मेरा बिलासपुर

CG NEWS :“श्रीकांत” की ज़मीन पर “सूर्यकांत” को उतरते देख मंत्रमुग्ध हुए दर्शक…”राम की शक्ति पूजा” का प्रभावी मंचन

CG NEWS :बिलासपुर । महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” की कालज़यी रचना “राम की शक्ति पूजा” बिलासपुर के सिम्स ऑडिटोरियम में सज़ीव हो उठी । कला अकादमी छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद संस्कृति विभाग की ओर से कराए जा रहे नाट्योत्सव की शुरूआत इस नाटक के साथ हुई । व्योमेश शुक्ल ,रूपवाणी, बनारस के निर्देशन में प्रभावी लाइटिंग और साउंड के बीच कलाकारों ने यह नाटक कुछ इस अंदाज़ में पेश किया कि दर्शक पूरे समय अपनी जगह पर जमे रहे। लोगों ने श्रीकांत की ज़मीन पर सूर्यकांत को उतरते देखा और मंत्रमुग्ध हो गए ।

कार्यक्रम की शुरूआत में कला अकादमी के अध्यक्ष योगेंद्र त्रिपाठी ने स्वागत वक्तव्य में कहा कि रूपवाणी के इस अभूतपूर्व नाटक का स्वागत है..यह सभी के लिए नया अनुभव होगा।श्रीकांत वर्मा पीठ के अध्यक्ष राम कुमार तिवारी ने कलाकारों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।कार्यक्रम का संचालन सुनील चिपड़े, सुमित शर्मा,श्री कुमार ने किया।

शुरूआत मे ही नाटक के निर्देशक व्योमेश शुक्ल ने कथा वस्तु के बारे में बताया कि राम-रावण युद्ध चल रहा है । युद्धरत राम निराश हैं और हार का अनुभव कर रहे हैं । उनकी सेना भी खिन्न है, प्रिया सीता की याद अवसाद को और घना बना रही है. वह बीते दिनों के पराक्रम और साहस के स्मरण से उमंगित होना चाहते हैं । लेकिन मनोबल ध्वस्त है। शक्ति भी रावण के साथ है। देवी स्वयं रावण की ओर से लड़ रही हैं- राम ने उन्हें देख लिया है । वह मित्रों से कहते हैं कि विजय असंभव है और शोक में डूब जाते हैं । बुजुर्ग जामवंत उन्हें प्रेरित करते हैं । वह राम की आराधन-शक्ति का आह्वान करते हैं- उन्हें सलाह देते हैं कि तुम सिद्ध होकर युद्ध में उतरो । राम ऐसा ही करते हैं । उधर लक्ष्मण, हनुमान आदि के नेतृत्व में घनघोर संग्राम जारी है । इधर राम की साधना चल रही है। उन्होंने देवी को एक सौ आठ नीलकमल अर्पित करने का संकल्प लिया था । लेकिन देवी चुपके से आकर आखिरी पुष्प चुरा ले जाती हैं । राम विचलित और स्तब्ध हैं । तभी उन्हें याद आता है कि उनकी आँखों को माँ नीलकमल कहा करती थीं । वह अपना नेत्र अर्पित कर डालने के लिए हाथों में तीर उठा लेते हैं । तभी देवी प्रकट होती हैं । वह राम को रोकती हैं, उन्हें आशीष देती हैं ।उनकी अभ्यर्थना करती हैं और राम में अंतर्ध्यान हो जाती हैं ।

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राम की शक्तिपूजा कालजयी हिंदी कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की क्लॅसिक काव्यकृति है । 1936 में, अपने लिखे जाने के बाद से आज तक वह लगातार हिंदी साहित्य के केंद्र में आसीन है । यह काव्यकृति भगवान राम के जीवन समर के ज़रिये आज के मनुष्य की तकलीफ़ों की कहानी कहती है । रूपवाणी ने अपनी इस प्रस्तुति में बनारस की प्राचीन रामलीला के अनेक तत्वों का विन्यास किया है। इसके साथ-साथ हमने छऊ, भरतनाट्यम और कथक के सम्मिश्रण से इस प्रस्तुति का आंगिक तैयार किया है। दर्शकों ने भी इस प्रयोग की अनुभूति की और इसे सराहा। व्योमेश शुक्ल ने इसे अपने लिए गौरव का क्षण बताया कि श्रीकांत वर्मा की धरती पर सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को उतारने का अवसर उन्हे मिल रहा है।

