बच्चा चोरी के प्रकरण में DNa टेस्ट करवाने के निर्देश,महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने की जशपुर में 19 प्रकरणों की सुनवाई

जशपुरनगर।छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक आज जशपुर जिले के महिलाओं के उत्पीडन से संबंधित प्रकरणों की जन सुनवाई की। उन्होंने सुनवाई के लिए उपस्थित सभी पक्षकारों से चर्चा कर संबंधित प्रकरणों के स्थिति के संबंध में पूछताछ की। सुनवाई के दौरान सोशल डिस्टेंस एवं फिजिकल डिस्टेंस का पालन करते हुए कार्यवाही की गई।
मंत्रणा सभाकक्ष में कुल 19 प्रकरणों की सुनवाई की गई जिसमें से 5 प्रकरण संम्पत्ति विवाद, 2 प्रकरण दहेज प्रताड़ना, 6 प्रकरण मानसिक प्रताड़ना से संबंधित था। अन्य 2 प्रकरण, कार्यस्थल पर प्रताड़ना के एक प्रकरण, मारपीट एवं घरेलू हिंसा के प्रकरण, विविध के 01 प्रकरण, शारिरीक शोषण के प्रकरण संबंधित था।  उल्लेखनीय है कि एक प्रकरण में आवेदक द्वारा भरण पोषण की मांग की गई।

डाॅ. किरणमयी नायक ने सुनवाई करते हुए कहा कि आवेदिका ने अपने पति शिकायत अपनी और अपने दो पुत्री के भरण पोषण की राशि की मांग की। उन्होंने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अनावेदक को कहा कि प्रति माह उनकी पत्नी और उनके दो बच्चों के लिए 10 हजार भरण पोषण के लिए उनके खाते में जमा करेंगे। उन्होंने इस प्रकरण को 6 माह के लिए निगरानी में रखा है तथा अनावेदक के साथ आए सरपंच को भी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. किरणमयी नायक ने एक प्रकरण की सुनवाइ्र्र करते हुए एक चिकित्सक संस्था पर बच्चे प्रकरण की शिकायत मिलने पर सुनवाई करते हुए कहा कि वर्तमान में तत्कालिक मेडिकल अधिकारी  डाॅक्टरी का व्यवसाय करते हैं लगभग 20 साल पहले हुई डिलीवरी में बच्चें बदलने की शिकायत आवेदक द्वारा की गई थी।

आवेदिका का कहना है कि उनको पुत्र प्रसव हुआ था और उन्हें मृत पुत्री थमा दिया गया था। वर्तमान में आवेदक गणों को पता चला की एक गांव में उनका बच्चा कुलदीप नाम से पल रहा है वह पुत्र 20 साल का हो गया है। उनके पुत्र का व्यवहार आचरण शक्ल माता-पिता के समान है आवेदकगणों ने डीएनए टेस्ट की मांग की  है। डाॅ. किरणमयी नायक ने ऐसी दशा में कहा कि बिना डीएनए टेस्ट के इस प्रकरण का सुनवाई किया जाना संभव नहीं है उन्होंन कुनकुरी एसडीओपी को इस प्रकरण के लिए अधिकृत किया है। तथा जशपुर के मुख्यचिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को डीएनए टेस्ट में सहयोग प्रदान करने के लिए कहा गया है। डीएनए के पश्चात् रिपोर्ट को राज्य महिला आयोग को 6 प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने एक प्रकरण की सुनवाई करते हुए उपस्थित आवेदिकागण और अनावेदक तहसीलदार पटवारी के प्रकरणों को सुना गया और आवेदिकागणों के घर को तोड़ने की नोटिश तत्कालिन तहसीलदार द्वारा दिया गया था। उस दौरान 2017 में आवेदिकगण ने शिकायत प्रस्तुत की थी। तत्कालिन तहसीलदार ने जानकारी दिया था कि आवेदकगणों ने घास जमीन पर कब्जा किया गया है और उसके अतिरक्ति अन्य जमीन पर भी कब्जा कर रखा था। जिस पर तहसीलदार द्वारा शासन की अन्य योजनाओं की जमीन का नाम जोख किया जाने के लिए नोटिश दिया गया है।

आवेदिका पक्ष की ओर से जवाब दिया गया कि तीन वर्ष पूर्व जितनी जगह पर काबिज थे उससे अधिक जगह पर कब्जा नहीं करना है शासन की योजना में बाधक नहीं करेंगे। उन्होंने उपस्थित जशपुर तहसीलदार को निर्देशित किया कि आवेदिकागणों को वैधानिक पटृटा प्राप्त करने में निम्नानुसार सहयोग प्रदान करें। एक प्रकरण में उभय पक्ष उपस्थित दोनों पक्षों के बीच आपसी विवाद है। तहसीलदार बगीचा में आवेदन लगाकर निराकरण करा सकते है। प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया है।

डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि महिलाएं किसी भी तरह की मानसिक प्रताड़ना, शारीरिक शोषण, घरेलू हिंसा तथा अन्य किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर निःसंकोच निडर होकर शिकायत कर सकती हैं। महिलाएं अपने मामलों की शिकायत सादा आवेदन पत्र में राज्य महिला आयोग रायपुर को भेज सकती हैं। इसके साथ ही आयोग की वेबसाईट सीजीमहिलाआयोग.कॉम में आनलाईन तथा टोल फ्री नम्बर 18002334299 में निःशुल्क दर्ज करा सकते हैं। मामलों में निःशुल्क कार्यवाही की जाती है। सुनवाई के दौरान कलेक्टर महादेव कावरे, पुलिस अधीक्षक बालाजी राव, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष हीरू राम निकुंज, शासकीय अधिवक्ता सुश्री शमीम रहमान, महिला बाल विकास विभाग जिला कार्यक्रम अधिकारी अजय शर्मा एंव महिला बाल विकास अधिकारी सुश्री विष्मिता पाटले उपस्थित थे।

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