इंडिया वाल

क्या कोरोना वैक्सीन के कारण बढ़ रही है दिल की बीमारी?, विशेषज्ञों ने बताई और अधिक अध्ययन की जरूरत

दिल्ली: देश के अलग-अलग हिस्सों में बीते कुछ दिनों के भीतर हार्ट अटैक कारण हो हुई मौत में इजाफे को लेकर एक बहस चल रही है कि क्या उन मौतों का संबंध कोरोना महामारी से बचाव के लिए दिये गये वैक्सीन से है। इस संबंध में विशेषज्ञों द्वारा की गई कई स्टडीज में संकेत मिले हैं कि युवाओं को लगी कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज के बाद दिल की बीमारी से पीड़ित होने की बात सही हो सकती है।लेकिन साथ ही कई डॉक्टर्स और विशेषज्ञों का कहना है कि इस बात को पुख्ता तौर पर साबित करने के लिए कोई बड़ी रिसर्च अब तक नहीं की हो पाई, इस लिहाज से सीधे तौर पर इस विषय में कुछ भी कहना पूरी तरह से सही नहीं होगा। वहीं अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के जर्नल ने खुलासा हुआ है कि कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज के बाद मायोकार्डिटिस, पेरिकार्डिटिस या मायोपेरिकार्डिटिस का खतरा अधिक है।

इसके साथ ही अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया गया है कि वैक्सीन की दूसरी डोज से हृदय की मांसपेशियों में सूजन और हृदय के आवरण से संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। विषेशज्ञों का कहना है कि अधिकांश टीकों की तरह कोरोना वैक्सीन भी कुछ सामान्य दुष्प्रभाव दिखा सकते हैं, मसलन इंजेक्शन दिये जाने वाले स्थान पर दर्द या लाली होना। इस बात का कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं है कि कोरोना वैक्सीन के करण दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन यह वैक्सीन कुछ लोगों के दिल की सूजन का कारण बन सकती है। हालांकि, यह दुष्प्रभाव आम तौर पर हल्का होता है और उपचार के साथ ठीक भी हो जाता है।

अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की अध्ययन में बताया गया है कि कोरोना टीके से हृदय की सूजन (मायोकार्डिटिस) की दर कोरोना संक्रमण के कारण होने वाली हृदय की सूजन की तुलना में बहुत कम होती है। इस पूरे मामले में विशेषज्ञ अभी भी सटीकता से इस कारण कुछ भी कहने में असमर्थ हैं क्योंकि अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी द्वारा प्रकाशित की गई रिसर्च पेपर की अभी तक अन्य वैज्ञानिकों द्वारा समीक्षा नहीं की गई है।

Human Rights Day:जानें आज क्यों मनाया जाता है मानवाधिकार दिवस,उल्लंघन होने पर कहां करें शिकायत

लेकिन अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उनके कार्डियक क्लिनिक में आने वाले 566 ऐसे लोगों पर प्रोटीन अनस्टेबल लेसियन सिग्नेचर (पीयूएलएस) कार्डियक टेस्ट किया, जिन्होंने हाल ही में कोविड टीकों (फाइजर-बायोएनटेक या मॉडर्न) में से एक की दूसरी खुराक ली थी।

पीयूएलएस कार्डिएक टेस्ट में लिये गये ब्लड सैंपल को नौ अलग-अलग मार्करों पर मापकर 5 साल की अवधि में दिल के दौरे के जोखिम की भविष्यवाणी करने का दावा किया गया है। इसमें पता चला उच्च पीयूएलएस स्कोर दिल के दौरे के बढ़ते जोखिम का संकेत दे रहे हैं। परीक्षण किए गए व्यक्तियों में टीकाकरण के बाद नौ मार्करों में से तीन में वृद्धि हुई थी और मार्कर सूजन से जुड़े थे। अध्ययन के अनुसार पूर्व-टीकाकरण स्तरों की तुलना में पीयूएलएस स्कोर अनुमानित 11 प्रतिशत ज्यादा था।

अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के इस रिसर्च में स्पष्ट कहा गया है कि पीयूएलएस के अध्ययन बता रहे हैं कि कोरोना टीकों के कारण दिल के दौरे के जोखिम बढ़ा है। लेकिन अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की ओर जारी की गई स्टडी पेपर में कोई सांख्यिकीय विश्लेषण नहीं दिखाई देता है और साथ ही डेटा की कमी के कारण उसे सीधे दिल के दौरे के जोखिम से जोड़ना विश्वसनीय नहीं जान पड़ता है।

अन्य विशेषज्ञों का कहनी है कि आमतौर पर किसी भी तरह के टीकाकरण के कारण अस्थायी सूजन आती है क्योंकि आपका शरीर टीके की डोज के विपरीत प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। इस वजह से सूजन दिखाई देना या उसमें वृद्धि होना स्वाभाविक है। हालांकि उन सूजन को सीधे दिल के दौरे के जोखिम से नहीं जोड़ा जा सकता है।

Back to top button
CLOSE ADS
CLOSE ADS