शक्तिपूजा का पार्श्वसंगीत बनारस घराने के शास्त्रीय संगीत में निबद्ध है ।जो दर्शकों को प्रभावित करता है और पूरे समय बांधे रखता है। शक्तिपूजा सर्वाधिक जनप्रिय और महत्वाकांक्षी प्रयास है ।इसका अहसास दर्शकों ने भी किया । दिल्ली इंटरनेशनल आर्ट फेयर, संकट मोचन संगीत समारोह, ताज महोत्सव, आगरा, राजभवन पश्चिम बंगाल, कोलकाता, संभागीय नाट्य समारोह, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली: उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, इलाहाबाद और महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद समेत देश के अनेक महत्वपूर्ण कलाकेंद्रों में इसे पचास से ज्यादा बार प्रस्तुत किया जा चुका है । सिम्स ऑडिटोरियम में पन्द्रह लोगों की टीम ने पचास मिनट में शानदार प्रस्तुति दी और लोगोँ के दिलों में अपनी पहचान छोड़ गई ।

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व्योमेश शुक्ल निर्देशक के बारे में…

व्योमेश शुक्ल का जन्म 25 जून, 1980 को बनारस में हुआ । यहीं बचपन और एम. ए. तक पढ़ाई । शहर के जीवन, अतीत, भूगोल और दिक्कतों पर एकाग्र लेखों और प्रतिक्रियाओं के साथ 2004 में लिखने की शुरूआत 2005 में व्योमेश ने ईराक़ पर हुई अमेरिकी ज्यादतियों के बारे में मशहूर अमेरिकी पत्रकार इलियट वाइनबर्गर की किताब का हिंदी अनुवाद मैंने इराक़ के बारे में जो सुना’ शीर्षक से किया । जिसे हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘पहल’ ने एक पुस्तिका के तौर पर प्रकाशित किया । इस अनुवाद ने व्यापक लोकप्रियता और सराहना अर्जित की । व्योमेश ने विश्व साहित्य से नॉम चॉमस्की, हार्वर्ड जिन, रेमंड विलियम्स, टेरी इगल्टन, एडवर्ड सईद और भारतीय वांग्मय से महाश्वेता देवी और के. सच्चिदानंदन के लेखन का अंग्रेज़ी से हिंदी में अनुवाद किया है । मशहूर अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने अपने एक सर्वेक्षण में उन्हें भारत के दस श्रेष्ठ युवा लेखकों में शामिल किया है तो जानेमाने साप्ताहिक इंडिया टुडे ने उन्हें देश के सामाजिक- सांस्कृतिक दृश्यालेख में परिवर्तन करने वाली पैतीस शख्सियतों में जगह दी है । फिर भी कुछ लोग (2009), काजल लगाना भूलना (2020) (कविता-संग्रह); कठिन का अखाड़ेबाज़ (2020). तुम्हें खोजने का खेल खेलते हुए (2021) (आलोचना) उनकी प्रमुख रचनाएं हैं।

पुरस्कार / सम्मान : कविता के लिए वर्ष 2008 का अंकुर मिश्र स्मृति पुरस्कार और 2010 का भारत भूषण अग्रवाल स्मृति सम्मान, आलोचना के लिये 2011 में रजा फेलोशिप और संस्कृति-कर्म के लिए भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का जनकल्याण सम्मान’ रंगनिर्देशन के लिए संगीत नाटक अकादेमी द्वारा वर्ष 2017 का उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ युवा पुरस्कार दिया गया है ।व्योमेश शुक्ल बनारस में रहकर रूपवाणी शीर्षक एक रंगमंडल का संचालन करते हैं ।

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बिलासपुर में अरसे के बाद नाटक का मंचन हो रहा था । जिसमें  कथाकार देवेंद्र,रजनीश श्रीवास्तव,अजय पाठक,राघवेंद्र धर दीवान,महेंद्र श्रीवास,डॉ गरिमा,सत्यभामा अवस्थी,द्वारिका अग्रवाल,रुद्र अवस्थी, अरुण भांगे सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी छात्र पत्रकार और समाजसेवी जनों की उपस्थिति रही।कला अकादमी छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद संस्कृति विभाग की ओर से कराए जा रहे नाट्योत्सव के पहले दिन यह नाटक पेश किया गया । रविवार 22 जनवरी को शाम सात बजे से सिम्स ऑडिटोरियम में भरथरी का मंचन होने जा रहा है।

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