हमार छ्त्तीसगढ़

संजू की हत्या के पहले…. और बाद में क्या–क्या हुआ…? कैसे रची गई साजिश–कैसे पहुंची पुलिस..? पढ़िए पल-पल की पूरी कहानी – पुलिस की ज़ुबानी

बिलासपुर।तारीख़ थी… 14 दिसंबर, शाम का समय था … और घड़ी मे करीब चार बज रहे थे…। बिलासपुर – मुंगेली रोड के किनारे एक कार में सवार लोगों की आँखे चमक उठी… जब उन्होने सामने की ओर से आ रही सफेद रंग की गाड़ी में लिख़ा हुआ देखा… महामंत्री कांग्रेस बिलासपुर…। कार में सवार लोगों में से एक ने अपने मोबाइल से वाट्सएप कॉल लगाया … और किसी को ख़ब़र कर दी कि संजू त्रिपाठी आ रहा है….। ख़बर देने के बाद यह कार कुछ दूर तखतपुर की तरफ़ गई… और फ़िर यूटर्न लेकर बिलासपुर की ओर दौड़ने लगी…..।

सक़री पहुंचने से पहले ही उन्हे सामने की ओर से आती हुई एक नीली रंग की कार नज़र आ गई … और यह पता चल गया कि संजू त्रिपाठी को गोली मार दी गई है…। इसके साथ ख़बरिया वेबसाइट्, की ख़बरें भी सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों तक पहुंच गईं औऱ यह गोलीकांड चर्चित हो गया …। लेकिन चार दिन के अंदर पुलिस ने मामले का ख़ुलासा कर दिया है कि यह वारदात कैसे हुई और पुलिस आरोपियों तक कैसे पहुंची…. ?

चर्चित संजू त्रिपाठी हत्या कांड़ का ख़ुलासा होने के साथ ही साफ़ हो गया है कि संपत्ति विवाद के कारण उसके ही पिता और सगे छोटे भाई सहित कई रिश्तेदारों ने मिलकर हत्या की साज़िश रची थी । यूपी से बुलाए गए 5 शूटरों ने वारदात को अँज़ाम दिया और पूरी प्लानिंग के साथ भाग गए थे । पुलिस टीम ने उन्हे गिरफ़्तार करने में कामयाब़ी हासिल की है। मामले में ग्यारह लोग पकड़े गए हैं। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस को करीब दो लाख मोबाइल नंबर खंगालने पड़े और एक हज़ार से अधिक सीसीटीवी फ़ुटेज़ की छानबीन करनी पड़ी। आरोपियों को पकड़ने के साथ ही पुलिस ने पूरी कहानी सामने रख दी है। जिसमें कई तथ्य सामने आए हैं। पुलिस की ओर से दी गई सिलसिलेवार जानकारी से यह समझ़ा जा सकता है कि इस मामले में पकड़े गए 11 लोगों को किस आधार पर गिरफ़्ताऱ किया गया है….. हत्या की साजिश कैसे रची गई – वारदात को कैसे अँज़ाम दिया गया …. और पुलिस आरोपियों तक कैसे पहुंची… ?

पिता और भाई ने ऐसे रची साज़िश …
बिलासपुर एसपी पारुल माथुर ने बताया कि 73 साल का जय नारायण त्रिपाठी संजू का पिता है। पैतृक संपत्ति विवाद के कारण अपने छोटे बेटे कपिल त्रिपाठी के साथ मिलकर मोबाइल फोन के जरिए उसने हत्या की साजिश रची। घटना के बाद वह लगातार गुमराह कर मुख्य आरोपी कपिल त्रिपाठी को बचाने की कोशिश करता रहा। उसके भिलाई स्थित घर से एक नग पिस्तौल बरामद किया गया है। जिसमें दो राउंड जिंदा मैगजीन भी लगा हुआ है। संजू त्रिपाठी का छोटा भाई कपिल त्रिपाठी 38 साल का है। यह घटना का मास्टरमाइंड है।

