बदहाली की हद…कोरोना से जूझते हुए दम तोड़ने वाले चेतन प्रसाद को कोरोना संक्रमित नर्स ने लगाया था टीका….? जो ख़ुद भी कोरोना से जंग हार गई…

बिलासपुर। कोरोना की दूसरी लहर के आने के बाद आने के बाद संक्रमण से प्रभावित हो रहे लोग मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था के भरोसे हैं और इस व्यवस्था में लगे लोग भी बार-बार दावा कर रहे हैं कि बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा रही है। लेकिन इस व्यवस्था की कई खामियां ही जानलेवा साबित हो रही हैं। यह जानकर किसी को भी हैरत होगी की 2 दिन पहले कोरोना संक्रमण की वजह से स्वर्गवासी हुए जांजगीर जिले के चेतन प्रसाद तिवारी ने बुखार आने के 4 दिन पहले ही कोविड का टीका लगवाया था चौंकाने वाली बात यह है कि वैक्सीनेशन सेंटर में जिस नर्स ने उन्हें टीका लगाया था ,वह खुद भी कोरोना से संक्रमित थी और इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई। अगर जांच पड़ताल होगी तो इसका सच सामने आएगा। लेकिन कोरोना की भयानक अनिश्चितता के बीच कोई भी आदमी सहज- सरल तरीके से समझ सकता है कि चेतन प्रसाद तिवारी टीका लगाने वाली नर्स से ही संक्रमित हुए होंगे।

यह खबर 2 दिन पहले लोगों ने पढ़ी है कि जांजगीर जिले के जर्वें गांव में रहने वाले चेतन प्रसाद तिवारी का पिछले गुरुवार की सुबह कोरोना से निधन हो गया। चेतन प्रसाद तिवारी पत्रकार साथी चंद्र कुमार दुबे के बहनोई थे। तेज बुखार आने के बाद उन्हें जांजगीर अस्पताल में पहुंचाया गया और वहां इलाज चल रहा था। हालत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी थी। वैसे तो कोविड- संक्रमित किसी भी व्यक्ति के बारे में खबर यही मिल रही है कि उसे कम से कम चार -पांच अस्पतालों में भटकने के बाद ही कोई बिस्तर मिल पाता है। कुछ ऐसे ही हालात का सामना चेतन प्रसाद तिवारी के परिवार को भी करना पड़ा था। उनके करीबी रिश्तेदार चंद्र कुमार दुबे पत्रकार होने के बावजूद अपने बहनोई के लिए वेंटिलेटर बेड का इंतजाम बिलासपुर में नहीं कर सके थे । इसके लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ा था और व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे तमाम लोगों के सामने गिड़गिड़ाना भी पड़ा था। किसी तरह बुधवार को उन्हें भरोसा दिलाया गया कि सिम्स अस्पताल में एक वेंटिलेटर बेड का इंतजाम हो सकता है। यह खबर मिलने के बाद उन्होंने चेतन प्रसाद तिवारी को बिलासपुर लाने का प्रयास किया। बदहाली का आलम देखिए कि जांजगीर से बिलासपुर लाने के लिए उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट वाला एंबुलेंस भी नहीं मिल सका। किसी तरह बिलासपुर से एंबुलेंस भेजा गया और वह शाम तक यहां पहुंच सके। विडंबना तो यह है कि सिम्स पहुंचते ही बताया गया कि जो बेड उनके लिए रखा गया था उसका वेंटिलेटर ही बिगड़ गया है। काफी समय तक ऑक्सीजन सपोर्ट में रखने के बाद जब उनकी हालत नहीं सुधरी तो चेतन प्रसाद तिवारी को देर रात एक प्राइवेट अस्पताल में पहुंचाया गया । जहां तड़पते हुए उन्होंने सुबह-सुबह दम तोड़ दिया।

इस घटनाक्रम के बाद जो जानकारी सामने आई है वह दिल दहला देने वाली है। चंद्र कुमार दुबे ने बताया कि चेतन प्रसाद तिवारी ने 11 अप्रैल को टीकाकरण केंद्र जर्वे में कोविड का पहला टीका लगवाया था। उसके 4 दिन बाद 16 अप्रैल को उन्हें बुखार आया और फिर टेस्ट कराने पर कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। विडंबना यह है कि जर्वे टीकाकरण केंद्र में जिस नर्स ने उन्हें टीका लगाया था, वह खुद भी कोरोना पॉजिटिव थी। जांजगीर जिले में बलौदा ब्लाक के देवरहा पिसौद गांव में रहने वाली नर्स का बलौदा के महुदा कोविड अस्पताल में इलाज चल रहा था। जहां उनका इलाज के दौरान निधन हो गया।कोविड महामारी के इस भयानक दौर में व्यवस्था कितनी दुरुस्त है इसकी मिसाल पूरे घटनाक्रम में देखी जा सकती है। किसी भी मरीज को हर जगह दिक्कतों का तो सामना करना ही पड़ रहा है । व्यवस्था की बदहाली के कारण धोखे पर धोखा भी मिल रहा है और भरोसा भी टूटता जा रहा है।

हालांकि इस तरह के मामले में वास्तविकता क्या है ,यह तभी सामने आ सकेगा जब सही तरीके से इसकी जांच पड़ताल होगी। यह कहना कठिन है कि इस बारे में सच्चाई का पता लगाकर दोबारा ऐसी घटना रोकने के लिए किसी तरह का क़दम उठाया जा सकेगा । लेकिन अगर चेतन प्रसाद तिवारी के दुखद निधन के बाद सामने आ रहे तथ्य सही हैं तो इसे भी त्रासदी मानने के अलावा और कुछ न किया जा सकता है और ना कहा जा सकता है।।

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