मुंगेली की वो शाम..और छत्तीसगढ़ BJP का नया सौम्य चेहरा..अपने “गाँव-घर” से क्या लेकर लौटे अरुण साव…?

( गिरिजेय ) मुंगेली छत्तीसगढ़ का ऐसा शहर … जहां निंरंजन केशरवानी, डॉ. भानू गुप्ता, फूल चंद जैन, अभय राम साव जैसे बीजेपी के दिग्गज नेता हुए … जो पहले जनसंघ और फ़िर भारतीय जनता पार्टी के दौर में मुंगेली को एक ख़ास पहचान दिलाते रहे…। इसी मुंगेली के अरुण साव जब छत्तीसगढ़ बीजेपी  अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार मुंगेली पहुंचे … तो इस शहर के लोगों ने एक नई पहचान का अहसास किया। और देश की सरकार चला रही पार्टी में प्रदेश का सबसे बड़ा ओहदा हासिल कर अपने शहर आए अपने लाड़ले की ऐसी आगवानी की, जो आने वाले बरसों में भी याद रहेगी। यह ऐसी शाम थी… जब मुंगेली में आसमान पर बादल छाए थे…। रुक-रुककर बारिश की बूंदें भी लोगों को भिगो रहीं थीं…। जब अपने ही गाँव-घर के पले-बढ़े अरुण साव का काफ़िला पहुंचा तो शहर के लोगों की भी आँख़े ख़ुशी से भींग गईं थीं और ख़ुशियों के इस पल ने अरुण साव की भी आँख़ें नम कर दी थीं।

वैसे छत्तीसगढ़ बीजेपी की कमान संभालने के बाद पिछले रविवार को अरुण साव जब पहली बार मुंगेली के लिए रवाना हुए तो बिलासपुर में मिनोचा कालोनी से ही उनके स्वागत का सिलसिला शुरू हो गया था। रास्ते में सकरी, काठाकोनी,तखतपुर, बरेला,जरहागांव,दशरंगपुर, गीधा, करही सभी जगहों पर लोगों ने अरुण साव का दिल से स्वागत किया । मुंगेली पहुंचने के बाद कलेक्टोरेट से लेकर दाऊपारा चौराहे और फ़िर पड़ाव चौराहे तक जगह-जगह ढ़ोल-ताशे, पटाख़े, फूल-माला के साथ स्वागत किया गया ।उन्हे लड्डुओं से भी तौला गया । वे कई गलियों में भी घूमे और लोगों के घर तक पहुंचकर उनका आशिर्वाद लिया ।खास बात यह रही कि लोगों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मुंगेली के अपने अरुण साव को गले लगाया । कई संगठनों ने उनका अभिनंदन किया ।

मुंगेली इलाक़े में कोई बड़ा कारख़ाना नहीं है। इस इलाक़े के लोग पूरी तरह से ख़ेती – किसानी के भरोसे ब़सर करते हैं। ओन्हारी राज के नाम से मशहूर इस इलाक़े के किसान अपनी एक अलग ही पहचान रख़ते हैं। अरुण साव भी ऐसे ही किसान परिवार से आते हैं। ठेठ छत्तीसगढ़िया हैं और ओबीसी साहू समाज से आते हैं। उन्होने वक़ालत करते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाई है। अपने पिता स्वर्गीय अभय राम साव सहित मुंगेली इलाक़े के कई बड़े नेताओं के करीब़ी रहकर उन्होने अख़िल भारतीय विद्यार्थी परिषद, युवा मोर्चा से लेकर भाजपा तक हर जगह ज़मीन से ज़ुड़क़र काम किया है। अपनी पार्टी के संगठन में प्रदेश के सबसे बड़े ओहदे पर पहुंचकर भी वे इन बातों को नहीं भूले हैं। मुंगेली में जहां भी उन्होने भाषण दिया- अपनी बोली छत्तीसगढ़ी में ही बात रखी…। और कहा कि पार्टी ने एक छोटे कार्यकर्ता के ऊपर बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी है। एक चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री और एक छोटा कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष बन जाए , यह सिर्फ़ भाजपा में ही हो सकता है। यक़ीनन ऐसे मौक़े पर किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता की आँखें नम हो जाएगी, जब उसे यह देखने को मिले कि उसने जिन खंभों में पार्टी के झंडे-बैनर लगाए हैं, उन्ही खंभों पर ख़ुद उनकी तस्वीरों के साथ बैनर लगे हैं….। जिन गलियों में चुनाव के समय वोटर पर्चियां बांटने निकलते थे… उन्ही गलियों से उनका क़ाफ़िला गुज़र रहा है….। और जिन दीवारों पर स्टेंशिल से अपनी पार्टी का चुनाव निशान छापते रहे , उन्ही दीवारों के सामने  पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में आगवानी हो रही है….।

