पुलिस स्मृति दिवस..भावुक राज्यपाल ,सीएम, गृहमंत्री ने किया..नमन्.. कहा ..जवानों से..दिन की चैन..रात की नींद

राय़पुर—पुलिस जवान प्राण की बाजी लगाकर चुनौती का बहादुरी के साथ  सामना करते हैं। पुलिस स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में यह बातें राज्यपाल अनुसुइयां उइके ने कहीं। राज्यपाल ने कहा कि देश सेवा के लिए पुलिस जवानों ने विपरीत परिस्थियों में भी चुनौतियों को स्वीकार किा है। आज का दिन वीर जवानों की शौर्य गाथाओं की याद दिलाता है।  इस दौरान राज्य के मुखिया भूपेश बघेल सर्वाेच्च बलिदान दिवस पर जवानों पर गर्व जाहिर किया। और बहादुर जवानों की शहादत पर काफी भावुक नजर आए। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने पुलिस जवानों के सूझबूझ को दिल से याद किया। 
 
 
 जवानों ने आदर्श श्लोक को किया सार्थक–उइके
 
                   पुलिस जवानों ने जान की बाजी लगाकर हर चुनौतियों का सामना बहादुरी से किया है। रायपुर में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस के कार्यक्रम संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज का दिन उन वीर जवानों की शौर्य गाथाओं की याद दिलाता है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया। वीर सपूतों को नमन करती हूं। चौथी वाहिनी सी.ए.एफ. माना रायपुर के प्रांगण में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में राज्यपाल अनुसुइया उइके ने कहा कि पुलिस का सूत्र वाक्य परित्राणाय साधुनाम है। गीता के इस वाक्य को पुलिस के वीर जवानों ने सार्थक सिद्ध किया है। ऐसे वीर सपूतों को जन्म देने वाले माता-पिता और परिजनों को मैं प्रणाम करती हूं। इस अवसर पर राज्यपाल सुश्री उइके, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने पुलिस के शहीद जवानों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। परिजनों से भी मुलाकात कर ढांढस बंधाया।
 
          अपने संबोधन में राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि अपने घरों में हम चैन की नींद लेते हैं। इसा श्रेय हमारे बहादुर पुलिस जवानों को जाता है। मैंने कोविड काल में देखा है कि कोरोना वायरस के खौफ के वातावरण में हमारे पुलिस के जवान मोर्चे पर तैनात नजर आए। कुछ जवान कोरोना संक्रमित भी हुए। लेकिन उनका हौसला हिमालय से ऊंचा नजर आया।
 
व्यापक समाज का कर्तव्य–बघेल
 
                        अपने संबोधन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पुलिस या विभिन्न सुरक्षा बलों में तैनात जवान स्वयं की जान की परवाह किए बिना जनता और देश की हिफाजत के लिए समर्पित होते हैं। उनके जज्बे से ही समाज में उनका सम्मान सुनिश्चित होता है। उनका कार्य रोजगार के अन्य अवसरों से भिन्न और प्रतिष्ठित होता है। पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मैं सभी सुरक्षा बलों में तैनात जवानों के प्रति अपनी सहभागिता, शहीदों के प्रति कृतज्ञता और उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं।  उन्होने कहा जहां देश सेवा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने के सर्वोच्च बलिदान पर गौरवान्वित होने का है। वहीं बहादुर साथियों से बिछुड़ने की याद में भावुक होने का भी है। जवानों के योगदान के प्रति आदर भाव रखना, व्यक्त करना और शहीद परिवारों की देख-रेख सिर्फ शासन का ही नहीं…बल्कि व्यापक समाज का कर्त्तव्य है।
 
सरकार जवानों के साथ खड़ी–साहू
 
                                   गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने अमर-शहीदों को श्रद्धा-सुमन अर्पित किया। बहादुर शहीद जवानों के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट किया। साहू ने कहा.. भरोसा दिलाता हूं कि छत्तीसगढ़ सरकार सदैव आपके साथ खड़ी है। लद्दाख में चीनी फौज के साथ 21 अक्टूबर 1959 को हुई मुठभेड़ का अध्याय सुरक्षा बलों के शौर्य और पराक्रम के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। मुठभेड़ में सुरक्षा बलों के वीर जवानों की शहादत की याद में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य के वनांचल जिले नक्सल प्रभावित हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हमारे जवान 24 घंटे जनता की सुरक्षा में अत्यंत सूझबूझ और साहस के साथ नक्सलियों का सामना करते है। परिणाम स्वरूप नक्सली घटनाओं में कमी आई है। 
 
व्यर्थ नहीं जाएगा  बलिदान–अवस्थी
 
                पुलिस महानिदेशक  डी.एम. अवस्थी ने कहा कि नक्सलवाद देश के अनेक भागों में फैला हुआ है। छत्तीसगढ़ राज्य का बहुत बड़ा भाग प्रभावित है। माओवादी, मानवता और प्रजातांत्रिक मूल्यों के विरूद्ध सक्रिय है। छत्तीसगढ़ पुलिस नक्सल समस्या के उन्मूलन हेतु कृत संकल्पित है। हमारे जवान हमेश विकट परिस्थितियों में रहकर इस चुनौती का निडरता, अद्म्य साहस और धैर्य के साथ सामना कर रहे हैंं।  निर्णायक लड़ाई में विगत एक वर्ष में छत्तीसगढ़ पुलिस के 25 जवानों ने वीरगति प्राप्त की है। हमें पूरा विश्वास है कि वीर जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

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