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OPS: पेंशन महाकुंभ में हजारों कर्मचारियों ने बुलंद की आवाज, निकाली विशाल रैली

OPS- सामाजिक न्याय परिसर उज्जैन में वरिष्ठता /पेंशन महाकुंभ रविवार को सम्पन्न हुआ। इस दौरान एक विशाल आम सभा आयोजित कर आक्रोश व्यक्त किया सभा के पश्चात रैली निकालकर देश के प्रधानमंत्री एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

इस कुंभ में प्रदेश के कोने कोने से लगभग एन पी एस प्राप्त हजारों शिक्षक अधिकारी कर्मचारी के अलावा पेंशन की लंबी लड़ाई लड़ रहे NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु व राष्ट्रीय महासचिव श्री प्रजन्न , रेलवे के यूनियन नेता कामरेड अमरीक सिंह व राजेन्द्र पाल , मध्यप्रदेश के NMOPS के प्रांतीय अध्यक्ष परमानन्द डहेरिया शामिल हुए।महाकाल की नगरी में रविवार को सड़को पर पेंशन विहीनों के भारी हूजूम से भरी रही और सभी पेंशन विहीनों का रास्ता पेंशन महाकुंभ के मंच पर गया। जिसने यह संदेश दिया कि मध्यप्रदेश में वरिष्ठता दिनांक से पेंशन कितनी जरूरी है।

जानकारी देते हुए मध्य प्रदेश के NMOPS के प्रांतीय मीडिया प्रभारी हीरा नंद नरवरिया ने बताया कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने कर्मचारी हित में संज्ञान लेकर अविलंब पुरानी पेंशन बहाल करना चाहिए।लेकिन इस दिशा में सरकारो की चुप्पी कर्मचारी विरोधी लगती है। इसी के चलते हमे सड़क की लड़ाई लड़नी पड़ रही है ।

NMOPS मध्यप्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष परमानन्द डहेरिया की अध्यक्षता में अब तक तीन पेंशन महाकुंभ खरगोन, जबलपुर, मैहर के बाद रविवार को चौथे और सबसे ऐतिहासिक पेंशन महाकुंभ महाकाल की नगरी में मनाया गया। जिसमे वरिष्ठता दिनांक से पुरानी पैंशन की मांग सरकार से दुहराई गई है।

नरवरिया ने बताया कि मध्यप्रदेश में 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारी नेशनल पेंशन स्कीम के दायरे में आता है जिनको सेवानिवृत्ति के बाद बहुत कम राशि पेंशन के नाम पर प्राप्त हो रही है जिसको लेकर प्रदेश का कर्मचारी आक्रोशित हैं और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के नियमों के अनुसार पेंशन बहाली के लिए लामबंद हो चुका है। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर नेशनल मुवमेंट फाॅर ओल्ड पेंशन स्कीम (एन एम ओ पी एस इंडिया) संघर्षरत है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु और मध्यप्रदेश केप्रांताध्यक्ष परमानन्द डेहरिया ने प्रदेश में कार्यरत समस्त राज्य शासन और केन्द्रीय कर्मचारियों से कह कि वरिष्ठता पेंशन महाकुंभ उज्जैन सार यह है कि हमारे बुढ़ापे की लाठी पुरानी पेंशन बिना संघर्ष के नही मिलनी वाली है।

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कर्मचारी एकता का परिचय देंना होगा।इसलिए वरिष्ठता पेंशन महाकुंभ जैसे आयोजन किये जा रहे है। राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कर्मचारियों से आव्हान करते हुए कहा है कि नेशनल पेंशन स्कीम के दायरे में कर्मचारियों को शामिल करते समय झुठे सपने दिखाए गये थे। जब कर्मचारी बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त हो रहा है तो हकीकत सामने आ रही है।

कर्मचारियों को दिखाए गये सपने चकनाचूर हो ग्रे है। सेवानिवृत्त पश्चात पेंशन के नाम पर अत्यधिक कम राशि 500, 800, 1500 प्राप्त हो रही है। जिसमें सेवानिवृत्त कर्मचारी का जीवन यापन संभव नहीं। यह पेंशन राशि बुढ़ापे का अपमान करती प्रतीत हो रही है। नेशनल पेंशन स्कीम के अंतर्गत मिलने वाली राशि अनेक अवसरों पर वृद्धावस्था पेंशन से भी कम मिल रही है।