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संपत्ति विवाद के कारण इसने संज़ू त्रिपाठी की हत्या की साजिश रची। पैतृक संपत्ति के कारण पहले इसके साथ कुदुदंड के मकान में संजू त्रिपाठी ने मारपीट की थी । इसके द्वारा स्थानीय और बाहर के शूटरों को बुलाकर घटना को अंजाम दिया गया है। योजना के तहत घटना के बाद छिपने के लिए जम्मू कश्मीर, नेपाल, दिल्ली की रैक़ी पहले से की जा चुकी थी। घटना में हो रहे खर्च और हथियार खरीदी में खर्च हुए रकम की व्यवस्था भी कपिल त्रिपाठी ने की थी। इसके पहले भी शूटरों को बुलाकर वह हत्या की योजना बना चुका था । लेकिन कामयाब नहीं हो सका था। इस बार उसने शूटरों को अपने घर के पीछे स्थित खुद के मकान में रुकने की व्यवस्था की। इसने ही अपराध में शामिल दूसरे आरोपियों को भरोसा दिलाया कि वह खुद बाहर रहकर उनकी मदद करेगा। योजना थी कि भरत तिवारी, आशीष तिवारी, रवि तिवारी हथियार के साथ गिरफ्तार होंगे । उक्त हथियार को नियोजित तरीके से 2 नग पिस्टल को शनिचरी वाले घर और 1 नग पिस्टल को भिलाई से जप्त कराए जाते । जो इस घटना में प्रयुक्त ही नहीं हुए है। कपिल त्रिपाठी ने इन्हें अदालत से बरी कराने का भी भरोसा दिलाया था ।

प्लानिंग के बाद ऐसे जुड़ते गए साथी…
पुलिस ने बताया की इस मामले में 24 साल के सुमित निर्मलकर पिता पंचराम निर्मलकर निवासी घुरु अमीरी को गिरफ्तार किया है। यह कपिल का मुख्य सहयोगी है । जिसने कपिल और दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर घटना की पूरी योजना बनाई। घटना दिनांक को घटना के बाद से किराए की स्कॉर्पियो से भिलाई पहुंच गया था और कपिल त्रिपाठी के फरार होने में सहयोग किया। इसके बाद स्वयं भी कपिल त्रिपाठी के साथ फरार हो गया।

पुलिस ने प्रेम उर्फ बजरंग श्रीवास पिता राजेश श्रीवास उम्र 30 साल निवासी मिनी बस्ती जरहाभाटा को भी गिरफ्तार किया है। इस आरोपी के द्वारा कपिल त्रिपाठी की योजना के अनुसार उत्तर प्रदेश से 5 शूटरों को बुलाया और मामले में प्रयुक्त पिस्टल खरीदने में अहम भूमिका निभाई। इस मामले में कपिल त्रिपाठी की पत्नी श्रीमती सुतित्रा त्रिपाठी 36 वर्षीय को भी गिरफ्तार किया गया है। यह कपिल त्रिपाठी की पत्नी है और षड्यंत्र में शामिल रही है।उसने घटना के बाद भारत- नेपाल सीमा में अपने मायके पिथौरागढ़ ( उत्तराखंड ) में आरोपी कपिल त्रिपाठी के छिपने का इंतजाम कराया था। पुलिस ने दत्तक पुत्री को भी गिरफ्तार किया है। वह जय नारायण त्रिपाठी के शनिचरी बाजार स्थित मकान की दावेदार थी ।संजू त्रिपाठी इसका शारीरिक शोषण करता था। संजीव त्रिपाठी की हत्या करने के लिए इसने अन्य आरोपियों को उकसाया ।

