VIDEO-रिक्शा चालक के बेटे ने ऐसे रचा इतिहास..सहायक कर आयुक्त बनकर बढ़ाया पिता और शहर का मान..परिवार के सहयोग के लिए किया दर्जी का काम

तखतपुर–(टेकचंद कारड़ा)—यदि विजन क्लियर और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो आसमान को भी सजदा करने को मजबूर होना पड़ता है। तखतपुर निवासी रिक्शा चलाक का बेटा ने ऐसा ही कमाल किया है। विजय कैवर्त संघर्ष की भठ्ठी में ऐसा तपा की सोना बनकर निकला। ना केवल अपने माता पिता का नाम बल्कि तखतपुर और बिलासपुर का भी नाम रोशन किया है।  छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में 24 वां स्थान हासिल कर तखतपुर निवासी विजय कैवर्त ने कमाल किया है। कमाल इसलिए कि विजय कैवर्त के पिता रिक्शा चालक और मां गृहणी है। विजय कैवर्त पीएससी में सहायक कर आयुक्त के पद पर चयनित होकर  तखतपुर में संघर्ष की नई इबारत लिखा है। क्योंकि जब विजय को अपनी सफलता की जानकारी मिली तो उस समय वह बुटिक में सिलाई और कढाई के काम को अंजाम दे रहा था।      

            सफलता किसी साधन का नहीं बल्कि मेहनत से हासिल होता है। पेशे से बुटिक का काम करने वाले तखतपुर निवासी विजय ऐसा कर दिखाया है। तखतपुर निवासी विजय कैवर्त ने चौथे प्रयास में पीएससी की परीक्षा में सहायक कर आयुक्त पद को हासिल किया है। शायद कुलदीप कैवर्त को इस बात का अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि आने वाली दिवाली उसके जीवन की सबसे बड़ी दीवाली होने वाली है।रिक्शा चलाकर कुलदीप अपने बच्चे का लालन-पालन कर वह संस्कार दिया जिससे वह एक काबिल इंसान बन सके। समाज में अपनी पहचान बना सके। पिता की इस सीख को विजय  कैवर्त ने सर माथे रखा। परिश्रम करना नहीं छोड़ा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद घर खर्च में पिता का हाथ बंटाने लगा। टेलरिंग का कार्य सीखा और आज भी वह टेलरिंग का काम कर रहा है।
 
               कुछ कर गुजरने की तमन्ना से विजय प्रतिदिन पढ़ाई भी करता रहा। और उसका परिणाम सहायक कर आयुक्त के रूप में आया। विजय कैवर्त की प्राथमिक शिक्षा गायत्री ज्ञान मंदिर में कक्षा आठवीं तक हुई। 12वीं तक की पढ़ाई बालक हाई स्कूल में करने के बाद सीवी रमन यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिग्री हासिल किया।एक अच्छा मुकाम हासिल हो सके इसके लिए विजय का प्रयास जारी रहा। पीएससी परीक्षा की तैयारी के साथ बिलासपुर में एम साहब के यहां टेलरिंग का भी काम करता रहा। विजय कैवर्त ने बताया कि सफलता के लिए केवल परिश्रम को ही जिम्मेदार मानता है। टेलरिंग के काम के साथ प्रतिदिन वह 5 घंटे पढ़ाई करता था। उसे चौथी बार में सफलता मिली। इसके पहले 3 बार  प्री में उत्तीर्ण हुआ। चौथी बार में मेंस की परीक्षा में पहुंचकर 21 वां रैंक हासिल किया।कुलदीप कैवर्त ने बताया कि विजय की सफलता का श्रेय ईश्वर का आशीर्वाद और संस्कार को जाता है। उसने नगर का ना्म रोशन किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *