सांसदों के सवालों का नहीं मिल रहा सही जवाब

नयी दिल्ली-बहुजन समाज पार्टी के सांसद कुँवर दानिश अली रक्षा से जुड़े मामलों में सवालों के जवाब पर असंतुष्टि ज़ाहिर करते हुए कहा कि सरकार जब सांसदों को सही सूचना नहीं देना चाहती तो फिर ये सदन में प्रश्नकाल की क्या ज़रूरत है।अमरोहा से लोकसभा सांसद अली ने रक्षा मंत्री द्वारा दिए उत्तर से असंतुष्टि जताते हुए कहा है कि उनके प्रश्न का सटीक उत्तर नहीं दिया गया है। रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने अपने उत्तर में कहा है कि पिछले पंद्रह वर्षों में लागू किए जाने वाले रक्षा ऑफसेट प्रतिबद्धता एक अगस्त तक कुल 6.83 अरब रहा। कुल 15 कंपनियां अपनी रक्षा ऑफसेट प्रतिबद्धता के कार्यान्वयन करने के लिए निर्धारित पहली समय सीमा में असफल रही हैं। उन्होंने कहा कि आगे के ब्यौरे रणनीतिक एवं संवेदनशील प्रकृति के होने के कारण प्रकट नहीं किए जाने का बहाना बनाते हुए उसका विवरण नहीं दिया है। ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है सरकार हमारे प्रश्नों का उत्तर नहीं देना चाहती है, अगर सरकार सही सूचना जब सांसदों को नहीं देना चाहती तो फिर ये सदन में प्रश्नकाल की क्या ज़रूरत है?

उन्होंने कहा कि जितना पैसा इन ऑफसेट प्रतिबद्धता से देश में आयगा वो हमारी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम में जाएगा और एमएसएमई जो आज कल देश में बिलकुल खराब दौर से गुजर रही है इससे आगे बढ़ेगी और देश में रोजगार के अवसर पैदा होंगे, सरकार को इसपर गंभीरता से विचार करना चाहिए। आने वाले संसद सत्र में मैं इस पर नियम 193 के तहत अल्प कालिक चर्चा की भी मांग करूँगा।

श्री अली ने लोकसभा में रक्षा मंत्री से अतारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछा था कि क्या सरकार को जानकारी है कि पिछले पंद्रह वर्षों में बड़ी संख्या में विदेशी कंपनियों ने भारत में अपने कार्यान्वयन के लिए निर्धारित मूल समय-सीमा के भीतर अपने रक्षा ऑफसेट प्रतिबद्धता को पूरी तरह से लागू नहीं किया है; यदि हां, तो पिछले पंद्रह वर्षों में लागू किए जाने वाले रक्षा ऑफसेट प्रतिबद्धता का कुल मूल्य कितना था; उक्त अवधि के दौरान अब तक लागू किए गए कुल रक्षा ऑफसेट प्रतिबद्धता का प्रतिशत कितना है; उन सभी कंपनियों के नाम क्या हैं जो अपने रक्षा ऑफसेट प्रतिबद्धता के कार्यान्वयन के लिए निर्धारित पहली समय-सीमा से चूक गए हैं; सरकार द्वारा उन कंपनियों से अनुपालन प्राप्त करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं जो अपने रक्षा ऑफसेट प्रतिबद्धता को पूरी तरह से लागू करने की मूल समय-सीमा से चूक गई हैं; और सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं कि विदेशी कंपनियां भविष्य में अपने रक्षा ऑफसेट प्रतिबद्धता के कार्यान्वयन में चूक अथवा देरी न करें?

उन्होंने कहा कि इसके उत्तर में श्री अजय भट्ट ने कहा है कि पिछले पंद्रह वर्षों में लागू किए जाने वाले रक्षा ऑफसेट प्रतिबद्धता एक अगस्त तक कुल 6.83 बिलियन यूएस डॉलर विगत 15 वर्षों के दौरान हैं। कुल 15 कंपनियां अपनी रक्षा ऑफसेट प्रतिबद्धता के कार्यान्वयन करने के लिए निर्धारित पहली समय सीमा में असफल रही हैं। आगे के ब्यौरे रणनीतिक एवं संवेदनशील प्रकृति के होने के कारण प्रकट नहीं किया जा सकता है। ऑफसेट प्रतिबद्धताओं का पालन न करने के लिए, प्रवृत्त रक्षा ऑफसेट दिशा निर्देशों के अनुसार चूक कर्ता वेंडरों पर यथा लागू शास्ति लगाई गई है। इसके अतिरिक्त, सही मामलों में, लम्बित ऑफसेट प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए वेंडरों को सक्षम बनाने हेतु ऑफसेट प्रतिबद्धताओं को पुनः चरणबद्ध करने की अनुमति दी गई है।

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