सीपत तहसील,मतलब.तहसीलदारों का प्रयोगशाला .7 महीनों में 6 तहसीलदारों ने संभाला मोर्चा..लोग पूछ रहे..क्या..इसलिए ही बनाया गया तहसील..

बिलासपुर—(रियाज अशरफी)-जिला प्रशासन ने सीपत तहसील को तहसीलदारों का ट्रेनिंग सेन्टर बना दिया है । पिछले सात महीने में  6 तहसीलदार बदल चुके हैं। नायब तहसीलदार पेखन टोन्ड्रे सीपत तहसील के 6 वें प्रभारी तहसीलदार होंगे। लगातार फेरबदल के कारण स्थानीय लोगों की समस्या सुलझने की बजाय उलझती जा रही है। 
          जिला प्रशासन ने सीपत तहसील को तहसीलदारों का ट्रेनिंग सेन्टर बना दिया है। पिछले 7 महीनों में 5 तहसीलदार सीपत तहसील कार्यालय से अनुभव लेकर कहीं दूसरी जगह पहुंच चुके हैं। शुक्रवार को पेखन टोंड्रे ने 6 वें तहसीलदार के रूप में प्रभार लिया है। देखना होगा कि टोंड्रे कितने दिनों के लिए सीपत तहसीलदार की कुर्सी संभालते हैं।
                   जानकारी देते चलें कि  चार महीने पहले  31 मार्च को राज्य सरकार ने 2011 के जनगणना के आधार पर कुल आबादी 4,38,7,87 की जनसंख्या वाले 40 पंचायत और 53 गांव को मस्तूरी से अलग कर सीपत तहसील का पूर्ण दर्जा दिया। वित्तीय वर्ष में नई तहसील का कार्य प्रारंभ करने का मूल उद्देश्य  लोगो को लंबी दूरी तय कर मस्तूरी जाने और अनावश्यक परेशानियों से बचाना है। तहसील बन जाने से सीपत में ही राजस्व संबंधित प्रकरणों का निपटारा आसानी से हो सके।
          लेकिन राज्य सरकार के  फैसले को जिला प्रशासन आईना दिखाने को ठान रखा है। दरअसल जिला प्रशासन ने सीपत तहसील को तहसीलदारों का ट्रेनिंग सेन्टर बनाकर रख दिया है। बताते चलें कि अतिरिक्त तहसीलदार तुलसी राठौर के अवकाश में जाने के बाद सीपत तहसीलदार का प्रभार नायब तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल ने दो माह तक संभाला। 31 दिसम्बर तक प्रभारी के तौर पर तहसीलदार की कुर्सी को सम्भाला। इसके बाद 1 जनवरी को शशि भूषण सोनी को तहसीलदार की जिम्मेदारी दी गयी। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को समझकर व्यवस्था बनाना शुरू ही किया था कि 4 माह में ही 25 मई को शशिभूषण का स्थानांतरण कर भूअभिलेख शाखा का प्रभार दिया गया।
                इसके बाद बेलगहना तहसीलदार मनोज खांडे ने सीपत तहसीलदार बने। इसके पहले मनोज खाण्डे कुछ समझते बूझते उनका प्रमोशन हो गया। 22 दिन बाद डिप्टी कलेक्टर बनकर कोरबा चले गए। 30 जून को भूअभिलेख शाखा के उप अधीक्षक अप्रतिम पांडेय को सीपत का  तहसीलदार बनाया गया। एक बार फिर परिवर्तन हुआ। मात्र 13 दिनों बाद ही अप्रतिम पाण्डेय का   स्थानांतरण मस्तूरी कर दिया गया।
             और अप्रतिम पाण्डेय की कुर्सी को रतनपुर तहसीलदार पेखन टोंड्रे ने संभाला है। शुक्रवार को पेखन ट्रोन्ड्रे ने सीपत तहसील का चार्ज लिया है। देखना होगा कि तहसीलदार पेखन टोंड्रे का कार्यकाल कितने दिनों का होता है। या फिर अन्य तहसीलदारों की तरह.. तू चल मैं आया.. वाली स्थिति रहती है।
प्रभावित हो रहा राजस्व कार्य
       तहसीलदारों के लगातार तबादलों से सीपत तहसील का काम बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।  फावती नामांतरण, स्कूल,कालेज की पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राों  को लगने वाले जाती निवास  समेत अन्य राजस्व संबंधी कार्य बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। न्यायालय में लंबित प्रकरणों में पक्षकारों को पेशी दर पेशी दिया जा रहा है। लोग समझ नही पा रहे है कि नए तहसील में आखिर इतनी लचर व्यवस्था क्यों। क्या शासन ने सीपत को तहसीलदारों का ट्रेनिंग सेन्टर तो नहीं बना दिया है।

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