स्कूलों के नये सेटअप को लेकर शिक्षामंत्री से हुई शालेय शिक्षक संघ की मुलाकात,वीरेद्र दुबे बोले- संस्कृत शिक्षक का पद कम करने से होगा देश की प्राचीन भाषा का अपमान

रायपुर। शिक्षा विभाग ने जैसे ही शासकीय स्कूलों में नया सेटअप लागू करने हेतु मापदंड को सार्वजनिक किया व DEO से परीक्षण कर सुझाव मांगे, शिक्षा जगत में भूचाल सा आ गया है।नए सेटअप में प्राइमरी की 5 कक्षाओ के लिए न्यूनतम 2 शिक्षक व एक प्रधानपाठक रखने की बात कही है। 30 से कम छात्र संख्या होने पर माध्यमिक शाला से प्रधानपाठक का पद समाप्त करने कहा गया है।इसी तरह हायर सेकेंडरी स्कूलों में वाणिज्य संकाय के लिए भी एक निश्चत संख्या पर ही 2 या उससे अधिक शिक्षक रखने की बात है जबकि निर्धारित संख्या से कम रहने पर केवल 1 शिक्षक रखने की स्वीकृति दी गई है जबकि वाणिज्य में हिंदी अंग्रेजी के अलावा 3 अन्य विषय भी पढ़ाये जाते है जिसके लिए कम से कम 2 शिक्षकों की आवश्यकता होती ही है।

*शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे के नेतृत्व में वाणिज्य संकाय, के शिक्षकों तथा संस्कृत भाषा के व्याख्याताओं का प्रतिनिधिमंडल आज छत्तीसगढ़ के शिक्षामंत्री श्री टेकाम से मुलाकात कर उपरोक्त समस्याओं से अवगत कराया और जल्द ही इसका निराकरण कर इस नवीन सेटअप को परिवर्तित करने की मांग की। मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री को ज्ञापन सौंपकर इन विसंगतियों पर शासन का ध्यान आकृष्ट कराया व मांग किया कि प्रत्येक स्कूलों में वाणिज्य संकाय के लिए कम से कम 2 शिक्षक का पद अवश्य होना चाहिए। इसी तरह संस्कृत के लिए भी 220 छात्र सँख्या को न्यूनतम आधार माना गया है इस के अनुसार तो अधिकांश हाई स्कूलों से संस्कृत शिक्षक के पद ही समाप्त हो जायेंगे व हजारों शिक्षक अतिशेष की श्रेणी में आ जाएंगे। हाई स्कूल में संस्कृत शिक्षजक नहीं होने से शासन द्वारा संस्कृत के प्रचार प्रसार के दावे भी झूठे साबित हो जाएंगे।अतः संस्कृत विषय के व्याख्याता प्रत्येक विद्यालय में हो तथा संस्कृत शिक्षक की नियुक्ति हो।

प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने प्राथिमक शाला में भी प्रति कक्षा एक शिक्षक रखने की मांग की, 5 कक्षा के लिए मात्र 2 शिक्षक रखने से शिक्षा में गुणवत्ता कैसे आ सकती है इस पर भी शिक्षामंत्री से पुनर्विचार करने की मांग की।शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि इस विवादित नए सेटअप का विरोध प्रत्येक जिला में हमारे सन्गठन के जिलाध्यक्ष कर रहे हैं और उचित माध्यम तक शिक्षकों की इस आवाज को पहुचा रहे हैं।

प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी,प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा, प्रांतीय उपाध्यक्ष सुनील सिंह,डॉ.सांत्वना ठाकुर,विष्णु शर्मा,सहसचिव सत्येंद्र सिंह, प्रांतीय मीडिया प्रभारी जितेन्द्र शर्मा,सन्गठन मंत्री विवेक शर्मा,प्रांतीय प्रवक्ता गजराज सिंह, संगठन सचिव जितेंद्र गजेंद्र,राजेश शर्मा, घनश्याम पटेल,अतुल अवस्थी,अजय वर्मा,गोविंद मिश्रा जिलाध्यक्षगण प्रहलाद जैन,शिवेंद्र चंद्रवंशी, सन्तोष मिश्रा,दिनेश राजपूत, कुलदीप सिंह,शैलेष सिंह, प्रदीप पांडेय, रवि मिश्रा, संतोष शुक्ला, विनय सिंह, हिमन कोर्राम, दीपक वेंताल, भोजराज पटेल,भानु प्रताप डहरिया,यादवेंद्र दुबे, उपेंद्र सिंह,जोगेंद्र यादव,विनय सिंह, सर्वजीत पाठक, ओमप्रकाश खैरवार,कैलाश रामटेके,कृष्णराज पांडेय,,पवन दुबे,करनैल सिंह,श्री मती शशि कठोलिया,अब्दुल आसिफ खान,विक्रम राजपूत ,गौतम शर्मा, मारुति शर्मा,अमित सिन्हा,द्वारिका भारद्वाज,अशोक देशमुख,तिलक सेन,विजय बेलचंदन, हेमलाल जोशी,विवेक धुर्वे व साथीगण श्रीमती ममता साहू,पूर्णिमा साहू,उषा बंषोड, गोमती भुआर्य, शीतला, सावित्री स्वर्णकार, संध्या धनगुन, खिलेश्वरी तिवारी, विभा ठाकुर, नरेंद्र कुमार ठाकुर,जगप्रसाद वर्मा आदि ने नवीन सेटअप को संशोधित करने की मांग की।

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