों और एक्ट के साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता की कार्यवाही को भी समझाया। एन.डी.पी.एस. की प्रक्रिया एवं उसके निराकरण के संबंध में नवीनतम् दिशा निर्देशों के साथ नियमों से अवगत कराया ।
  कार्यशाला का समापन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपमाला कश्यप, ने प्रकरणों की समीक्षा कर विवेचकों की तरफ से पेश की गयी जानकारियों को साझा किया।अतिरिक्त पुलिस कप्तान जीपीएम अर्चना झा ने प्रशिक्षण में उपस्थित अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। पुलिस महानिरीक्षक श्री मीणा द्वारा प्रशिक्षकों को स्मृति चिन्ह भेंट किया। 

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