खत्म हुई 3 दिवसीय कार्यशाला..नई चिकित्सा शिक्षा पैटर्न पर विशेषज्ञों ने डाला प्रकाश..कहा.. कुछ इस तरह से..लाना होगा व्यवस्था में बदलाव

बिलासपुर—सिम्स में चिकित्सा शिक्षकों की तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में चिकित्सा शिक्षकों को एनएमसी के चिकित्सा क्षेत्र में होने वाले सुधार के बारे में बताया गया। तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन आब्जर्बर डॉ.अमरेन्द्र की देखरेख में किया गया। 

                  सिम्स चिकित्सा महाविद्यालय में 28 29 और 30 अक्टूबर को चिकित्सा शिक्षकों के लिए एनएमसी के निर्देश पर रिवाइज्ड बेसिक कोर्स वर्कशॉप का आयोजन किया गया। ट्रेनिंग समस्त चिकित्सा शिक्षकों को एनएमसी के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में होने वाले सुधार की जानकारी दी गयी। कार्यशाला में कुल 30 चिकित्सा शिक्षक को प्रशिक्षण दिया गया।
 
            डॉ.आरती पाण्डेय ने बताया कि तीन दिवसीय कार्यशाला में एनएमसी पाठ्यक्रम के बारे में होने वाले बदलाव पर विशेषज्ञों ने प्रकाश डाला । विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि नए पाठ्यक्रम को लागू करने से पहले वर्तमान चिकित्सा शिक्षक को खुद में किस प्रकार का परिवर्तन लाना है। 
 
            प्रशिक्षण का आयोजन तीन दिनों तक सिम्स शिक्षा महाविद्यालय में किया गया। कार्यशाला के पहले दिन चिकित्सा शिक्षकों को नए करिकुलम की आवश्यकता की जानकारी दी गयी। इंडियन मेडिकल ग्रैजुएट के नए स्वरूप के बारे में बताया गया। डा आरती पांडे ने सभी चिकित्सा शिक्षकों के सामने बदलाव की एक एक गतिविधियों को विस्तार से पेश किया।
 
           डा. प्रसेनजीत रावत ने चिकित्सा शिक्षकों को बदलाव के साथ नेतृत्व क्षमता का विकास किस तरह करना है। बदलाव के साथ सभी चिकित्सा शिक्षकों को अच्छा वक्ता के साथ सबके सहानुभूति का वातावरण विकसित करना है। इस दौरान यह भी बताया गया कि जीवन काल में स्वयं को नवीन चिकित्सा खोजो के साथ किस तरह जोडकर रखना है।
 
                                   डॉ. केशव कश्यप ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम में होेेने वाले परिवर्तन की जानकारी दी।  कार्यशाला के आयोजन का उद्देश्य बताया। कार्यशाला में चिकित्सकों में शिक्षा को डोमेन और विभिन्न नैदानिक क्षमताओं के स्तरों में विभाजन के बारे में बताया गया। साथ ही लोगों के सवालों का जवाब भी दिया गया है। 
 
               डॉ. अमित ठाकुर ने सभी चिकित्सा शिक्षकों को पठन पाठन की नई तकनिकी की जानकारी से अवगत कराया्। डा शिक्षा जांगड़े ने चिकित्सा शिक्षा में छोटे समूहों में अध्ययन और अध्यापन पर फोकस रहने की बात कही। कार्यशाला के तीसरे दिन चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता के महत्व पर प्रकाश डाला। आचरण व्यवहार कार्यकुशलता के बारे में जानकारी दी गई। कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि रोगियों और चिकित्सकों के बीच तकरार को रोकने क्या कुछ किया जा सकता है।
 
           कार्यशाला के अंत में एससीबी चिकित्सा महाविद्यालय कटक से एनएमसी ऑब्जर्वर डॉ अमरेंद्र नायक ने फीडबैक पेश किया। उन्होने प्रशिक्षण के दौरान किए गए प्रयासों की जमकर तारीफ की ।

   

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