जबकि सर्वविदित है कि सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी कर्मचारी की शारीरिक क्षमता कम हो जाती हैं। वह उपार्जन की स्थिति में नहीं रहता और वृद्धावस्था सम्बन्धि अनेक बिमारियों का शिकार हो जाता है तथा उसे वृद्धावस्था में अनेक पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन भी करना होता है जिसके लिए पर्याप्त धनराशि की जरूरत होती है।

लेकिन नेशनल पेंशन स्कीम में पेंशन राशि बहुत कम मिलने से वह सफलता और सम्मान पूर्वक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर पाता है और अपमान जनक जीवन जीने के लिए बाध्य हो रहा है। अतः केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने कर्मचारी हित में संज्ञान लेकर अविलंब पुरानी पेंशन बहाल करना चाहिए।

हीरा नंद ने बताया कि कर्मचारी और शासन का अंश मिलाकर 24% राशि प्रतिमाह शेयर बाजार के हवाले की जा रही है जो उतार चढ़ाव के अधीन है। कर्मचारियों के मेहनत का पैसा शेयर बाजार के माध्यम से उद्योगपतियों की झोली में व्यवसाय के लिये डाला जा रहा है जो घोर आपत्ति जनक है। जिसके बदले कर्मचारियों को सेवानिवृत्त के उपरांत सम्मान जनक जीवन जीने लायक राशि प्राप्त नहीं हो रही है।

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30-40 साल तक शासन की सेवा करने वाले कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का ध्यान रखना राज्य शासन और केन्द्र शासन की नैतिक जिम्मेदारी है लेकिन सरकारें सामाजिक जिम्मेदारियों से भाग रही है और कर्मचारियों का सेवानिवृत्त जीवन नारकीय बना रही है। अतः केन्द्र शासन और राज्य सरकारों को चाहिए कि वे पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार पुरानी पेंशन बहाल करे।

नेशनल पेंशन स्कीम के नाम पर कर्मचारियों शोषण को अविलंब बंद किया जाए। प्रांताध्यक्ष परमानन्द डेहरिया ने मध्यप्रदेश शासन से मांग की है कि कर्मचारियों को प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना कर पुरानी पेंशन बहाल की जाए। प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि का लाभ क्रमोन्नति पदोन्नति और ग्रेच्युटी में भी दिया जाए। नेशनल पेंशन स्कीम में अब तक जमा राशि को राज्यों सरकारों को वापस कर इस राशि से कर्मचारियों के जीपीएफ फंड का निर्माण किया जाए।

यह जानकारी देते हुए राज्य मीडिया प्रभारी एच एन नरवरिया और वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष शेख मोहम्मद हनीफ ने बताया कि नई पेंशन स्कीम के विरोध में 20,000 से अधिक कर्मचारियों ने आज सामाजिक न्याय परिसर में राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु एवं प्रदेश अध्यक्ष परमानंद डेहरिया रेलवे यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरिक सिंह राष्ट्रीय महासचिव स्थित प्रजन्ना एवं चिकित्सक यूनियन के डॉक्टर राकेश मालवीय चिकित्सा अधिकारी इस संगठन के डॉ सुनील अग्रवाल, वैकल्पिक चिकित्सक के डॉक्टर अकील खान, गुरुजी, पंचायत, सचिव ,पटवारी, लिपिक संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष सहित मध्य प्रदेश के 25 से अधिक कर्मचारी संगठनों के प्रदेश अध्यक्षों की उपस्थिति में प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता एवं पुरानी पेंशन की मांग को लेकर भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश सरकार के प्रति आक्रोश व्यक्त करते हुए अपनी मांगों की आवाज को बुलंद किया सभी अतिथियों ने संबोधित करते हुए पुरानी पेंशन के समर्थन में जोरदार नारे लगाकर वोट फॉर ओ पी एस का आह्वान किया गया।

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