शिक्षा विभाग ने दिखाया बड़ा दिल..फर्जी दस्तावेज पर…बना दिया आत्मानन्द स्कूल का व्याख्याता.. कलेक्टर, जेडी तक पहुंची भ्रष्टाचार की शिकायत

रायगढ़—- पिछले दिनों रायगढ़ में आत्मानन्द अंग्रेजी माध्यम स्कूल में संविदा भर्ती को लेकर साक्षात्कार का आयोजन किया गया। साक्षात्कार के दौरान जमकर धांधली का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जानबूझकर पर्जी दस्तावेज के आधार पर कुछ चहेतों के बीच व्याख्याता पद को बांटा है। नियुक्ति आदेश भी जारी कर दिया है। मामले की शिकायत कलेक्टर,सचिव और संयुक्त संचालक संभाग शिक्षा विभाग तक पहुंच गयी है।   
                   जानकारी देते चलें कि मुख्यमंत्री की ड्रीम योजना आत्मानन्द स्कूलों के लिए इन दिनों संविदा भर्ती अभियान चलाया जा रहा है। कमोबेश सभी जगह साक्षात्कार से लेकर  सारी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी है। दस्तावेज वेरीफिकेशन के बाद चयनित शिक्षकों ने काम धाम भी संभाल लिया है।   
                    रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग में भर्ती के दौरान भारी फर्जीवाड़ा के साथ भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज के सहारे एक महिला अभ्यर्थी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मिली भगत कर  कोंडातराई स्कूल में नौकरी भी ज्वाइन कर दिया है।
फर्जी दस्तावेज से मिली नौकरी
                 बताते चलें कि 3 जुलाई को जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में स्थानीय आत्मानन्द नटवर स्कूल में संविदा शिक्षकों के लिए साक्षात्कार का आयोजन किया गया। सामान्य विज्ञान शिक्षक पद के लिए फिरदौस बानों ने भी साक्षात्कार दिया। सूची प्रकाशन के बाद 30 जुलाई को मूल द्स्तावेजों को सामने रखकर फोटोकाफी का वेरीफिकेशन किया गया। 4 जुलाई को चयनित सभी शिक्षकों ने निर्धारित स्कूल पहुंचकर अपना काम धाम शुरू भी कर दिया है। 
                          मजेदार बात है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान फिरदौस के दस्तावेजों की भी जांच हुई। जबकि महिला के पास मूल द्स्तावेज भी नहीं था। बावजूद इसके महिला की तरफ से पेश किए गए फर्जी दस्तावेजों पर ओके का मुहर लगाकर ज्वाइन कराया गया।
अधिकारियों की मिली भगत
                         बताया जा रहा है कि तथाकथित महिला शिक्षक का एमए का शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी है। सूत्र ने बताया कि महिला ने मोटी रकम देकर एम ए का दस्तावेज बनवाया है। सूत्र ने बताया कि महिला अभ्यर्थी ने मूल दस्तावेज ना तो साक्षात्कार के दौरान पेश किया और ना ही वेरिफिकेशन कराया।  ज्वाइन करते समय भी जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कृपा से मूल दस्तावेज की जरूरत नहीं पड़ी।
 अंक सूची 2006 की विश्वविद्यालय 2008 में बना
              शिकायतकर्ता के अनुसार महिला अभ्यर्थी ने साल 2006 में बिलासपुर की किसी संस्थान से एमए किया है। यह संस्थान सरगुजा विश्वविद्यालय से जुड़ा है। यह जानते हुए भी कि सरगुजा विश्वविद्यालय साल 2008 में बना है। लेकिन महिला अभ्यर्थी ने विश्वविद्यालय बनने से पहले ही विश्वविद्यालय का अंकसूची हासिल कर लिया है।जबकि अंकसूची का विश्वविद्यालय में पंजीयन भी नहीं है। सूत्रों के अनुसार महिला अभ्यर्थी ने अंकसूची बनवाने में लाखों रूपये खर्च हुए है। बाकी कृपा जिला शिक्षा विभाग बरसाया है।
 गाइड लाइन का नहीं किया गया पालन 
            महिला अभ्यर्थी के प्रति जिला शिक्षा विभाग की साक्षात्कार टीम ने जमकर पक्ष लिया। महिला अभ्यर्थी के लिए अंग्रेजी पात्रता को ना कवेल दरकिनार किया गया..बल्कि कई प्रतिभावन अभ्यर्थियों को षड़यंत्र कर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।जिला शिक्षा विभाग की मिली भगत     
               सूत्र ने बताया कि आत्मानन्द स्कूल के लिए साक्षात्कार के दौरान जमकर धांधली हुई है। करीब आधा दर्जन अपात्र लोगों को पात्र बनाकर चयन किया गया है। इसमें  जिला शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों की अहम भूमिका है।

कलेक्टर,सचिव.संयुक्त संचालक से शिकायत

              बहरहाल फिरदौस बानों के खिलाफ कलेक्टर रायगढ़, प्रमुख शिक्षा सचिव और संयुक्त संचालक संभाग शिक्षा विभाग को लिखित शिकायत हुई है। मामले को जहां कलेक्टर रायगढ़ ने गंभीरता लेने को कहा है वही संयुक्त संचालक आरएन हीराधर ने जांच कराने की बात कही है। 

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