परमहंस स्वामी शारदानन्द ने भक्तों को यादों के सहारे छोड़ा..भगवान ने श्रीचरणों में बुलाया..आज होगा अंतिम संस्कार…गुरूदेव ने ही दिया सामुहिक विवाह का मंत्र

बिलासपुर–पवित्र ग्रंथों और जनमानस से हमेशा पढ़ने और सुनने को मिला…गुरू ही ब्रम्हा है..गुरू ही विष्णु है..गुरू ही महेश हैं..गुरू साक्षात पारब्रम्ह परमेश्वर हैं..ऐसे गुरूदेव को साक्षात प्रणाम है। आज श्लोक का सारा मर्म समझ में आने लागा है। ..जब परमहंस स्वामी शारदानंद सरस्वती जी हमारे बीच में साक्षात नहीं है। सीजीवाल परिवार गुरूदेव को नमन् करता है। श्री चरणों में प्रणाम के साथ विश्वास भी करता है कि 7 नवम्बर को सुबह जब उनके भक्त साक्षात गूरुदेव की कमी महसूस करते होंगे। ठीक उसी समय भगवान गूरूदेव पारब्रम्ह परमेश्वर के श्रीचरणों में अतिरूद्र यज्ञ का पाठ करते होंगे। दुनिया में अपनी यादों के सहारे छोड़ गए भक्तों के लिए याचना करते होंगे। कहते होंगे प्रभु जगत का कल्याण हो, मानवता प्रसार हो…नारियों का सम्मान हो..पाप का नाश और ज्ञान का प्रचार हो।
 
               बिलासपुर में  6 नवम्बर की देर रात्रि भक्तों को पता चला कि परमहंस स्वामी शारदानंद सरस्वती शाम चार बजे नश्वर दुनिया को छोड़कर हमेशा के लिए परमरधाम चले गए हैं। सखबर सुनते ही लोगों को सांप सूघ गया। लोगों को अपने आप पर विश्वास ही नहीरं हुआ। लेकिन खबर सच हुई। भक्तों को जानकारी मिली कि गुरुदेव की प्रयागराज में अचानक स्वास्थ्य खराब हो गया। आनन फानन में उन्हें रविवार को मेंदाता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इसी दौरीन गुरूदेव ने नश्वर दुनिया को हमेशा के लिए छोड़ दिया। भक्तों के बीच में अपने शरीर को छोड़कर हमेशा के परमधाम को चले गए।
 
                  भगवान गुरूदेव के पार्थिव शरीर को उत्तरप्रदेश के मैनपुरी लाया गया है। भक्तों ने बताया कि मैनपुरी स्थित आश्रम में भगवान गुरूदेव के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार शाम चार बजे किया जाएगा। प्रदेश के कई सरकार को सामुहिक विवाद के लिए प्रेरित करने वाले परमहंस स्वामी शारदानन्द सरस्तवती का पूरा जीवन दुखियों,गरीबों,और जनहित को समर्पित रहा। अपने गुरूदेव के आदेश पर तामउम्र अध्यक्ष रहते हुए दैवी सम्पद मंडल की शाखाओं को देश दुनिया में पल्लवित और पुष्पित किया। केंदई स्थित स्वामी भजनानंद आश्रम में प्रति वर्ष आदिवासी और गरीब जोड़ों का विवाह की शुरुआत परमहंस गुरू भगवान ने ही किया। उत्तर प्रदेश हो या मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ या झारखण्ड सामुहिक विवाद की बुनियाद परमहंस स्वामी जी ने ही रखा। 
 
                   त्याग की मूर्ति गूरूदेव ने अपना पूरा जीवन जनहित और विश्वकल्याण के लिए कई बड़े यज्ञों का आयोजन किया। सादगी से ओतप्रोत गुरूदेव के भक्तों की फेहरिस्त बहुत लम्बी है। उनके शिष्य उद्योगपति घराने से लेकर, सरकारी कामकाजी के साथ पत्रकार जगह से भी हैं। स्वामी जी के निधन की खबर से बिलासपुर समेत छत्तीसगढ़ के के कई इलाकों में शोक की लहर है। उद्योग, व्यापार,राजनीति, चिकित्सा, मीडिया समेत कई क्षेत्रों से जुड़े गुरूदेव के शिष्य और अनुयायी सोक में डूबे हैं। 

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