साल 1978 में पहली बार हुआ प्रसारण..देश दुनिया को भी रहता है इस एलका इंतजार..युवा नेता ने कहा..हमें छत्तीसगढ़िया संस्कृति कला पर अभिमान

बिलासपुर— बिलासपुर जिले का राउत महोत्सव कार्यक्रम का ना केवल प्रदेश बल्कि देश की जनता को भी बेसब्री से इंतजार रहता है। राउतनाच कार्यक्रम के जरिए हमें अपने अतीत को जानने और समझने का मौका मिलता है। हमें अपनी संस्कृति और कला से भी परिचित होने का अवसर मिलता है। निश्चित रूप से राउत महोत्सव के माध्यम से साझी श्रमसाध्य परम्परा को संरक्षण और संरक्षण में डॉ. कालीचरण यादव का अहम् योगदान है। यह बातें मस्तूरी में आयोजित राउत महोत्सव कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि की आसंदी से युवा कांग्रेस नेता जयंत मनहर  ने कही। मनहर ने बताया कि राउत महोत्सव और संरक्षक डॉ.कालीचरण यादव का उनके परिवार का घनिष्ठ नाता है। डॉ.यादव ने राउत नाचा कार्यक्रम के माध्यम से ना केवल संस्कृति और परम्परा को संरक्षित किया है बल्कि नई पीढी को अतीत की  गौरवशाली परम्पराओं से परिचित कराने का भी काम किया है।
 
               मस्तूरी में मड़ई महोत्सव का आयोजन किया गया। क्षेत्र की राउत टोलियों ने अपने हुनर के साथ ही भारतीय लोककला संस्कृति का प्रदर्शन किया। इस दौरान डॉ.कालीचरण यादव समेत कांग्रेस के युवा नेता और क्षेत्र के गणमान्य लोग विशेष रूप से उपस्थित थे।
 
                       अपने संबोधन में युवा नेता जयंत मनहर ने कहा कि सांस्कृतिक दृष्टि से मस्तूरी क्षेत्र  कला और लोक संस्कृति से परिपूर्ण है। यहां श्रम की साधना होती है। श्रमसाधना से ही लोक संस्कृति का जन्म होता है। जाहिर सी बात है कि श्रमसाध्य होने के कारण यहा के लोगों में मनोरंजन का माध्यम भी श्रम से जुड़ा है।
 
                मनहर ने बताया कि लोक कलाओं में लोगों की सरलता सादगी, भोलापन, आत्मीयता झलकती है। लोककलाओं में राउतनाच, एक ऐसा ही कला-रूप है। राउत नाच कार्यक्रम से छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की अल्हादित करने वाली खुशबू आती है। यही कारण है कि आज तेज भागती दुनिया में जब लोगों को अपनों के लिए ही समय हो….ऐसे में राउत नाच कार्यक्रम का बेसब्री से इंतजार होना किसी आश्चर्य की कम नहीं है। दरअसल राउत नाच कार्यक्रम जीवन में उमंग और उल्लास की अमृत घोलने जैसा है। इसमें लोक जीवन की ऊर्जा, उष्मा और गति शामिल है। इसमें जीवन का लय, तेज, ओज और  सामूहिक प्रयास शामिल है। सच कहा जाए तो राउत नाच में  मानव जीवन का संपूर्ण सार समाहित है।
 
                     राउत नाच के माध्यम से हमें अपने अतीत को समझने का मौका मिलता है।जीवन के अनछुए पहलुओं को देखने जानने का मौका मिलता है। कालीचरण यादव के प्रयास से हमें अपनी कला संस्कृति से जुड़ने का लगातार अवसर मिला है। अपनी साझी परम्परा और महापुरूषों के प्रयासों को आगे बढ़ाना ही अब हमारा लक्ष्य और धर्म है।
 
                  मनहर ने बताया कि इस बात पर गर्व है कि राउत महोत्सव से उनका और उनके परिवार का दशकों पुराना नाता है। पिता सांसद भगत राम मनहर ने राउत नाच कार्यक्रम को हमेशा प्रोत्साहित किया। साल 1978 में पिताजी के प्रयास से राउत कार्यक्रम का दूरदर्शन से पहली बार प्रसारण हुआ। देश दुनिया ने इसी समय राउत के महत्व को ना  केवल समझा बल्कि उनमें कार्यक्रम के प्रति जिज्ञासा भी पैदा किया है।
 
                           युवा नेता ने बताया कि उन्हें इस बात पर भी गर्व है कि चार पीढियों ने राजनीति के मंच से समाजसेवा का कार्य किया। आज भी उनके घर में जनता जनार्दन के हितों को लेकर लगातार प्रयास किया जाता है। धर्म कला संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन पर काम भी किया जा रहा है। इसी क्रम में राउत नाच को प्रोत्साहित करने प्रत्येक साल विजेता टीम को सांसद भगतराम मनहर की याद में दस हजार रूपये बतौर स्कॉलर दिया जाता है। मनहर ने कहा कि उनका और उनके परिवार का मूल उद्देश्य समाज और देश में खुशहाल वातावरण तैयार  करना है।
 
        मनहर ने दुहराया कि जब भी लोगों को महसूस होगा कि उन्हें भगतरराम मनहर परिवार की जरूरत है। आम जनता हमें और हमारे परिवार को अपने बीच पाएगी। क्योंकि हमारा परिवार सर्वधर्म समाज के समग्र विकास के बिना अधूरा महसूस करता है।
 

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