बजट प्रतिक्रियाः कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय ने बताया..गरीबों से दूर पूंजीपतियों का बजट..चौहान ने कहा..रक्षा क्षेत्र को निजी हाथों में देने की साजिश

 बिलासपुर—केंद्रीय बजट पर शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय पाण्डेय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाण्डेय ने बजट को जनता से दूर और उद्योगपतियों के करीब बताया है।जिला कांग्रेस प्रवक्ता अनिल चौहान ने बजट को झूठी सौगातों वाली नई पोटली कहा है।
 
                  जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय पाण्डेय ने केन्द्रीय बजट को काफी निराशाजनक और देश को हतोत्साहित करने वाला बताया है। विजय पाण्डेय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि बजट में किसान मजदूर, गरीब, महंगाई,महिला,युवा, बेरोजगारी, कुटीर उद्योग ,लघु उद्योग , मध्यम वर्ग, निम्न वर्ग के लिए निराशाजनक है। नरेंद्र मोदी ने 2 करोड़ प्रति वर्ष रोजगार देने के वादे के साथ 60 लाख पर आ गए हैं। बजट और प्रधानमंत्री की यह सबसे बड़ी विफलता है।
 
           शहर अध्यक्ष ने कहा कि रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर के नाम पर निजी हाथों में सौपने की बू आ रही है। ,400 वंदे भारत ट्रेन की बात की गई लेकिन रेल और स्टेशनों को बिकने से कैसे बचाया जाए..इस बात को लेकर बजट मौन है। बुलेट ट्रेन की कोई चर्चा नही है। वित्त मंत्री ने डिजिटल बैंकिंग का उल्लेख किया है।  इससे स्पष्ट है कि भविष्य में बैंको के साथ कोई बड़ी घटना करने के मूड में  केंद्र सरकार है ।
 
                      शहर अध्यक्ष ने बताया कि कॉर्पोरेट टैक्स कम करके केंद्र सरकार ने अपने पूंजीवादी सोच को उजागर किया है। दरअसल क्लिष्ट शब्दो के मायाजाल से वित्त मंत्री ने जनता को भ्रमित किया है ,निराशा से भरा बजट है।
 
            जिला कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार के 2022 के  मोदी सरकार के 10 वें बजट को फिर से पुराने बजटों के तारतम्यता से दूर प्रधानमंत्री के लोक लुभावने वायदों की तरह लच्छेदार शब्दावली का खोखला समूह बताया है।  चौहान ने कहा किपिछले बजटों में जहाँ किसानों की आय दुगुनी करने, युवाओं के लिए स्किल डेवेलप सेंटर, बुलेट ट्रेन, पहले चरण की 100 स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन के सपनों वाला बजट था तो अब की बार इन सभी योजनाओं का जिक्र तक नहीं किया गया। देश को नए झूठे सपनों की सौगात दे दी गयी और उसके क्रियान्वयन के लिए 25 वर्ष का समय दे दिया गया। 
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             हजारों और लाखों करोडों का टारगेट बताकर मोदी सरकार उन योजनाओं में 10 प्रतिशत भी टारगेट पूरा नहीं करती है।लगभग 800 किसानों की शहादत के बाद तीन काले कृषि कानून तो वापस हुए पर किसानों को राहत देने कोई ठोस योजना तो दूर कोई छोटी योजना तक नहीं बनायी गयी। खेती – किसानी, बेरोजगारी, गरीबी, कुपोषण, स्वास्थ और शिक्षा जैसे आम आदमी के सरोकार वाले महत्वपूर्ण विषयों में कोई भी ठोस योजना मोदी सरकार में नहीं है।
 

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