कई भाजपा जिलाध्यक्षों की खिसकेगी कुर्सी ?..कागजी घोड़ा दौड़ने वालों में बेचैनी..नान परफार्मर की सूची तैयार

बिलासपुर—- मुंगेली दौरा के दौरान भाजपा के प्रदेश सह संगठन प्रभारी नितीन ने अपने भाषण में दो टूक इशारा किया था कि नान परमार्मेन्स जिला अध्यक्षों की संगठन को जरूरत नहीं है। यदि उनसे संगठन की जिम्मेदारी नहीं संभलती है तो पद छोड़ें। अन्यथा हटा दिए जाएंगे। उनके स्थान पर काबिल नेताओं को जगह मिलेगा। इसके बाद भी कुछ नेता अभी भी मुगालते में है। उन्हें पूरा भरोसा है कि संगठन में बैठे उनके आका बचा लेंगे। लेकिन ऐसा होता फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है।

                जानकारी देते चलें कि पिछले दौरा के दौरान भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी नितीन ने मुंगेली में भाजपा के जिला अध्यक्षों को जमकर फटकारा था। उन्होने बैठक के दौरान दो टूक कहा कि कागजी घोड़ा दौड़ाने वाले नान परफार्मेन्स नेताओं की जरूरत नहीं है। यदि लगता कि वह घर के अन्दर रहकर कागजी घोड़ा दौड़ाकर सारा काम कर लेंगे। तो ऐसे लोगों को मुलालते में रहने की जरूरत नहीं है।

                 सूत्रों की माने तो दरअसल भाजपा ने चुनाव के मद्देनजर प्रदेश की कमान डी.पुरन्देश्वरी और उनके सहयोगी सह प्रभारी नितिन के हाथों में दिया है। संगठन को मजबूत बनाने के साथ ही वर्तमान सरकार को घोरने रणनीति तैयार करने का निर्देश आला नेताओं ने दोनों नेताओं को दिया है।

           पिछली बार  नितिन संगठन की गतिविधियों को लेकर जब मुंगेली दौरा किया..तो उन्हें संभाग के जिला अध्यक्षों की असली कहानी से रूबरू होने का मौका मिला। जिला अध्यक्षों की गतिविधियों की समीक्षा के बाद उन्होने दो टूक कहा था कि उन्हें नान परफार्मेन्स नेताओं की जरूरत नहीं है। यदि उनकी सक्रियता नही दिखाई देती है तो समय से पहले ही हटा दिया जाएगा। 

              बताते चलें कि नितिन को जानकारी मिली कि बिलासपुर संभाग में नान परफार्मेन्स जिला अध्यक्षों की कुछ ज्यादा ही संख्या है। इसलिए उन्होने मुंगेली दौरा के दौरान जमकर नसीहत दी। 

               बावजूद इसके एक महीना बाद भी कुछ जिला अध्यक्ष आज भी जिला अध्यक्ष का भ्रमण नहीं किया है। घर में कागजी घोड़ा दौड़ा रहे हैं। जिसके चलते कार्यकर्ताओं में जमकर नाराजगी देखने को मिली है। जानकारी के अनुसार कुछ सफेद कबूतरों पर संगठन की तिरछी नजर आज भी बरकरार है। जिनका पुराना रिकार्ड भी ठीक नहीं है। यदि मुंगेली में नितिन कहे गए बातों को गंभीरता से लिया गया तो कागजी घोड़ा दौड़ाने वाले जिला अध्यक्षों का जाना निश्चित है। जैसा की सुगबुगाट मिल रही है।

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