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इसके घर से एक पिस्टल एक देसी कट्टा भी बरामद हुआ है। इस मामले में 23 साल के मुंगेली नाका निवासी अमन गुप्ता की भी गिरफ्तारी हुई है। वह इस वारदात में इस्तेमाल किए गए स्विफ्ट, डिजायर गाड़ियों का मालिक है। इसने आरोपियों को भागने के लिए वाहन उपलब्ध कराया। आरोपी अमन गुप्ता अपने दूसरे साथियों के साथ संजीव त्रिपाठी की रैक़ी कर शूटरों को घटनास्थल पर पहुंचने की सूचना दिया और घटना के बाद शूटरों को भागने में भी सहयोग किया। वह आरोपियों को शहडोल छोड़कर बिलासपुर वापस आ गया। पुलिस ने 42 साल के भरत तिवारी पिता रामफल तिवारी को गिरफ्तार किया है। यह दत्तक पुत्री का पति है । जिसे संजू त्रिपाठी द्वारा दत्तक पुत्री के शारीरिक शोषण करने की जानकारी थी और मृतक संजीव त्रिपाठी भी इसके साथ आए दिन मारपीट करता था। जिसके कारण कपिल त्रिपाठी की योजना में शामिल होकर इसने घटना दिनांक को संजू त्रिपाठी की रैक़ी किया और घटना के बाद दूसरे आरोपियों के साथ फरार हो गया था।

इस मामले में आशीष तिवारी पिता विजय तिवारी 29 साल को भी गिरफ्तार किया गया है । यह आरोपी भरत तिवारी का भतीजा है ।इसने कपिल त्रिपाठी ,भरत तिवारी आदि के साथ मिलकर घटना की योजना बनाई और शूटरों को भगाने में सहयोग किया। घटनास्थल की रैक़ी भी किया। रवि तिवारी पिता व्यास तिवारी 32 साल भरत तिवारी का भांजा है। इसने कपिल त्रिपाठी ,भरत तिवारी के साथ मिलकर योजना बनाई और शूटरों को भगाने में मदद की। इस मामले में गिरफ़्तार राजेंद्र सिंह ठाकुर प्रेम श्रीवास का ड्राइवर है। जिसे योजना के बारे में पूरी जानकारी थी । यह घटना दिनांक को प्रेम श्रीवास के साथ था और शूटरों को भगाने में सहयोग किया । इसके बाद फरार हो गया। पुलिस के अनुसार इस मामले में 5 अज्ञात शूटर सहित झारखंड रायगढ़ के हथियार सप्लायर अभी फरार बताए गए हैं ।

गोली कांड़ के दिन क्या हुआ…
पुलिस ने बताया की संजीव त्रिपाठी अपनी हेक्टर कार cg 10 ए जेड 2608 से सांवाताल स्थित अपने फार्म हाउस से बिलासपुर आ रहा था। घटना के समय संजीव त्रिपाठी खनिज बैरियर के पास बायपास रोड सकरी पहुंचा था । इसी समय पहले से योजनाबद्ध तरीके से घात लगाकर घटना की तैयारी के साथ मारुति डिजायर , बलेनो कार में सवारों ने मृतक संजीव त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी। सकरी पुलिस ने धारा 302 और 25/ 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया ।

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संजीव त्रिपाठी की पत्नी श्रीमती किरण त्रिपाठी से पूछताछ करने पर पता चला कि संजीव त्रिपाठी का अपने पिता जय नारायण त्रिपाठी और सगे छोटे भाई कपिल त्रिपाठी से पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद था । पिता जयं नारायण त्रिपाठी तथा सगे छोटे भाई कपिल त्रिपाठी के द्वारा योजना बनाकर हत्या करने की आशंका उसने जताई। यह सूचना मिलने के बाद आला अफसरों के दिशा निर्देश पर संदेही और अज्ञात आरोपियों की पतासाजी के लिए टीम गठित कर अलग-अलग हिस्सों में रवाना किया गया। पतासाजी के दौरान आरोपियों द्वारा घटना में उपयोग किए गए बलेनो कार को कोटा रोड मे , स्कॉर्पियो कार को भिलाई और इलेक्ट्रा कार को मुंगेली रोड स्थित दाऊ मेडिकल स्टोर के पास से बरामद किया गया। संजू त्रिपाठी की पत्नी से मिली जानकारी के आधार पर मृतक के पिता जय नारायण त्रिपाठी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और उसके मोबाइल की गहराई से छानबीन की गई ।जिससे पता चला कि जय नारायण त्रिपाठी के 4 पुत्र -पुत्री है।

