क्या हिंदी से बैर है… स्कूल शिक्षा विभाग को…? लंबे संघर्ष के बाद खुले स्कूल को बंद कर इंगलिश मीडियम शुरू करने के ख़िलाफ़ ग्रामीणों का हल्ला बोल

भुवनेश्वरपुर (सूरजपुर) । शासकीय विद्यालय (हिंदी माध्यम) बंद कर उसके स्थान पर स्वामी आत्मानन्द अंग्रेजी माध्यम  शासकीय स्कूल खोलने के खिलाफ हल्ला बोल शुरू हो गया है। भुवनेश्वरपुर के समाज सेवी राजेश शर्मा के नेतृत्व में ग्रामवासी सरपंच, पंच,एवं नागरिकगण  स्कूल शिक्षा मंत्री के गृह जिले से ही  राज्य सरकार की  नए अंग्रेजी स्कूल की शिक्षा नीति पर  सवाल खड़े कर दिए है।

सीजीवाल से हुई एक चर्चा में राजेश शर्मा का कहना है कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हिंदी माध्यम के 52 स्कूलों को पहले बंद किया । फिर उसी जगह पर स्वामी आत्मानन्द अंग्रेजी माध्यम का स्कूल खोल दिया। इस प्रक्रिया में इन 52 स्कूलों के  हिंदी भाषी छात्र  अपने शिक्षा के मंदिर को छोड़ पलायन को मजबूर हुए है। समाजसेवी राजेश शर्मा का कहना है कि छत्तीसगढ़ में कोई भी निजी विद्यालय या शासकीय उन्नयन विद्यालय सिर्फ एक माह की साधारण प्रक्रिया से “यूडाइस कोड” प्राप्त कर लेता है। परन्तु क्या कारण है कि छत्तीसगढ़ शासन की बहुप्रचारित और कथित महत्त्वाकांक्षी योजना”स्वामी आत्मानन्द शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय” को यू डाइस कोड नहीं मिल पा रहा है ..! आखिर क्यों आत्मानन्द अंग्रेजी माध्यम विद्यालय  पुराने हिंदी माध्यम डाइसकोड को अपना बताती हैं।जबकि नए डाइसकोड से “स्वामी आत्मानन्द अंग्रेजी माध्यम”संचालित किया जा सकता है। सत्र2020-21 में लगभग 52 हिंदी माध्यम स्कूल समाप्त हो गए और अब 119 स्कूलों का भी अस्तित्व समाप्त करने की तैयारी है।पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में स्थानीय ग्रामसभा की अनुमति आवश्यक और अनिवार्य है परंतु उस विधिक प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया है और न किया जा रहा है। 

राजेश का कहना है कि सरकार को इतिहास में झांकना चाहिए स्कूल खुलने के कितना संघर्ष हुआ है।  स्कूल खुलने में सदियों लग गए हमारे स्थापित हिंदी माध्यम स्कूलों को क्यो खत्म किया जा रहा है..? ऐसी के कमरे में बैठकर सरकार के सलाहकार मंडल और नौकरशाह कैसी योजना बना रहे है ,जो स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी पसंद नही है। 

राजेश शर्मा ने सिलसिले वार अपनी बात रखते हुए बताया कि  भुवनेश्वरपुर का विरोध अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा से नही हैं। आत्मानन्द अंग्रेजी माध्यम विद्यालय भुवनेश्वरपुर में अभिनन्दन है । यदि भवन की कमी है तो  एक ही परिसर में  दो पालियों में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूल लगाए जा सकते है …!   ऐसा क्यों नही किया जा रहा है। हिंदी माध्यम क्यो बंद किया जा रहा है।  ग्रामवासियों ने कौन सा अपराध कर दिया है,जो उनका अधिकार छीन लिया जा रहा है, नई शिक्षा नीति तो मातृभाषा प्रधान है । हिंदी से बैर क्यो रखा जा रहा है। प्रदेश की ग्रामीण अंचल में यातायत के संसाधनों कमी है। लड़कियो  को स्कूली शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने में समाज और सरकारों को बहुत समय लगा है।अभी भी हायर सेकंडरी स्कूलों में बालिकाओं के स्कूल ड्राप की स्थिति बहुत अच्छी नही है।  ये कैसी नीति है कि हिंदी माध्यम की लड़कियाँ पुनः दस-दस किलोमीटर दूर जायेगीं और पालक दूरी और परेशानी  देखकर पढ़ाई को बंद करा देंगे। 

इस विषय पर सुरजपुर जिले के भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष बाबूलाल अग्रवाल का कहना है कि हिंदी माध्यम के स्कूल  बंद किये बिना … अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोले जा सकते थे। भूपेश सरकार को जनहित, छात्र हित, आदिवासी और  आंचलिक क्षेत्र के आम  छत्तीसगढ़िया के हितों के विपरीत फैसले लेने की आदत है। यह सरकार जमीनी स्तर पर खोसो दूर है। इनकी योजनाए सब हवा हवाई बन रही है।  हम हिंदी माध्यम के स्कूलों को बंद करने का विरोध करते है।

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