हमार छ्त्तीसगढ़

CG NEWS : “अब काहे का पेंशन,हो गया टेंशन…….”! OPS और NPS के बीच उलझे सरकारी कर्मचारियों के बीच उठ रहे कई सवाल…

CG NEWS :सुरजपुर।  छत्तीसगढ़ में पुरानी पेंशन योजना की नई खिचड़ी पक गई है । जिसका स्वाद 2004 के बाद नियुक्त हुए कर्मचारियों अधिकारियों और संविलियन हुए डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों को बेस्वाद लग रहा है । सरकार की इस योजना ने  कर्मचारियों अधिकारियों  को सोचने पर मजबूर कर दिया हैं।कर्मचारी नेताओ की मानें तो यह योजना सिर्फ नए नियुक्त कर्मचारियों के लिए  फायदेमंद साबित हो सकती है । बाकी कर्मचारियों के लिए यह योजना एनपीएस से भी अधिक घातक साबित होने वाली है।सरकार का ओल्ड पेंशन को लेकर यह कदम आरक्षण मामले के बाद दूसरा बड़ा राजनीतिक दांव माना जा रहा था। लेकिन इसमे लाभ कम… हानि ज्यादा नज़र आ रही है। सरकार के हाल के इस निर्णय की वजह से कर्मचारियों अधिकारियों को पेंशन का टेंशन हो गया है। जिसे  पुराने कर्मचारियों के साथ-साथ संविलियन हुए कर्मचारियों  के लिए नुक़सानदेह  बताया जा रहा है।

देश में 2004 के बाद के कर्मचारियों अधिकारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बंद हो गई थी  । करीब 18 साल से कर्मचारियों अधिकारियों का न्यू पेंशन योजना के तहत 10 प्रतिशत राज्य सरकार का और 10 प्रतिशत कर्मचारियों का अंशदान कटना शुरू हो गया था ।  पिछले साल 2021-22 के बजट सत्र में पुरानी पेंशन योजना लागू करने के बाद नई पेंशन योजना में जमा होना बंद हो गया है। बीते एक साल से कर्मचारियों के वेतन के हिस्से की 12 प्रतिशत राशि राज्य सरकार के जीपीएफ खाते में ही जमा हो रही है। न्यू पेंशन में जमा की जाने वाली राशि अब एक साल से ब्रेक हो चुकी है। इधर कहा तो यह भी जा रहा है कि NPS में राशि जमा न करने पर जुर्माने जैसे कई प्रावधान भी हैं। यदि जुर्माना होता है तो वह किस पर होगा। इसका आर्थिक भार कौन उठाएगा ..!

शिक्षक नेताओं की मानें तो प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षक को हाल ही में सरकार की कैबिनेट के लिए गए निर्णय से सीधे-सीधे नुकसान पहुंच रहा है। शिक्षक 1998 से सेवा दे रहे हैं उसके बाद सन 2005 से 2008 के बीच में सबसे अधिक शिक्षकों की भर्ती हुई है।जो प्रक्रिया चलती रही। शिक्षकों की तत्कालीन सरकार से एक आंदोलन के संघर्ष के बाद 2012 से शिक्षकों का एनपीएस कटना शुरू हुआ। 2018 में आठ साल की सेवा पूरी कर चुके शिक्षको का संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में किया गया। 2018 में ही संविलियन
करीब एक लाख नौ हजार के करीब शिक्षक संविलियन की सौगात पा चुके थे। ठीक ऐसे ही 2019 में बहुत से शिक्षकों का आठ साल की सेवा पूरी होने पर संविलियन हुआ। फिर वर्तमान सरकार की नीति के तहत 2021 में दो वर्ष सेवा पूर्ण कर चुके करीब 16 हजार शिक्षको का संविलियन हुआ। जो क्रम चलता रहा। ऐसे में सरकार की ओल्ड पेंशन पर बनाई गई नई नीति का लाभ 1998 के बाद  से सेवा दे रहे शिक्षक कैसे उठा सकते हैं।

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अभी तक यह भ्रम था कि सरकार पुरानी पेंशन योजना के तहत शिक्षकों को 2012 से (जब से एनपीएस के तहत कटौती शुरू हुई है तब से ) पुरानी पेंशन योजना के लिए नियुक्ति तिथि मान सकती थी और पेंशन के दायरे को यहीं से कवर कर सकती थी  । लेकिन बताया जा रहा कि पुरानी पेंशन योजना अप्रैल 22 से ही मानी जाएगी।जिसकी वजह से कर्मचारी अपनी बची ख़ुची सेवा की गणना करें तो कर्मचारियों के हाथ में आंशिक पेंशन ही बचती है।

कहा यह भी जा रहा है कि विकल्प के तौर पर नई पेंशन योजना में बने रहना ही फायदे का सौदा होगा।केंद्र और राज्य के मतभेद के बीच राज्य सरकार की इस पेंशन नीति की वजह से कर्मचारी वर्ग फंस गया है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि जब केंद्र सरकार कर्मचारियों का बाजार में लगा पैसा वापस नही कर रही थी तो एक साल के लंबे अंतराल बीत जाने के बाद राज्य सरकार केंद्र और राज्य के बीच उठ रहे विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट क्यो नही गई ..। पेंशन नीति प्रकरण अभी भी गोल मोल है।कई कर्मचारी नेताओ को भी केबिनेट के निर्णय में कोई खामी नजर नही आई है। 2005 के नियमित भर्ती हुए कर्मी खुद को 2005 से ही ओपीएस में मान रहे है । जबकि इनका NPS 2005 से ही कटना शुरू हो गया है जो अभी केंद्र के पाले में है। कई सवालों के जवाब अब भी छुपे है।उलझे हुए है । जिसे आम कर्मचारी इस लिए तलाश रहा है। क्योकि उसका बुढ़ापा सुरक्षित है यह पता चल सके ..!

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कहा जा रहा है कि सरकार ने बजट सत्र 2022-23 में जब OPS ओल्ड पेंशन योजना की घोषणा की तब कर्मचारियों ने खुले मन से इस घोषणा का स्वागत किया था । जगह जगह मुख्यमंत्री का स्वागत कर इस ऐतिहासिक घोषणा के लिए आभार व्यक्त किया गया था।”अब काहे का टेंशन, मिल गया पेंशन” का नारा कर्मचियों ने जोर शोर से लगाया था । लेकिन अब सरकार के इस फैसले के बाद यह नारा उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है “अब काहे का पेंशन,हो गया टेंशन”।
इन सबके बीच कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या सरकार ने वास्तव में कर्मचारी हित के लिए ओल्ड पेंशन योजना लागू की थी या NPS में सरकार के अंशदान के पैसों को लेने के लिए….?  यदि कर्मचारी हित के लिए OPS का निर्णय लिया गया होता तो केंद्र से सरकार के अंशदान के पैसे नही मिलने पर भी कर्मचारियों का कोई नुकसान नहीं होने दिया जाता।

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