अधिकारियों की कार्रवाई पर रेत चोरों का सूचना तंत्र भारी..सफेदपोशों का भी मिल रहा आशीर्वाद ..शासन का सहयोग करना ग्रामीण को पड़ा भारी

बिलासपुर— रेत माफियों की दादागिरी और अरपा में रेत का अवैध उत्खनन की गूंज पूरे प्रदेश में है। रेतमाफियों से अब अधिकारी ही नहीं बल्कि ग्रामीण भी त्रस्त हैं। बावजूद इसके नेताओं की सह पर रेत का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से चल रहा है। सूत्रों की माने तो रेत चोरों ने गली से लेकर चौक चौराहों तक अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए मुखबीर बैठा दिया है। जब भी अधिकारी रेत चोरों के खिलाफ मुहिम में निकलते हैं। इसके पहले   पहले इसकी जानकारी रेत चोरों तक पहुंच जाती है। और नेताओं के दबाव में अधिकारियों को बैरंग वापस होने को मजबूर होना पड़ता है।

              खनिज विभाग समेत संयुक्त टीम का अरपा में रेत का अवैध उत्खनन के खिलाफ अभियान बदस्तुर जारी है। बावजूद इसके रेत के अवैध कारोबार पर किसी प्रकार का अंकुश होते दिखाई नहीं दे रहा है। कार्रवाई के बाद रेत की चोरी शुरू हो जाती है। रेत माफियों की इस हरकत से  खनिज विभाग ही बल्कि जिला प्रशासन भी त्रस्त है। 

             शिकायत के बाद रविवार को खनिज विभाग ने दो ट्रैक्टर को बरामद किया। सोमवार खनिज टीम ने अल सुबह घूटकू और निरतु से रेत का अवैध परिवहन करते चार ट्रैक्टर जब्त किया। सोमवार को ही राजस्व,पुलिस,खनिज विभाग की टीम ने सेन्दरी से 8 ट्रैक्टर को रेत ढोते पकड़ा है। सभी ट्रैक्टर को थाने के हवाले किया गया है। बावजूद इसके रेत चोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

हो रही मुखबीरी

         सूत्रों की माने तो जब भी अधिकारी और जिला प्रशासन की टीम कार्रवाई के लिेए निकलती है। इसके पहले अधिकारियों की सारी गतिविधियां रेत चोरों और माफियों तक पहुंच जाती है। मौके पर जब अधिकारी पहुंचते है तो जेसीबी से लेकर ट्रैक्टर और हाइवा सब गायब हो जाते हैं। इतना ही नहीं अधिकारी कहां और किस घाट की तरफ जा रहा है। उनकी रेकी वाहन से की जाती है। इसकी सूचना बराबर ऊपर तक पहुंचती है। कार्रवाई करने वाली टीम के हाथ फिर गिने चुने प्रकरण ही हाथ लगते हैं।

सफेदफोशों का बढ़ता दबाव

              सूत्र ने बताया कि कार्रवाई होने के पहले ही अधिकारियों का फोन घनघनाना शुरू हो जाता है। कोई कार्रवाई नहीं करने कादबाव बनाता है। तो कोई ट्रैक्टर और हाइवा छोड़ने और चालान नहीं काटने की बात कहता है। बात नहीं माने जाने पर ट्रांसफर और संस्पेंड किए जाने की धमकी भी दी जाती है। जानकारी यह भी है कि सफेदफोशों के दबाव में अधिकारियों को या तो चालान निरस्त करना पड़ता है। या फिर जेब से जुर्माना देने को मजबूर होना पड़ता है। खबर है कि शहर के कुछ चार पांच नेताओं ने अरपा पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। जब भी अधिकारी कार्रवाई करता है। उस पर गालियों की बौछार शुरू हो जाती है।

 कहां कहा हो रहा अवैध उत्खनन और रेत परिवहन

लमेर से लेकर दो मुहानी तक घोषित और अघोषित घाट पर रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। घुटकू, कोनी,सेन्दरी,दयालबन्द, शनिचरी, बूटापारा, निरतु में रेत का सर्वाधिक उत्खनन किया जा रहा है। मजेदार है कि सभी जगह रसूख वाले सफेदफोशों का रेत चोरों का भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है। इस बात से प्रशासन के आलाधिकारी भली भांति अवगत है। बावजूद इसके धमकियों ने अधिकारियों का हांथ बांध दिया है। कल तक जो अधिकारी बिलासपुर में नौकरी करना चाहते थे…आज उन्ही अधिकारियों ने भागने का पूरा मन बना लिया है।

ग्रामीणों ने भी किया असहयोग का एलान

                  बताते चलें कि निरतु और घुटकू में अवैध उत्खनन और परिवहन की जानकारी के बाद प्रशासन की टीम ने शुक्रवार शनिवार को ताबड़तोड़ कार्रवाई। खनिज विभाग की टीम को देखकर रेत चोर अरपा में ही ट्रैक्टर छोड़कर फरार हो गए। मान मनौव्वल के बाद एक ग्रामीण ट्रैक्टर को अरपा से निकालने के लिए तैयार हुआ।  दूसरे दिन जानकारी मिली कि सहयोग करने वाले के साथ राजा माथुर को रेत चोरों ने जमकर पीटा। मारमार कर चेहरा फूला दिया। 

                दूसरे दिन जब कार्रवाई के बाद जब प्रशासन ने ट्रैक्टर निकालने का सहयोग मांगा तो राजा माथुर ने साफ इंकार कर दिया। राजा ने बताया कि पिछली बार कुछ नहीं किया तो रेत माफियों ने उसका यह हाल कर दिया। यदि ट्रैक्टर को बाहर निकाला तो उसकी जान भी चली जाएगी।

 खतरे में अधिकारी और कर्मचारी      

               कार्रवाई में पुलिस का सहयोग नहीं मिलने से कार्रवाई करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर खतरा बढ़ गया है। अभी फिलहाल इनकी रेकी हो रही है। वह दिन दूर नहीं जब धमकाने और चमकाने वाले सफेदफोश और रेत माफिया जान का दुश्मन बन जाए। यदि कभी दतिया भिण्ड मुरैना और अकोला जैसा हासदा हो जाए तो कोई आश्चर्य की बात नही होगी। फिलहाल प्रशासन के अधिकारी सकते में है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने दिया आंदोलन का संकेत

           रेत के अवैध परिवहन वाले वाहन की चपेट में आने से बिरकोना में एक नाबालिग की मौत हो गयी थी। इसके बाद पूरा शहर आक्रोशित हो गया था। तत्कालीन समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने आंदोलन का एलान किया। इसके बाद रेत चोर सकते में आ गए। रेत का अवैध कारोबार कुछ दिनों तक शांत रहा। अब एक बार फिर इसी तरह के एलान का इंतजार है। ताकि सत्ता की आड़ में तीन तेरह करने वाले सफेदफोशों और माफियों के मनसूबों पर लगाम लगाया जा सके।

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