मुंगेली इलाक़े के कार्यकर्ताओं ने महसूस किया कि इतने बड़े पद पर आकर भी अरुण साव नहीं बदले….। अपने सभी पुराने दोस्तों से पुरानी मुस्कान के साथ मिले…। तखतपुर में अपने पारिवारिक कपड़ा व्यवसायी संतोष तोलानी से भी मिलने पहुंचे। वरिष्ठ नेता पुन्नूलाल मोहले,लखन लाल साहू,तोखन लाल साहू  सहित पुराने मित्र बिलासपुर के पूर्व महापौर किशोर राय की मौज़ूदगी में जब उन्होने अपनी राजनीतिक यात्रा के मार्गदर्शक गिरिश शुक़्ला का नाम लिया तो अरुण साव का भी गला भर आया था…। उन्होने अपने इस अंदाज़ से लोगों को अहसास करा दिया कि एक कार्यकर्ता कैसे अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का दर्द समझ़ सक़ता है….। अरुण साव ने अपने घर पहुंचकर अपनी मां प्रमिला साव से भी आशिर्वाद लिया और मन की कामना पूरी होने के आशिर्वाद के साथ उन्हे शगुन के सौ रुपए भी मिले तो बचपन एक ब़ार फ़िर याद आ गया ।

अरुण साव जी आगे बढ़ो – प्रदेश आपके साथ है, जैसे नारों के बीच बिलासपुर से मुंगेली तक हर जगह आगे बढ़ते जा रहे अरुण साव ने ठेठ छत्तीसगढ़िया अँदाज़ में किसानों- नौज़वानों- महिलाओं- कर्मचारियों… सभी तब़क़े की बात की और  प्रदेश में फिर से बीजेपी क़ी सरकार बनाने का संकल्प हर ज़गह दोहराया… । लोगों ने याद किया कि 2002-03 में डॉक्टर रमन सिंह उस समय केन्द्रीय मंत्री पद छोड़कर छत्तीसगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष बने थे । उन्होने ना केवल अपनी पार्टी को 2003 के विधानसभा चुनाव से लिए नए सिरे से खड़ा किया । बल्कि भाजपा के सौम्य चेहरे के रूप में प्रदेश के मतदाताओं का भी भरोसा जीता। और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बनाई । जो लगातार पन्द्रह साल तक चली। वक़्त के साथ बहुत कुछ बदलने की दरकार होती है….। इस सूत्रवाक़्य को समझकर बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में भी बदलाव किया है …. और अरुण साव के रूप में फ़िर एक नया सौम्य – समर्थ चेहरा सामने लाया है। अब प्रदेश की सियासत में बदलाव की बड़ी चुनौती उनके सामने है। होनहार बिरवान की तरह अरुण साव ने अपने गाँव-घर में इस बात का अहसास करा दिया है कि लोग बीजेपी के इस नए सौम्य चेहरे की ओर किन उम्मीदों के साथ देख रहे हैं…। अब अगला पड़ाव…. आने वाला वक़्त ही तय करेगा…।

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