जयनारायण ने एक लड़की को गोद लिया है। गोद ली हुई लड़की पर संजू त्रिपाठी हमेशा बुरी नियत रखकर उसका शारीरिक शोषण करता था। जय नारायण त्रिपाठी की संपत्ति शनिचरी में है ।उसे अपने हिस्से में लिखवाने के लिए संजू हमेशा अपने पिता पर दबाव बनाता था। साथ ही अपने छोटे भाई कपिल त्रिपाठी को हिस्सा नहीं देने के लिए भी दबाव बनाता था । उनकी संपत्ति को मृतक संजू त्रिपाठी अपने नाम पर दर्ज कराना चाहता था और ऐसा ना होने की वजह से कई बार अपने पिता से के साथ मारपीट कर चुका था। शुरुआती छानबीन में यह मामला भी सामने आया कि दत्तक पुत्री के साथ जय नारायण त्रिपाठी का भी अवैध संबंध है।

दत्तक पुत्री के साथ संबंध
मृतक संजीव त्रिपाठी द्वारा जय नारायण त्रिपाठी की दत्तक पुत्री के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाना और शनिचरी में स्थित मकान और दुकान (जहां दत्तक पुत्री का परिवार रहता था) उसे जयनारायण अपनी दत्तक पुत्री को देना चाहता था। पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर निरंतर विवाद चल रहा था। इसी विवाद के कारण जय नारायण त्रिपाठी ने कपिल त्रिपाठी दत्तक पुत्री ,भरत तिवारी, आशीष तिवारी सभी के द्वारा एक राय होकर संजू त्रिपाठी की हत्या की साजिश रची। जिसकी पुष्टि जयनारायण के मोबाइल में ऑडियो रिकॉर्ड से हुई । जिसमें कपिल अपने पिता जय नारायण त्रिपाठी को उसके द्वारा संजू त्रिपाठी की हत्या करने के बाद कपिल त्रिपाठी को हत्या करने के पश्चात नेपाल भागने की बात भी बोल रहा है।

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कहां ठहरे थे शूटर
जय नारायण त्रिपाठी त्रिपाठी, दत्तक पुत्री, भरत तिवारी और आशीष तिवारी द्वारा संजीव त्रिपाठी की हत्या की योजना को मूर्त रूप देने के लिए कपिल त्रिपाठी ने अपने नजदीकी सहयोगियों सुमित निर्मलकर और प्रेम श्रीवास से संजीव त्रिपाठी की हत्या करने के संबंध में चर्चा की। इसके बाद कपिल त्रिपाठी के कहने पर प्रेम श्रीवास में उत्तर प्रदेश से 5 शूटर बुलाए। ये शूटर करीब 1 महीने पहले बिलासपुर पहुंचे । इनको कपिल त्रिपाठी अमेरी स्थित अपने फार्म हाउस में रुकने का इंतजाम किया। रायगढ़ के रहने वाले हथियार सप्लायर के साथ कपिल त्रिपाठी और प्रेम निवास अंबिकापुर गए। जहां कपिल त्रिपाठी द्वारा झारखंड के हथियार सप्लायर से ₹2,00,000 नगद देकर एक पिस्टल और 10 राउंड खरीदा था । जिसका पता लगाया जा रहा है।

एक माह पहले आ गए थे शूटर
अपने भाई संजू त्रिपाठी को गोली मारने के लिए बनाए गए योजना के मुताबिक अपने साथ सहयोगी सुमित निर्मलकर ,प्रेम श्रीवास ,अमन गुप्ता, भरत तिवारी, आशीष तिवारी, रवि तिवारी, राजेंद्र ठाकुर को भी शामिल किया । पूरी योजना को कपल त्रिपाठी ने हीं तैयार किया था। करीब एक माह पहले से ही मृतक की हत्या किए जाने की कोशिश जारी थी। कपिल त्रिपाठी अपने भाई संजू त्रिपाठी की गतिविधियों जानने के लिए अपने सहयोगियों के जरिए लगातार रेकी कर रहा था। तय यह भी किया गया था कि संजू त्रिपाठी की हत्या करने के बाद सुमित निर्मलकर और कपिल त्रिपाठी, प्रेम श्रीवास नेपाल भाग जाएंगे। सुमित की पत्नी का घर नेपाल की सीमा पर है। इसकी व्यवस्था कपिल त्रिपाठी की पत्नी सुतित्रा त्रिपाठी की ओर से की जा रही थी।योजना के मुताब़िक भरत तिवारी, आशीष तिवारी, रवि तिवारी हथियार के साथ गिरफ्तार होते। इस हथियार को नियोजित तरीके से 2 नग पिस्टल को शनिचरी वाले घर और एक पिस्टल को भिलाई से जप्त कराते। जो इस घटना में प्रयुक्त ही नहीं हुए हैं। कपिल त्रिपाठी ने न्यायालय से ब़री कराने का भी भरोसा दिया था।

