MIC सदस्य और निगम बाबू में कहासुनी…टेन्डर को लेकर हुआ विवाद…पार्षद ने कहा करूंगा शिकायत

VIKAS BHAWANबिलासपुर— निगम कर्मचारी और एमआईसी सदस्य जनकार्य विभाग प्रमुख के बीच कहासुनी की जानकारी मिली है। सूत्रों के अनुसार जोन क्रमांक 4 का बाबू गोवर्धन ने एमआईसी सदस्य उमेश कुमार को टेन्डर ओपेन की गलत जानकारी दी। जिससे उमेश कुमार और  गोवर्धन के बीच विवाद हो गया। विवाद का मुद्दा शुक्रवार को होने वाली मंत्री के बैठक में भी उठ सकता है।सूत्रों के अनुसार जोन क्रमांक 4 के वार्ड क्रमांक 44,45,46,48 और 49 में 50 करोड़ का विकास कार्य होना है। इसके लिए निगम ने आनलाइन टेन्डर बुलाया। पांचों वार्ड में अधोसंरचना विकास मद से 50 करोड़ रूपए से काम होना है। टेन्डर जमा करने की अंतिम तारीख 1 दिसम्बर थी। शर्तों के अनुसार टेन्डर 4 दिसम्बर को ओपेन होना था। लेकिन टेन्डर समय पर नहीं हुआ। मामले को लेकर शुक्रवार शाम करीब 6 बजे उमेश कुमार और गोवर्धन के बीच वाद विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि वाद विवाद का मामला  मंत्री के सामने उठ सकता है। शुक्रवार को मंत्री अमर अग्रवाल निगम कर्मचारियों के साथ विकास कार्यों को लेकर बैठक करने वाले है।

सूत्रों के अनुसार वाद विवाद के दौरान उमेश ने गोवर्धन से कहा कि मंत्री का सख्त आदेश है कि सारे विकास कार्यों की प्रक्रिया जनवरी महीने तक पूरा किया जाए। बावजूद इसके टेन्डर खुलने की तारीख निकल जाने के 12 दिन बाद भी टेन्डर ओपन नहीं किया गया। लेट लतीफी को लेकर गोवर्धन और उमेश के बीच जमकर विवाद हुआ। मामला तू-तू,मै-मैं तक पहुंच गया। दोनों ने एक दूसरे पर अपशब्द की भी प्रयोग किया। उमेश ने कहा कि गोवर्धन की शिकायत को मंत्री से करूंगा।

वाद विवाद के बीच गोवर्धन ने बताया कि 4 दिसम्बर को टेन्डर ओपेन किया जाना था। लेकिन उपायुक्त यूजिन तिर्की का डिजीटल सिग्नेचर हैक होने से टेन्डर समय पर नहीं खोला जा सका। जोन क्रमांक चार के एक अन्य कर्मचारी ने नाम जाहिर नहीं होने की शर्त पर बताया कि यह सच है कि टेन्डर यूजीन तिर्की की आईडी से ओपेन होना था। लेकिन एक दिन पहले तिर्की का डिजीटल सिग्नेचर हैक हो गया। लेकिन टेन्डर को 4 दिसम्बर से 25 दिसम्बर के बीच ओपेन किया जा सकता था। बावजूद इसके टेन्डर ओपेन नहीं किया गया। इसकी मुख्य वजह गोवर्धन बाबू और ठेकेदारों की मिलीभगत है।जानकारी मिली है कि उमेश ने मामलो को शुक्रवार को होने वाली निकाय मंत्री के बैठक में रखने का फैसला किया है।

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