काशीनाथ गोरेः समाज की सच्ची सेवा में समर्पित जीवन…

( राकेश शर्मा ) जब-जब बाबा करे सवारी लेकर सकल समान…… यह बात भोले शंकर के लिए कही गई थी कि वह अपने सवारी, अपना अस्त्र और सारा चीज अपने साथ लेकर चलते चलते थे। एक और बात कही है साधु सन्यासी और सांड इनसे बचे सो जाए काशी….. बिलासपुर में जितने भी काशी नाम के व्यक्ति थे… उन्होंने अपनी ऊंचाइयों को छुआ….। मैं अपने व्यक्तिगत जीवन में दो काशी भैया को जानता हूं। एक हॉकी के खिलाड़ी काशी भैय्या… ,जिन्होंने बिलासपुर की ऊंचाइयों को छुआ और एक काशीनाथ गोरे जी….. जो टिकरापारा में रहकर नौकरी करते हुए भी अपने पिताजी के आदर्शों को …..अपने पिताजी को बताए हुए मार्गों को ….संपूर्ण शिक्षकों को निछावर कर के इस व्यक्ति ने अन्ना गोरे के आदर्श के झंडे को थाम रखा था…..। उसका ध्वजवाहक बना और संपूर्ण जीवन युवाओं के राष्ट्र निर्माण ,चरित्र निर्माण, देश प्रेम, हिंदू प्रेम यह सब उनके मन में कूट-कूट कर भरा रहा ।लेकिन उस से ऊपर उठकर उन्होंने सारे राजनीतिक दलों को अपनी सीमाओं को तोड़कर उन्होंने जो कार्य किया, चाहे किसी दल का व्यक्ति हो।…। इस शहर में कुछ लोग ऐसे हैं, जिनको मैं बहुत नमन करता हूं। चाहे किसी भी विचारधारा के हों, मैं आज याद करना चाहूंगा आदरणीय राम चंद्र दुबे जी को.. मैं आज याद करना चाहूंगा आदरणीय अन्ना गोरे.. बबन राव शेष, मदन भैया को…. विपरीत विचारधारा के रहते हुए भी इन लोगों की इच्छा शक्ति थी । बिलासपुर सशक्त हो…. बिलासपुर आत्म स्वाभिमानी बने… बिलासपुर में हर व्यक्ति को आम सुविधा मिले… बिलासपुर कोई व्यक्ति शोषित ना हो… इन सब लोगों ने अपना जीवन समर्पण किया ।

लोग बात कहते हैं कि पूत के पांव पालन में दिखते हैं। ” नोबडी कैन मे लीडर ,राइटर, प्लेयर ,एक्टर …” यह सब ऊपर से बनकर आते हैं और ना एक गांधी …एक विवेकानंद ….एक राज कपूर …. एक स्वामी विवेकानंद कैसे होता कि कभी-कभी मुझे सोचने के लिए मजबूर करता है ।मैं सब बात इसलिए कह रहा हूं क़ि आज बिलासपुर के युवाओं को सर्वाधिक महत्व देने वाला व्यक्ति ,हम सबके बीच में नहीं रहा । मैं क़ाशीनाथ गोरे जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं । मैंने उनसे सीख लिया । कितने भी आप अपने दल के प्रति कट्रटर हों…। लेकिन सामने वालों का सम्मान करो। उनका महत्व दो । यदि आवश्यकता हो तो उनसे जरूर बात करो । संवाद ही जीवन है । इसके बिना सब अधूरा है …. यह़ बात करने क़ी किसी में ताकत थी । जो उपरोक्त नाम मैंने बताएं और आदरणीय काशीनाथ गोरे जी युवाओं को प्रमोट करने वाला एक ही व्यक्ति था और एक ही व्यक्ति रहा नमन करता हूं। श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं । यह मेरा व्यक्तिगत विचार है।

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