कपिल त्रिपाठी क्यों नहीं गया सकरी…
पुलिस ने बताया कि 14 दिसंबर को कपिल त्रिपाठी के पास खबर आई की आज दोपहर को संजू त्रिपाठी अपने फार्म हाउस सांवाताल जाएगा। कपिल त्रिपाठी और ने सभी को बताया कि संजू त्रिपाठी को सांवाताल से वापसी के समय गोली मारना है। तब हम सभी आपस में मिलकर तय किए कि सकरी पुराना थाना चौक ब्रिज खनिज बैरियर के सामने बाईपास रोड पर स्पीड ब्रेकर में जब संजू त्रिपाठी अपनी कार की गति सीमा को धीमा करेगा, उसी समय उसकी कार को घेर कर दोनों तरफ से फायरिंग करेंगे।योजना के मुताबिक सभी ने पहले से ही रैक़ी की। कोटा रोड में पोंड़ीं ग्राम की तरफ एक सुनसान जगह में नीले रंग की बलेनो कार को छोड़कर डिजायर कार में पांचों शूटर और प्रेम श्रीवास भागेंगे और अमन गुप्ता. भरत तिवारी, आशीष तिवारी और रवि तिवारी अलग कार में बैठकर शहडोल जाएंगे। इसके बाद अमन वापस बिलासपुर आ जाएगा।

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कपिल त्रिपाठी पहले से नियोजित तरीके से सुमित निर्मलकर को लेकर सफेद स्कॉर्पियो से भिलाई पहुंच पहुंचेगा और कपिल त्रिपाठी किसी अन्य साधन से खिलाई तक पहुंचे पहुंच जाएगा। कपिल त्रिपाठी ने योजना बनाते समय बोला था कि वह खुद बाहर रहेगा तो सभी को बरी करा लेगा और जल्दी जमानत भी करा लेगा ।जब जब जिसको सरेंडर करने बोलता जाएगा वह करते जाएंगे।

जब दिखी कांग्रेस महामंत्री लिखी हुई संजू की कार….
एक कार में बाहर से आए हुए 3 शूटर बैठें और अमन गुप्ता की डिजायर कार में दो शूटर को लेकर राजेन्द्र ठाकुर बैठा। जो पहले से ही सकरी पुराना थाना चौक खनिज बैरियर के सामने बाईपास रोड के आसपास मौजूद थे और अमन गुप्ता, भरत तिवारी, आशीष तिवारी, रवि तिवारी और प्रेम श्रीवास अमन गुप्ता की एलांत्र कार में संजीव त्रिपाठी की रेकी की। अमन गुप्ता अपनी कार में भरत तिवारी ,आशीष तिवारी, रवि तिवारी और प्रेम श्रीवास को बैठाकर संजू त्रिपाठी का रेकी करने तखतपुर रोड की तरफ आगे बढ़ गए।

लगभग 1 किलोमीटर आगे संजू त्रिपाठी की महामंत्री कांग्रेस कमेटी बिलासपुर लिखी सफेद रंग की हेक्टर कार दिखी। तब प्रेम श्रीवास द्वारा व्हाट्सएप कॉल के जरिए मौके में मौजूद एक शूटर को कॉल कर बताया कि संजू त्रिपाठी की गाड़ी बिलासपुर की ओर आ रही है तुम लोग देख लेना । इसके बाद सभी तखतपुर की ओर कुछ दूर आगे बढ़े । फ़िर यूटर्न लेकर बिलासपुर की ओर आ रहे थे. तभी कोटा मोड़ के पास आरोपियों को नीले रंग की बलेनो कार… जिसमें शूटर बैठे थे.. दिखाई दी।

