सामाजिक कार्यकर्ता का दावा..विनाशकारी होगी जातीय जनगणना..धराशायी होंगे लोकतांत्रिक मूल्य

बिलासपुर— सामाजिक कार्यकर्ता जसबीर गुम्बर ने सरकार के जातीय जनगणना के फैसले को देश के लिए घातक बताया है। प्रेस नोट जारी कर उन्होने बताया कि सरकार का फैसला विनाशकारी साबित होगा। हमने ऐसा ही एक विनाश भारत को दो टुकड़ों में होते देखा है। ऐसी स्थिति में जातीय जनगणना को देश के स्वास्थ्य के लिए किसी भी सूरत में उचित नहीं कहा जा सकता है।
               सामाजिक कार्यकर्ता जसबीर गुम्बर ने कहा कि जातीय जनगणना का फैसला देश के हित में नहीं है। यह बहुत ही विनाशकारी साबित होगा। हमने इसका खामियाजा 1947 में देखा है। बावजूद इसके हम समझने को तैृयार नहीं है। इस प्रकार की तुष्टिकरण देश के हित में उचित नहीं है।
                  गुम्बर ने बताया कि पिछली जनगणना में 46 लाख जातियों और उपजातियों  की जानकारी थी। उन्होने दावा किया कि जातीय जनगणना को सामुहिक हथियार बनने से कोई रोक नहीं सकता है। इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को झटका लगेगा। ऐसी सूरत में देश की एकता बनाकर रखना मश्किल हो जाएगा। 
                         गुम्बर के अनुसार जातीय जनगणना लोकतंत्र को भेंड़तंत्र को बदल देगा। न्यायपालिका से लेकर कार्यपालिका तक योग्यता की जगह जातियां ले लेंगी। गरीबी दूर करने का लक्ष्य धरा का धरा रह जाएगा। सवाल है कि क्या आज 80 करोड़ जनता को राशन जाति के आधार पर  मिल रहा है। यदि जातीय जनगणना हुई तो यह आधार भी नष्ट हो जाएगा। 
                 70 करोड़ से ज्यादा वंचितों का जाति आरक्षण ने ही नुकसान पहुंचाया है।  सिर्फ पांच सात हजार नौकरियों की रेवड़िया बांटकर 80 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा के नीचे उपेक्षित कर दिया गया। सही अर्थ में भारत का हित चाहने वालों को घर से बाहर आना होगा। एकसुर में होकर जातीय जनगणना का विरोध करना होगा। 

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