ntpc प्रबंधन की दादागिरी..जमीन विस्थापित मजदूरों को डीजीएम ने कहा..जो करना हो कर लो..इससे ज्यादा काम नहीं मिलेगा..पसंद नहीं आए तो..तो नौकरी छोड़ो दो..

बिलासपुर (रियाज अशरफी)—एनटीपीसी प्रबंधन और तारपोलीन ग्रुप के मजदूर प्रतिनिधि मण्डल के बीच बातचीत हुई। बैठक में प्रबंधन की तरफ से सीएसआर डीजीएम अरूण कुमार ने नेतृत्व किया। तारपोलीन ग्रुप मजदूरों की प्रतिनिधिमण्डल की अगुवाई में दुर्गेश साहू ने किया। बैठक…प्रबंधन की तानाशाही के साथ खत्म हुआ। प्रबंधन ने दो टूक कहा..जो करना हो..हम 15 दिन से अधिक काम नहीं दे सकते हैं। चाहो तो नौकरी छोड़ दो।

                            जानकारी देते चलें कि पिछले तीन चार दिनों से एनटीपीसी में तारपोलीन ग्रुप के 150 से अधिक दैनिक वेतन भोगी कामगार हड़ताल पर है। हड़ताल में शामिल सभी कामगार एनटीपीसी स्थापना में अपनी जमीनों को खोया है। काफी संघर्ष और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद एनटीपीसी ने एक एकड़ से कम जमीन वालों के किसानों के आश्रितों को कम्पनी में अकुशल मजदूर में रखा । 

                  मजदूरों का आरोप है कि तारपोलीन ग्रुप में काम करने वाले जमीन से विस्थापित मजदूरों की मजदूरी का दिन घटा दिया गया है। एक दिन की मजदूरी कलेक्टर दर पर 431 रूपए है। 26 दिन की कमाई 8 से 10 हजार होती है। इतनी कम राशि मिलने के बाद भी हम लगातार ईमानदारी से काम कर रहे है। इस बीच पिछले कुछ महीनों से विस्थापित मजदूरों को…मजदूरी दिनों की संख्या घटाकर 15 दिन कर दिया गया है। वेतन आधा हो जाने से परिवार का पेट पालना मुश्किल हो गया है।

             तारपोलीन ग्रुप मजदूरों की अगुवाई करने वाले दुर्गेश साहू ने बताया कि प्रबंधन जानबूझकर विस्थापित किसान मजदूरों को परेशान कर रहा है। बाहरी मजदूरों को रखा जा रहा है।  हमने इस बात को लेकर कई बार विरोध किया। बावजूद इसके प्रबंधन अपनी दादागिरी से बाज  नहीं आया। और अन्त में हमे हड़ताल पर जाना पड़ा।

        दुर्गेश ने बताया कि जमीन लेते समय एनटीपीसी प्रबंधन ने बड़े बड़े ख्वाब दिखाए थे्। हम भी थोड़ा पढ़े लिखें है। उम्मीद थी कि अच्छा काम मिलेगा लेकिन मजदूरी कर रहे हैं। जानते हुए भी कि दिया जा रहा वेतन कम है। और अब मजदूरी दिनों की संख्या आधी कर बाहरी लोगों को भर्ती किया जा रहा है। हम प्रबंधन से पूरे 26 दिनों की मजदूरी की मांग कर रहे हैं। साथ ही सुपरवाइजर और साइट इंचार्ज के पद पर स्थानीय लोगों को रखे जाने को कहा। लेकिन बाहर से लाए गए लोगों में से ही सुपरवाइजर और साइट इंचार्ज बनाया गया है।  दोनो पदाधिकारी ना केवल प्रताड़ित करते हैं। बल्कि अमानवीय व्यवहार भी करते हैं।

                       दुर्गेश ने बताया कि शुक्रवार की दोपहर प्रबंधन की तरफ से एचआर अरूण कुमार ने बातचीत के लिए बुलाया। मजदूरों की तरफ से पांच मजदूरों का प्रतिनिधिमंडल बैठक में शामिल हुआ। अरूण कुमार ने दो टूक कहा कि..नेतागिरी नहीं चलेगी। कोई भी मांग नहीं मानी जाएगी। जो करना हो करो..इतना ही काम मिलेगा..पसंद नहीं तो नौकरी छोड़ दो।

        दुर्गेश ने कहा कि बर्दास्त की कोई सीमा होती है। हम स्थानीय लोगों के साथ उग्र आंदोलन करेंगे। अपना अधिकार हासिल कर के रहेंगे। एनटीपीसी में ही सामुहिक आत्महत्या करेंगे।

                         मजदूरों की तरफ से प्रतिनिधि मंडल में दुर्गेश साहू, धर्मेन्द्र राठौर, राजू यदु, राजेन्द्र कुमार साहू, दिलीप यादव, नरेश यादव शामिल हुए।

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