बलेनो कार देखकर सभी समझ गए कि शूटरों ने संजू त्रिपाठी की हत्या कर दी है। इसके बाद सभी पहले के नियोजित प्लान के मुताबिक उनके पीछे पीछे कार को छोड़ने पोंड़ी गए और घटना में प्रयुक्त वाहन को पोंड़ी में छोड़कर 5 शूटर और प्रेम श्रीवास डिजायर कार में बैठकर शहडोल की तरफ भाग गए। साथ ही अमन गुप्ता की कआर में भरत तिवारी ,आशीष, तिवारी, रवि तिवारी और राजेंद्र ठाकुर भी शहडोल की तरफ भागे । अमन गुप्ता कार में सवार भरत तिवारी, आशीष तिवारी, रवि तिवारी और राजेन्द्र ठाकुर को शहडोल शराब भट्टी के पास छोड़ कर वापस बिलासपुर आकर अपनी कार को छुपा कर भाग गया।

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गोली कांड के बाद कैसे भागे आरोपी…
घटना के बाद सुमित निर्मलकर किराए की स्कॉर्पियो कार से भिलाई चला गया था और कपिल त्रिपाठी घटना के बाद अपनी पत्नी को फोन कर एक बैग में कुछ कपड़े पैक कर रिंकू तिवारी गार्ड को देने बोलकर बिलासपुर से लिफ्ट लेकर भिलाई पहुंचा। जहां सुमित निर्मलकर उसका इंतजार कर रहा था । विवेचना के दौरान पूछताछ एवं तकनीकी डाटा के छानबीन से इनके भागने के संभावित रास्तों का पता किया गया । जिससे पता चला कि सुमित निर्मलकर और कपिल त्रिपाठी दोनों भिलाई से गोंदिया होते हुए भोपाल पहुंचे । भोपाल में दोनों ने एक टैक्सी ड्राइवर से लिफ्ट लिया फिर वहां से बस से इंदौर पहुंचे । इंदौर से बस से दिल्ली पहुंचे ।दिल्ली में टैक्सी करके नेपाल जाने वाली बस में बैठे। नेपाल जाते समय लखनऊ टोल प्लाजा के पास यूपी पुलिस की मदद से कपिल और सुमित निर्मलकर को गिरफ्तार किया गया ।

उसके बाद प्रेम श्रीवास जो शहडोल होते हुए यूपी भाग गया था. उसे लखनऊ से गिरफ्तार किया गया। भरत तिवारी, रवि तिवारी, आशीष तिवारी और राजेंद्र सिंह ठाकुर जो शहडोल होते हुए दिल्ली भाग गए थे ,इनको दिल्ली पुलिस की मदद से दिल्ली में गिरफ्तार किया गया। अमन गुप्ता को सिरगिटी बस स्टैंड के पास से गिरफ्तार किया गया।

एक हज़ार से अधिक सीसीटीवी फुटेज पर नज़र….
पुलिस ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और यूपी पुलिस के साथ-साथ भोपाल के टैक्सी ड्राइवर दिल्ली के कैब़ ड्राइवर की भी मदद ली गई। पुलिस ने बताया कि टीम द्वारा आरोपियों की पतासाजी के दौरान 20 लाख से अधिक मोबाइल नंबरों की छानबीन की गई और 100 से अधिक स्थानों में मोबाइल टावरों का कॉल डाटा रिकॉर्ड कर उसकी छानबीन की गई। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश ,महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में 1000 से अधिक सीसीटीवी कैमरा पर नजर डाली गई। इन राज्यों के करीब 50 से अधिक टोल प्लाजा में लगे सीसीटीवी कैमरा की भी छानबीन की गई। एसएसपी पारुल माथुर के दिशा निर्देश में गठित 22 सदस्य विशेष टीम सहित जिला पुलिस की टेक्निकल टीम की भी इस मामले में सराहनीय भूमिका रही।

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