RRS समर्थित किसान संघ का तीनों कानून को समर्थन..फिर भी संगठन की धमकी..इस पर करें विचार..अन्यथा करेंगे आंदोलन

बिलासपुर—- राष्ट्रीय सेवक संघ के बैनर तले किसानों का झंडा बुलन्द करने वाले भारतीय किसान संघ ने बयान जारी किया है कि एमएसपी को लेकर किसानों की मांग पर अडिग है। सरकार को एमएसपी को लेकर कानून में संशोधन करना भी चाहिए। लेकिन भारतीय किसान संघ आंदोलन करने वाले किसानों के इस बात से इत्तफाक नहीं रखता है कि तीनों कृषि कानून को वापस लिया जाए। यह बातें विस्तार भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष धीरेन्द्र दुबे  ने आला नेताओँ से बातचीत के बाद पत्रकारों से कही। 
 
             धीरेन्द्र दुबे ने बताया कि आज संगठन के आला नेताओं के बीच संगठन को मजबूत किए जाने को लेकर व्यापक स्तर पर बातचीत हुई है। इस दौरान किसानों की मांग और आंदोलन को लेकर भी चर्चा हुई है। धीरेन्द्र ने कहा कि पिछले 75 दिनों से दिल्ली सीमा पर किसान आंदोलन कर रहे है। सरकार और किसान संगठनों के बीच कोई सुलह की स्थिति बनते नहीं दिखाई दे रही है। आरएसएस संबंधित भारतीय किसान संघ एक बार फिर आंदोलन में शामिल किसान संगठनों से निवेदन करता है कि सरकार के प्रस्ताव पर विचार कर आवश्यक संशोधन पर जोर दें। एमएसपी के लिये कानून की मांग पर भारतीय किसान संघ अडिग है। लेकिन तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। 
 
             धीरेन्द्र दुबे ने कहा कि भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय मंत्री , के.साई रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि आंदोलनरत किसान संगठनों में कुछ लोग किसान हित में सोचते हैं। लेकिन इसमें कुछ राजनीति से प्रेरित लोग भी शामिल हो गए हैं। जिसके चलते समाधान नहीं निकल रहा है। जबकि भारतीय किसान संघ बीते 40 साल से मांग करता रहा है कि किसानों को कहीं भी अपना उत्पाद बेचने की पूरी छूट होनी चाहिये। सरकार ने ऐसा कानून लाया भी है। कानून का भारतीय किसान संघ स्वागत करता है। लेकिन तीनों कानूनों में कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिनको लेकर हमने सरकार को सुधार करने किसानों की बातों को सरकार के सामने रखा है।
 
               सरकार कुछ सुधार करने को तैयार है। कुछ बिन्दुओं को लेकर सुधार करने का आश्वासन भी दिया है। ऐसे में आंदोलनरत किसान संगठनों को  समझना होगा कि कानूनों को सीधे तौर पर काला कानून कहना उचित नहीं है। 
 
         धीरेन्द्र ने कहा कि कानूनों में जरूरी बदलाव के लिये बातचीत का होना बहुत जरूरी है।  हो. जहां तक एमएसपी का सवाल है भारतीय किसान संघ भी किसानों की मांग का समर्थन करता है। लागत के हिसाब से किसानों को मूल्य मिलना चाहिए। एमएसपी पहले भी थी और अब भी है लेकिन उसका लाभ सभी किसानों को नहीं मिल रहा है। सरकार को घोषणा करनी चाहिये कि एमएसपी पर गारंटी के साथ खरीद हो। इसके लिये जरूरी कानून बनाया जाए।
 
            भारतीय किसान संघ के नेता ने दावा किया कि 22 जनवरी को फिलहाल सरकार ने जो आखिरी प्रस्ताव दिया था उस पर संयुक्त किसान मोर्चा के 14 नेता सहमत थे। बाकी लोगों ने असहमति जताई थी। यही कारण है कि समाधान नहीं निकल सका है।  दूसरी तरफ संयुक्त किसान मोर्चा के नेता भारतीय किसान संघ पर आरोप लगाते हैं कि आरएसएस के संगठन होने के नाते वह सरकार के पक्षधर हैं। लेकिन किसान संघ आरोपों को दरकिनार करता है। आरोप लगाने वालों को अपनी स्मरण शक्ति पर जोर देना होगा। साल 2004 में  भाजपा सरकार थी। तात्कालीन समय किसान संघ के लाखों कार्यकर्ता दिल्ली के रामलीला मैदान में एकत्रित हुए थे।  एक बार भारतीय किसान संघ के नेताओं ने कृषि अध्यादेशों के आने के बाद तमाम आपत्तियां सरकार को भेजी हैं। ऐसे में भारतीय किसान संघ पर आरोप निराधार है। एमएसपी गारंटी कानून के लिये किसान संघ ने सरकार को स्पष्ट किया है कि यदि एमएसपी पर कानून लेकर  नहीं आती है तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
 
               धीरेन्द्र ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी का गठन किया है। भारतीय किसान संघ की तरफ से भी एक पत्र कमेटि को लिखा गया है। पत्र में के साई रेड्डी ने लिखा है कि प्रधानमंत्री को पहल कर मामले का हल निकालना चाहिए। 

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