प्रभारवाद के जुगाड़तंत्र से छत्तीसगढ़ में दिन ब दिन गिर रहा शिक्षा का स्तर..!शिक्षक संगठन बता रहे कौन है जिम्मेदार..?

सुरजपुर।छत्तीसगढ़ में दिनोंदिन स्कूल शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है, एक तरफ प्रयोगों के नाम पर स्कूलों में नए-नए कार्यक्रम साल भर होते है उसके बाद भी असर की रिपोर्ट हो या परफारमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स का मामला हो, नेशनल अचीवमेंट सर्वे के परिणामों हो या लर्निग आउटकम के मद्देनजर आकलन के विभिन्न तरीके एवं 10-12 वी बोर्ड के खुद के जारी किए नतीजो का मूल्यांकन विश्लेषण अवसर, आप पाएंगे छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा अपने ही ढर्रे पर चल रही है।प्रभारवाद औऱ महज खाना पूर्ति वाले मॉनिटरिंग सिस्टम के चलते शिक्षा की प्रभुता के स्थान पर शिक्षा माफियाओं की शरण स्थली स्कूल शिक्षा विभाग बन चुका है जहां अरबों रुपए के वार्षिक बजट को खपाने के लिए साल भर नित में करतब दिखाए जाते हैं।

कहने को लगभग दो लाख शिक्षकों के होने पर भी भाषा, गणित,विज्ञान, पर्यावरण और सामाजिक परिवेश सतही सींख और समझ का लाभ राज्य की आबादी में एक तिहाई हिस्सा रखने वाले शामिल नैनिहालो को नही मिल पा रहा है। राज्य में पहली से आठवीं तक के बच्चों को केंद्रीय कानून की कहां शिक्षा का अधिकार देते हुए 25% सीटें निजी विद्यालयों में गरीब पिछड़े आर्थिक रूप से कमजोर, वर्ग के लोगों को बेहतर शिक्षा के लिए प्रवेश दिया जाता है किंतु इसे भी शिक्षा विभाग के माफिया दलालों ने कमाई का जरिया बना देने से वंचित तबके के वास्तविक लोगों को अवसर नहीं मिल पा रहा है।

साथ ही 2019 से 12वीं तक राज्य सरकार के द्वारा निशुल्क शिक्षा का अधिकार प्रदान किया गया है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान करती है।सरकारी स्कूल के शिक्षक संविलियन ,वेतन,डीए,एरियर, क्रमोन्नति पदोन्नति ,समय मान ,वरिष्ठता सूची, सर्विस बुक संधारण के लिए कार्यालयों का चक्कर लगाने, अकादमिक कार्यों को छोड़कर अन्यकार्यो पूरा साल गुजार देते है। बच्चों के लर्निंग आउटकम के लिए मास्टरों के ठहराव, समुदाय पालक और बच्चों के साथ संबंध खानापूर्ति मात्र है।

शैक्षिक प्रशासन के लिए तैनात डी ईओ ,बी ई ओ, ए बी ई ओ, डीएमसी, बीआरसी ,सीआरसी के पदों पर प्रभारवाद का बोलबाला है। छत्तीसगढ़ शासन की ओर से जारी राजपत्र मार्च 2019 शैक्षणिक सेवा भर्ती नियम अनुसूची में अध्यापन कार्य के लिए नियुक्त शिक्षकों के दायित्व स्पष्ट परिभाषित होने के बाद भी शिक्षक,गुरुजी प्रधान पाठक और व्याख्याता को प्रदेश के सभी जिला स्तरीय व 60 से 80 विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में जुगाड़ तंत्र से शिक्षा की दुकान चला रहे हैं, जो शिक्षा की गिरती साख और विस्तार के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है।

छत्तीसगढ़ टीचर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा का कहना है कि तय नीतियो के अनुसार शिक्षा सेवा व शैक्षिक प्रशासन का क्रियान्वयन कराने के लिए डीपीआई जिम्मेदार है।ग्राउंड लेवल पर अधिकारी कर्मचारी रिजल्ट नहीं दे पा रहे हैं,नियम का पालन नही हो रहा है,तो उचित कार्रवाई करना चाहिए ।हमेशा मास्टरों पर सारा दोष मढ़ दिया जाता है,जो कि अनुचित है। प्रदेश का स्कूली प्रशासनिक व्यवस्था का सिस्टम अधिकांश प्रभारवाद पर चल रहा है।

निर्धारित सेटअप के अनुसार शिक्षक से लेकर प्रधान पाठक, व्याख्याता, प्राचार्य बी ई ओ, ए बी ई ओ, डी ई ओ डीएमसी, डीपीसी, सहायक संचालक ,उपसंचालक, अपर संचालक से लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख पदों पर भी नियमित पदस्थापना, भर्ती पदोन्नति नहीं किए जाने से प्रभारवाद से काम चलाया जा रहा है, फलस्वरूप कामचलाऊ परिणाम आ रहे हैं।

एबीईओ संघ की कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष क्षमा सोनेल कहती है कि प्रभारवाद से उत्तरदायित्व बिखरा हुआ रहता है, मॉनिटरिंग तंत्र कमजोर होता है,इस कारण गुणवत्ता सीधे प्रभावित होती है। रेगुलर कैडर के अधिकारी आउटकम पर बेहतर फोकस कर सकते हैं। एबीईओ केडर पीएससी भर्ती से 2013 -14 में सिलेक्शन के बाद 7 साल से कार्य कर के शैक्षिक सेवा के चैनल में भूमिका के निर्वहन के लिए तैयार है किंतु वेतन विसंगति का हमें सामना करना पड़ रहा है और प्रमोशन चैनल भी स्पष्ठ नही है। अन्य विभागों की तर्ज पर एबीईओ कैडर को भी सिंगल वन टाइम शत-प्रतिशत प्रमोशन दिया जाना चाहिए इस के लिए मांग पत्र मुख्यमंत्री,शिक्षा मंत्री एवं विभाग की ओर प्रेषित किया गया है, हम आशान्वित हैं जल्द ही इस पर सकारात्मक निर्णय होगा और हमारे साथी बेहतर तरीके से दायित्व का निर्वहन कर सकेंगे, एबीईओ पद संरचना सभी ब्लॉकों में प्रशासकीय कार्यों के लिए सीधी भर्ती से की गई है, बीईओ एवं समकक्ष पदों के पर पदोन्नति के लिए प्राचार्य वर्ग 2 एवं ए बी ई ओ कैडर के मध्य 75℅- 25℅ के अनुपात नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है, सीधी भर्ती के बाद फीडिंग कैडर माना जाना अवसरों से वंचना है, जिसे तत्काल सुधारा जाना चाहिए।

सहायक शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष शिव मिश्रा का कहना है कि प्रदेश का प्राथमिक स्कूल पदोन्नति की राह देख रहा है। मजबूरी में सहायक शिक्षक ने प्रधान पाठक प्रभार दिया लिया है।विभाग के उच्च वर्ग में शासन स्तर से ही छत्तीसगढ़ राज्य भर्ती सेवा पदोन्नति नियम 2019 के प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है यह अत्यंत चिंतनीय है। प्रभारवाद ने शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ तोड़ दी है, अकादमिक कार्य के लिए चयनित अभ्यर्थी को प्रशासनिक कार्य सौंप देना,यह मानवीय संसाधन का सरासर दुरुपयोग है एवं शैक्षणिक तंत्र को दोहरा नुकसान पहुंचाने का कार्य है, एक तरफ तो स्कूलों में पढ़ाने वाले व्यक्तियों की कमी है दूसरी तरफ धड़ल्ले से कई अधिकारी बनने के लिए जुगाड़ में लगे रहते है।

संकुल प्राचार्य और संकुल समन्वयक के बीच भी तनातनी लगी रहती है, मॉनिटरिंग तंत्र खानापूर्ति बन गया है ऐसे में गुणवत्ता की कल्पना बेमानी है।उच्च वर्ग के शिक्षक प्रभारी बनने के बाद निम्न वर्ग के शिक्षक पर रुबाव झाड़ते प्रदेश में कई जगह दिखाई देते है।पढ़ाई कराने की जगह शिक्षक जुगाड़ से अफसर बनना चाहता है।जो कि चिन्ता का विषय है।

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