मजदूरों को फिर सता रहा लॉकडाउन का डर,24 घंटे में तेजी से बढ़ा पलायन,पिछले साल की पीड़ा से अबतक नहीं उभरे प्रवासी

दिल्ली।कोरोना जिस तरह से भारत में पैर पसार रहा है उसे देखते हुए लोगों के दिल में एक सवाल उठने लगा है कि कहीं देश में लॉकडाउन तो नहीं लगने वाला. इस सवाल का जवाब तो आने वाले वक्त में मिलेगा लेकिन, लॉकडाउन के डर से प्रवासी मजदूरों का पलायन पिछले 24 घंटे में तेजी से बढ़ा है. दिल्ली, मुंबई, इंदौर, भोपाल, सूरत, झांसी, चंडीगढ़ और अब तो देश के हर छोटे-बड़े शहरों से ना जाने कितने लोग अपने गांव और घर की ओर लौट पड़े हैं. इनमें महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग, युवा और सैकड़ों हजारों की भीड़ है.ये प्रवासी मजदूर हर हालात में घर पहुंचने को बेताब हैं. ऐसी ही तस्वीरें पिछले साल भी आई थी, जिसकी टीस आजतक रूह को झकझोरती है. पलायन और दुर्दशा की ऐसी ही तस्वीर आज फिर अंदर तक सिहरा रही है. राजधानी दिल्ली के रेलवे स्टेशन और आनंद विहार बस अड्डा पर अपने गांव की और लौट रहे लोगों की भीड़ लगातार इकट्ठा हो रही है. इन्हें ना तो कोरोना वायरस की परवाह है और ना ही दो गज की दूरी की.

मजदूरों में लॉकडाउन का डर

दिल्ली से बिहार और उत्तर प्रदेश से पलायन कर रहे लोगों को डर है कि अभी वीकेंड लॉकडाउन ही लगा है. कल को अगर संपूर्ण लॉकडाउन लगा तो दाने-दाने को मोहताज हो जाएंगे. जैसा पिछली बार हुआ था. यही डर उन्हें जबरन घर लौटने के लिए मजबूर कर रहा है. हालांकि इस पलायन की एक अलग हकीकत भी है. जब हमारे रिपोर्टर ने इनसे वजह जानने की कोशिश तो पता लगा कि एक तरफ लॉकडाउन का डर है तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में होने वाला पंचायत चुनाव भी. जिसने बसों में भीड़ बढ़ा दी है और कोरोना को सुपर स्प्रेडर बना दिया है.

कोरोना के बीच पंचायत चुनाव एक बड़ी चुनौती

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच पंचायत चुनाव एक बड़ी चुनौती है. लेकिन लाखों लोगों के पलायन से ये चुनौती और बढ़ने वाली है. क्योंकि मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर प्रवासी मजदूरों की भीड़ कम नहीं हो रही. उत्तर प्रदेश और बिहार जाने के लिए मजदूर लगातार स्टेशन पर पहुंच रहे हैं. ना इनके पास कोई रिजर्वेशन टिकट है और ना ही पैसे. गिने चुने लोगों के पास ही टिकट है जिन्हें सफर करने की इजाजत मिल रही है. बाकी बचे प्रवासी कई दिनों से इस आस में बैठे हैं कि शायद कोई रास्ता निकल आए.

एक बार फिर डर के खौफ में मजदूर

ये वो मजदूर हैं जो काम और रोजगार की तलाश में अपनी मिट्टी, अपने गांव और परिवार से हजारों किलोमीटर दूर पहुंच गए थे. डर और खौफ में एक बार फिर वापस लौट रहे हैं लेकिन, इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो कोरोना वायरस से संक्रमित भी हो रहे. पूरे देश से प्रवासी मजदूरों के पलायन की तस्वीरें सामने आ रही हैं तो चंडीगढ़ और पंजाब भी इससे अछूता नहीं है. चंडीगढ़ और पंजाब के कई इलाकों से लगातार प्रवासी मजदूर प्राइवेट बसों में दो गुना, तीन गुना किराया देकर यूपी और बिहार के गांवों के लिए निकल रहे हैं.

अबकी बार ये मजदूर पलायन की वो दर्दनाक कहानी बयां कर रहे हैं, जिसके पीछे फिर से लॉकडाउन लगने का डर है. फिर से रोजी-रोटी छिनने की आशंका है. हो सकता है एक बार फिर ये पलायन सच सत्ता में बैठे लोगों के लिए बोझ बन जाएं. जरुरत है समय रहते तैयारी करने की ताकी इस बार पुरानी तस्वीर ताजा ना हो.

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