मेरा बिलासपुर

2081 तक 15 जनवरी को मनाया जाएगा संक्राति पर्व..विद्वानों ने बताया..पढ़ें…72 साल में क्यों बदल जाती है संक्राति की तारीख

सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का दिन "मकर संक्रांति"

बिलासपुर—देश में धूम धाम से मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। सूर्य अब दक्षिण से उत्तर की तरफ प्रस्थान करें। यानि भगवान सूर्य अब धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही वातावरण में परिवर्तन शुरू हो जाएगा। जैसा की जानकारी है कि भी त्योहार या तिथि में प्रत्येक साल परिवर्तन देखने को मिलता है। लेकिन एक मात्र मकर संक्रांति का पर्व है जो एक निर्धारित तारीख को ही आता है।  पुराण और विद्वानों की माने तो एक निश्चित समय यानि वर्ष बाद मकर संक्रांति के दिवस में भी परिवर्तन देखने को मिलता है। परिवर्तन भविष्य में भी देखने को मिला।
संक्रांति काल का अर्थ..एक से दुसरे में जाने या प्रवेश से है…अंग्रेजी में इसे ट्रांजिशन भी कहा जाता है। ज्यादातर लोग हमेशा से 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाते आ रहे हैं। इसलिए ऐसे लोगों के लिए इस बार मकर संक्रांति का 15 जनवरी को होना कुछ बिचित्र लगेगा। लेकिन अब यह 2081 तक 15 जनवरी को ही संक्रांति मनाया जाएगा।
जैसा कि हम सब जानते हैं कि- सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (संक्रमण) का दिन “मकर संक्रांति” के रूप में जाना जाता है।  ज्योतिषविदों के अनुसार प्रतिवर्ष इस संक्रमण में 20 मिनट का विलंब होता जाता है।  इस प्रकार तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का हो जाता है। 72 वर्षो में यह फर्क पूरे 24 घंटे का हो जाता है।
शाम 4 बजे के बाद संध्याकाल माना जाता है । भारतीय ज्योतिष विज्ञान के अनुसार संध्या काल के बाद सूर्य से सम्बंधित कोई भी गणना उस दिन न कर दूसरे यानि अगले दिन से होती है। इस हिसाब से वास्तव में मकर संक्रांति 2008 से ही 15 जनवरी को हो गई थी। लेकिन सूर्यास्त नही होने के कारण 14 जनवरी को ही मानते आ रहे थे।
2023 में संक्रांति का समय 14 जनवरी की शाम को 9.35 का है। यानि सूर्यास्त हो चुका है… इसलिए  15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। वैसे तो 2008 से 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को हो चुकी है।  2081 से मकर संक्रांति 16 जनवरी को होगी। इसके बाद भी कुछ लोग कुछ बर्ष तक 15 जनवरी को मनाते रहेंगे।
1935 से 2008 तक मकर संक्रांति 14 जनवरी को रही है। 1935 से पहले 72 साल तक यह 13 जनवरी को रही होगी। इन बातों को जानकार हमें पूर्वजों पर गर्व करना चाहिए कि जब दुनिया भर के लोग पशुओं की तरह केवल खाने और बच्चे पैदा करने का काम जानते थे तब हमारे पूर्वज ब्रह्माण्ड को पढ़ रहे थे।

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