छत्तीसगढ़ में तीन सीएम-TS सिंहदेव के बाद अब एक और मंत्री को CM बताने वाले होर्डिंग लगे,इस मंत्री का लगा फोटो

रायपुर।अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर आयोजित समारोह के स्वागत द्वार पर एक पोस्टर को लेकर सरगर्मी है। दोपहर को पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें सहकारिता मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह को मुख्यमंत्री लिखा गया था, इस पोस्टर में हालाँकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तस्वीर भी थी और उसके नीचे भी मुख्यमंत्री लिखा हुआ था। सोशल मीडिया पर वायरल इस तस्वीर की जब तस्दीक़ की गई तो पाया गया कि पोस्टर तो लगा हुआ है लेकिन वहाँ डॉ प्रेमसाय सिंह के नीचे सहकारिता मंत्री लिखा गया है।प्रदेश में एक सप्ताह में कांग्रेस के तीसरे मुख्यमंत्री का चेहरा सामने आया है।इससे पहले कोरोना वैक्सीनेशन के प्रमाण पत्र पर स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को मुख्यमंत्री बताया गया था।

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के दिन बैंक में आयोजित एक संगोष्ठी के लिए लगे होर्डिंग में सात नेताओं की तस्वीर है। पहली तस्वीर सीएम भूपेश बघेल की है। इस तस्वीर के नीचे नाम और मुख्यमंत्री छग शासन लिखा है। उसी के ठीक पास दूसरी तस्वीर में डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम की तस्वीर है। उसके नीचे नाम के साथ लिखा है मुख्यमंत्री छग शासन। तीसरी लेकिन थोड़ी छोटी तस्वीर छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक, रायपुर के अध्यक्ष बैजनाथ चंद्राकर की है। उसके बाद अशोक अग्रवाल, विधायक सत्यनारायण शर्मा, झुनमुन गुप्ता और रविंद्र सिंह भाटिया का है।

शनिवार को उस मार्ग से गुजरने वाले और संगोष्ठी में पहुंचे लोगों ने यह पोस्टर और दो-दो मुख्यमंत्री का नाम एक साथ देखा तो पूछताछ शुरू हुई। बैंक प्रबंधन को गलती का एहसास हुआ तो आनन-फानन में होर्डिंग पर डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम के नाम के नीचे एक चिप्पी लगाकर सहकारिता मंत्री छत्तीसगढ़ शासन लिख दिया। अधिकारियों ने मामला रफा-दफा करने में चुस्ती जरूर दिखाई, लेकिन इन दोनों घटनाओं से लगने लगा है कि अधिकारी-कर्मचारी अपने विभागीय मंत्री को मुख्यमंत्री का ओहदेदार तो मानकर ही चल रहे हैं।

पिछले सप्ताह जांजगीर-चांपा जिले के शक्ति समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर टीकाकरण करा रहे लोगों को कोविन पोर्टल से मिल रहे प्रमाण पत्र की तरह हार्डकॉपी दी जा रही थी। इसमें भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव की फोटो लगी थी। दोनों नेताओं के परिचय में मुख्यमंत्री लिखा हुआ था। मामला सामने आया तो पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया। इसे ढाई-ढाई के मुख्यमंत्री वाले फॉर्मूले के कन्फ्यूजन का परिणाम बताया जाने लगा। इसको लेकर सरकार की किरकिरी हुई। बाद में इसे के बीएमओ की लापरवाही बताकर उन्हें हटा दिया गया। सरकार ने जांच के लिए कह दिया। स्वास्थ्य मंत्री लोगों को दिए जा चुके 2500 प्रमाण पत्र वापस मंगाने को कह दिया।

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