मेरा बिलासपुर

न धूम्र और न पान…अपोलो के डॉक्टरों ने कहा…तम्बाकू चबाओगे..कैंसर तो होगा…बताया…ऐसे करें पहचान..फिर संभावना कम

बिलासपुर—विश्व तम्बाकू दिवस पर प्रदेश के साथ जिले में जगह जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इसी क्रम में अपोलो कैंसर अस्पताल और स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया प्रबंधन के संयुक्त तत्वाधान में स्टेट बैंक के जोनल कार्यालय व्यापार विहार में भी विशाल जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्टेट बैंक प्रबंधन ने तम्बाकू के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। अपोलो के डाक्टरों ने दो टूक कहा कि तम्बाकू चबाना सामाजिक बुराई है। यदि चबाओगे..कैसंर तो होगा ही। इसका खामियाजा ना केवल मरीज को बल्कि पूरे परिवार उठाना पड़ेगा। इसलिए तम्बाकू से दूरी बनाकर रखें।

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कैंसर की जानकारी

एसबीआई जोनल कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने तम्बाकू से होने वाले रोग पर प्रकाश डाला। अपोलों के वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ एवम् रेडीशन ऑनकोलॉजिस्ट डॉ. सार्थक मोहरिर ने बताया कि कैंसर का मतलबल कोशिकाओं की अनियंत्रित बृद्धि से है। अनियंत्रित रूप से विभाजित होने वाली कोशिकाएं अन्य ऊतकों पर आक्रमण करती हैं। कैंसर कोशिकाएं रक्त और लसीका प्रणालियों से शरीर के विभिन्न भागों में फैलता है।  इससे शरीर को विषाक्त पदार्थों से छुटकारा दिलाने वाली कोशिकाएं बुरी तरह से प्रभावित होती हैं।

कैंसर की संभावनाएं

इस दौरान डॉक्टर मोहरिर ने कैंसर के लक्षणों के बारे में बताय। उन्होने स्पष्ट किया किया कि शरीर के किसी भी भाग में मोटा होना या गांठ होना कैंंसर का संकेत हो सकता है। इसके अलावा तम्बाकू खाने वालों का बिना किसी ज्ञात कारणों से वजन का कम होना। घाव का ठीक नहीं होना। स्वर बैठना और खांसी का ठीक नहीं होना भी कैंसर की संभावनाओं को जन्म देता है।

बढ़ गया कैंसर का जोखिम

कैंसर रोग विशेषज्ञ ने बताया कि निगलने में कठिनाई,खाने के बाद बेचैनी, आंत्र या मुत्राशय की आदतों में परिवर्तन, कमजोरी या थकान महसूस होना भी कैंसर का संकेत देता है। उन्होने बताया कि आज भी 10 में 9 फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतें सिगरेट पीने या सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने से होती हैं। सच तो यह है कि धूम्रपान करने वाले लोगों को आज फेफड़ों के कैंसर का जोखिम 1964 की तुलना में ज़्यादा है। भले वह कम सिगरेट क्यों ना पीते हो।

ज्यादा घातक कैंसर

डाक्टर ने बताया कि बेशक अब कैंसर के उपचार में बेहतरी आयी है। लेकिन फेफड़े का कैंसर अभी भी किसी भी अन्य प्रकार के कैंसर की तुलना में घातक है। इससे पुरूष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी अछूती नहीं हैं। धूम्रपान से रशरीर में लगभग किसी भी जगह कैंसर हो सकता है। साथ ही धूम्रपान से संबंधित कैंसर को कैसे रोका भी जा सकता है

इस प्रकार होगा फायदा

धूम्रपान से होने वाले कैंसर को रोकने के लिए सिगरेट से दूरी बनाएं। सेकेंड हैंड स्मोकिंग से बचें। डाक्टर ने जोर देते हुए बताया कि धूम्रपान छोड़ने से 12 प्रकार के कैंसर का खतरा कम हो जाता है। इसमें फेफड़ा, स्वरयंत्र, मौखिक गुहा और ग्रसनी, ग्रासनली, अग्न्याशय, मूत्राशय, पेट, बृहदान्त्र और मलाशय, यकृत, गर्भाशय ग्रीवा, गुर्दे और तीव्र माइलॉयड ल्यूकेमिया का कैंसर प्रमुख है।

 धूम्रपान छोड़ने के 5-10 वर्षों के भीतर, आपके मुंह, गले या स्वरयंत्र के कैंसर होने की संभावना आधी रह जाती है। 10 वर्षों के भीतर मूत्राशय, ग्रासनली या गुर्दे का कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है । 10-15 वर्षों के भीतर फेफड़े के कैंसर का खतरा आधा हो जाता है। 20 साल के भीतर, मुंह, गले, स्वरयंत्र या अग्न्याशय के कैंसर होने का जोखिम धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति के जोखिम के करीब हो जाता है।  साथ ही, गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का जोखिम लगभग आधा रह जाता है ।

डॉक्टर ने बताया छोड़ने का उपाय

कार्यक्रम में सवाल जवाब के दौरान डॉक्टर सार्थक ने बताया कि सिगरेट छोड़ने के लिए च्विंगगम का प्रयोग करें। धीरे धीरे च्विंगम भी बंद करें। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के रीजनल मैनेजर आनंद प्रियदर्शी और आशीष ताम्रकार ने कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों को जागरूक किया। बैंक कर्मचारियों को धूम्रपान और तम्बाक चबाने से मना किया। रीजनल मैनेजर आनंद प्रियदर्शी ने डॉ. सार्थक के निर्देशों का गंभीरता से पालने किये जाने की बात कही। डॉ. सार्थक ने कहा कि नियमित रूप से साल में एक बार स्वस्थ परीक्षण जरूर कराएं। खासकर धूम्रपान करने रवाले ओरल चेकअप पर विशेष ध्यान रखें।

                   

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