एनटीपीसी की तानाशाही..सात महीने के बाद भी नहीं दिया गया मुआवजा..किसानों में आक्रोश

BHASKAR MISHRA
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बिलासपुर—-एनटीपीसी डेम के दलदल प्रभावित 453 किसानों को आज भी मुआवजा का इंतजार है। परेशान किसान महीनों से दफ्तरों का चक्कर काटने को मजबूर हैं। बताते चलें कि प्रभावित किसानों के बीच 2 करोड़ 13 लाख की मुआवजा राशि वितरित किया जाना है।
 
          एनटीपीसी राखड़ डेम के दलदल प्रभावित किसान मुआवजे की मांग को लेकर पिछले 7 महीनों से एनटीपीसी अधिकारियों का परिक्रमा काटने को मजबूर है। किसानों का उनकी ही राशि नहीं दी जा रही है। और अधिकारी हैं कि अपनी तानाशाही प्रवृत्ति से बाज नहीं आ रहे हैं। नतीजन आज तक किसानों को फसल मुआवजा राशि नहीं दी गयी है। 
 
             एक बार फिर सभी प्रवावित किसान तीन सूत्रीय मांगों को लेकर एसडीएम के नाम सीपत तहसीलदार को पत्र सौंपा है। हर बार की तरह अधिकारियों ने एक बार फिर आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह में सभी  किसानों में फसल क्षति राशि वितरित कर दिया जाएगा।
 
                 जानकारी देते चलें कि सीपत स्थित एनटीपीसी राखड़ डेम के पानी के रिसाव से ग्राम  कौड़िया,हरदाडीह, नवागांव,रलिया,एरमसाही,भिलाई, गतौरा और रांक के दलदल प्रभावित किसानों का फसल बरबाद हो गयी। इसके बाद किसानों को आश्वासन दिया गया कि सभी को फसल का मुआवजा दिया जाएगा। इसके बाद किसानों ने कई बार मुआवजा को लेकर कार्यालयों का चक्कर काटा। लेकिन हमेशा की तरह एनटीपीसी प्रबंधन आश्वासन का घुनघुना थमाता रहा।
 
             हर बार की तरह एक बार फिर सभई किसान उम्मीद के साथ  बड़ी संख्या में सोमवार को एसडीएम मस्तूरी के नाम का ज्ञापन सीपत उप तहसील पहुंचे। इस दौरान एनटीपीसी के अधिकारी किसानों के साथ प्रशासन की मौजूदगी में तर्पॉलिन ग्रुप के भू-विस्थापित दैनिक वेतन भोगी मजदूरो की बैठक में शामिल थे।
 
               राखड़ डैम से प्रभावित किसानों की मांगो पर बैठक में उपस्थित नायब तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल ने एनटीपीसी अधिकारियों को तत्काल मुआवजा राशि देने की मांग को रखा।  नायब तहसीलदार की मांग पर एनटीपीसी के अधिकारियों ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर ही किसानों में मुआवजा वितरित कर दिया जाएगा। 
 
राखड़ डेम रिसाव से प्रभावित 8 गांव के 453 किसानों को नुकानस 
 
      एनटीपीसी राखड़ डेम के पानी रिसाव से 8 गांव के 453 किसानो की 4 सौ 27 एकड़ भूमि दलदल प्रभावित है। साल  2020 में खरीफ फसल का मुआवजा राशि 2 करोड़ 13 लाख दिसम्बर में एनटीपीसी को देना था। 7 माह बीत जाने के बाद भी किसानों को अब तक नही दिया गया है। जिसके चलते किसानों में भयंकर आक्रोश है। 
 
आंदोलन के बाद 2009 से मिल रही है मुआवजा राशि
 
       राखड़ डेम से प्रभावित ग्राम के किसान दलदल की वजह से 2007 से अपने खेतों पर फसल नही उगा पा रहे है।  2009 में किसानों ने फसल मुआवजा की मांग को लेकर एनटीपीसी के खिलाफ आंदोलन किया था। किसानों की मांगों के आगे प्रबंधन को झुकना पड़ा । प्रशासन की पहल पर एनटीपीसी अधिकारी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम का गठन हुआ। संयुक्त टीम ने दलदल प्रभावित खेतो का निरीक्षण किया। मुआवजा राशि राज्य सरकार के अनुसार प्रति एकड़ 20 क्विंटल तय किया गया। तब से प्रत्येक वर्ष सर्वे के बाद किसानों को एनटीपीसी से मुआवजा राशि मिलने लगी।
 
खेतों पर तख्ती लेकर खड़ा होना पड़ता है
 
          दलदल प्रभावित किसानों के फसल सर्वे हर वर्ष एनटीपीसी से नियुक्त अधिकारी और राजस्व विभाग के आरआई, पटवारी की टीम करती है। पिछले वर्ष से एनटीपीसी ने प्रभावित किसानों को सर्वे के दौरान खेतो पर उनके नाम की तख्ती लेकर खड़ा होना पड़ रहा है। फोटो खींची जा रही है। रिपोर्ट में किसानों की तख्ती के साथ फोटो प्रस्तुत की जा रही है। इसलिए ज्यादा समय लग रहा है। यही कारण है कि उचित समय पर किसानों को उनके मुआवजा की राशि नही मिल पाई है।
 
 मुआवजा राशि के लिए डिमांड लेटर भेजा गया 
 
सीपत नायब तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल ने बताया कि मुआवाजा को लेकर लेटर भेजा गया है।एनटीपीसी के अधिकारियों को सोमवार तक 2020-2021 के फसल मुआवजा राशि देने को कहा है।

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