मेरा बिलासपुरहमार छ्त्तीसगढ़

उसके पास 1 ढेला भी तो नहीं था…जीवन भर बेरहम मौसम ने दिया साथ..फिर क्या हुआ..जब..रामफूल की आंखें डबडबा गयीं

दूर हुई रामफूल की चिन्ता..परिवार को मौसमी मार से मिला छुटकारा...

बिलासपुर–उसके पास एक ढेला भी नहीं था…मतलब एक रूपया भी नहीं था…। यदि रामफूल बैगा घर ना छोड़े तो..परिवार के पेट में दो जून की बात दूर..एक जून की रोटी भी नसीब नही हो। वह अपनी जिन्दगी को जैसे तैसे खींच रहा था। इस हालत में पक्का मकान बनवाने की कल्पना करना ..बहुत दूर की कौड़ी कहें तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। लेकिन इस कल्पना को राज्य सरकार ने साकार कर दिखाया….।…कल्पना को रामफूल ने धरती पर साकार होते देखा तो..जाहिर सी बात है कि इस खुशी को किसी के लिए भी समेटना नामुमकिन होता है। ऐसा ही  कोटा ब्लाक के करका निवासी रामफूल बैगा के साथ भी हुआ। रामफूल ने  खुली आंखों से देखा कि कल तक जहां टूटे फूटे दीवारों के ऊपर खपरा टंगा था।…जिसे वह घर कहता था…आज उसी स्थान पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य सरकार ने पक्का मकान तैयार कर घर का मालिक बना दिया है।
बात जनपद पंचायत कोटा ग्राम पंचायत करका निवासी रामफूल बैगा की है। रामफूल की जिन्दगी हिन्दुस्तान के अन्य गरीबों की ही तरह खेतों में मेहनत मजदूरी से बीत रही थी। जाहिर सी बात है कि ऐसी स्थिति में जैसा की कहा जाता है कि रामफूल जैसे लोगों के लिए पक्का मकान की कल्पना करना आसमान से तारे तोडना जैसा है। लेकिन कल्पना को रामफूल ने प्रधानमंत्री योजना के माध्यम से साकार होते देखा। वह भी खुली आंखों से…।
जैसा की सभी को मालूम है कि बैगा..भारत की अत्यधिक पिछड़ी जनजातियों में से एक है। अपने में मगन कमोबेश सभी बैगा जनजातियों की आर्थिक स्थिति भारत में एक जैसी ही है। ऐसे में बैगा संस्कृति की डोर से बंधे कोटा विकासखण्ड स्थित ग्राम पंचायत करका निवासी रामफूल की स्थिति अलग कैसे हो सकती है। रामफूल के पास भरा पूरा परिवार तो है..लेकिन कुछ समय पहले तक परिवार को बेरहम बारिश, गर्मी और हाड़ कंपा देने वाली ढंड से बचाने के लिए मकान के नाम पर सिर्फ  एक झोपड़ी के अलावा कुछ नहीं था।
 रामफूल हाड़ तोड़ मेहनत कर अपने परिवार को किसी तरह पाल रहा था। उसने सोचा भी नहीं था एक दिन उसकी टूटी फूटी खपरे वाली झोपड़ी की जगह पक्का मकान भी होगा। क्योंकि उसके पास तो एक ईंट खरीदने के लिए ढेला यानि एक रूपया भी नहीं था स्थानीय अधिकारी ने बताया कि पहली बार पक्का मकान देखने के बाद रामफूल की आंखे खुशी से छलछला गयी। उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि..पक्का मकान उसका ही है। बहरहाल आज रामफूल अपने परिवार के साथ पक्के मकान में ना केवल खुशहाल जिन्दगी जी रहा है।बल्कि बेरहम बारिश, गर्मी और हाड़ कंपा देने वाली ढण्ड की चिन्ता से भी आजाद हो गया है।
कोटा क्षेत्र में 10 हजार से अधिक प्रधानमंत्री आवास को हरी झण्डी
जनपद पंचायत कोटा अधिकारी ने बताया कि अभी रामफूल जैसे बहुत लोगों को आवास की जरूरत है। राज्य सरकार ने अब तक कुल 10 हजार 661 आवास स्वीकृत किया है। इनमें 9 हजार 172 आवासों का निर्माण पूरा हो गया है। योजना के तहत पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी किश्त की राशि हितग्राहियों के खातों में पहुंच गयी है। राज्य सरकार के प्रयास से 10 हजार से  अधिक हितग्राही सीधे लाभान्वित हुए हैं। इसके साथ ही सभी लोगों के आवास का सपना भी पूरा हो गया है।
                   

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