VIDEO-सहायक शिक्षकों के आंदोलन की इनसाइड स्टोरी: रायपुर में जुटे शिक्षकों के आक्रोश की प्रमुख वजह है वेतन विसंगति

रायपुर।आज शिक्षक दिवस है। आज ही रायपुर में वर्ग तीन के सहायक शिक्षको की वेतन विसंगति की मांग को लेकर प्रदेश भर के सहायक शिक्षक छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के बैनर तले रायपुर में एक दिवसीय धरना, पदयात्रा रैली और मुख्यमंत्री आवास का घेराव होने वाला था। जो संघ के पदाधिकारियों की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,शिक्षा मंत्री, प्रमुख शिक्षा सचिव की मुलाकात के बाद टल गया था। फेडरेशन के शीर्ष नेतृत्व ने मुलाकात को सकारात्मक बताते हुए मुख्यमंत्री पर भरोसा करते हुए आंदोलन स्थगित कर दिया ।

जिसका परिणाम यह हुआ कि हजारों की संख्या में आये शिक्षक और जिले के शिक्षक नेताओ ने संगठन की मर्जी के खिलाफ जाकर मुख्यमंत्री निवास जाने का फैसला किया जिसे सप्रे शाला के पास पुलिस ने रोक दिया । जहाँ जमकर सरकार के खिलाफ नारे बाजी हुई । शिक्षको ने संघ प्रमुखों के निर्णय के खिलाफ जाकर फेडरेशन जिंदाबाद के नारे लगा कर सन्देश दिया कि हम ही संगठन है। शिक्षकों का आक्रोश इतना था कि छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के जिला स्तर के कई नेताओं ने फेडरेशन के प्रमुख पदाधिकारियों को ही बर्खास्त करने का फरमान सुना दिया।

आज हुए इस नेतृत्व हीन आंदोलन की इन साइड स्टोरी यह है कि
रायपुर में एकत्र हुए सहायक शिक्षको के आक्रोश की वजह वेतन विसंगति है।आम पंचायत कर्मी अफसरों के बनाये हुए नियम कायदों से सरकारी कर्मचारी तो बन गया लेकिन यह उपलब्धि कम विसंगतियों दलदल अधिक बताया जाता है। इस शासकीय करण में बहुत सी खामिया रह गई है। जिसे दूर करने के लिए शिक्षक संगठन सरकार से संवाद और मांगों के ज्ञापन से सड़क तक का रास्ता अपनाने को मजबूर होते है इसी को लेकर छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन ने शिक्षको की मांगों को लेकर सरकार पर दवाब बनाने के लिए किये आंदोलन में हर शिक्षक आंदोलन की।तरह इस बार फिर खुद के जाल में फंस गए।

शह और मात के खिलाड़ी अफसरों ने मौजूदा राजनीतिक हालात पर मोर्चा सम्भालते हुए प्रदेश भर से रायपुर में आंदोलन में हिस्सा लेने वाले शिक्षको को आपस मे ही अस्थाई रूप में उलझा कर बड़ी चतुराई से छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के बैनर तले रायपुर में एक दिवसीय धरना, पदयात्रा रैली और मुख्यमंत्री आवास का घेराव तीन महीने के लिए टालने का प्रयास किया जिमसें बहुत हद तक कामयाब भी रहे। हालांकि रैली निकाली जरूर पर इसमे प्रदेश का नेतृत्व नही था।

अधिकारियों ने आंदोलन के शुरू होने के 15 घंटे पहले ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से फेडरेशन के प्रमुख पदाधिकारियों को ज्ञापन सहित मिलवा कर एक कमेटी बना दी है। जो उनकी समस्याओं का निराकरण के लिए प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन की मांगों का परीक्षण कर तीन माह में प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी।

यह स्थिति प्रदेश के शिक्षको के साथ पहली दफा नही हुई है ऐसे कई मौके आ चुके है। जिसकी पीड़ा शिक्षक संघठन झेल चुके है। जिसका खामियाजा संगठन ने टूट के रूप में चुकाया है। फेडरेशन भी इसी राह में जाता दिखाई दे रहा है। इतिहास गवाह रहा है कि
अफसरों की गठित कमेटियों के जाल ने शिक्षक संघो और सत्ता पक्ष को ऐसा उलझाया कि पूर्व की सरकार ने शिक्षा कर्मियों के संविलियन का ऐतिहासिक फैसला लिया वह भी आधा अधूरा जिसे बाद में नई सरकार को भी पूरा करने में पसीना रहा है।

चुनावी साल के पूर्व सरकार के कार्यकाल में जबरा टाइप के शिक्षक आंदोलन में शून्य में हड़ताल वापस लेने के बाद मिले आश्वासन और कमेटियों वादे के जाल में फंस कर प्रदेश के शिक्षको की 2018 से पहले की कार्य अवधि की सेवा गणना शून्य हो गई । शिक्षक नेताओ का कहना है कि वर्ग तीन की वेतन विसंगति संविलयन के पूर्व इसी सेवा गणना को शून्य करने का एक परिणम है। यदि पूर्व की सेवा अवधि मानी जाती तो अधिकांश सहायक शिक्षक 10 साल सेवा पूर्ण कर चुके है जिन्हें वेतन वृद्धि के लाभ से उच्चतर क्रमोन्नत वेतन मिलता ।

शिक्षक दिवस के दिन प्रदेश भर से आये हजारों शिक्षक पूर्व कार्यक्रम के तहत जुट ही गए फेडरेशन के प्रमुख पदाधिकारियों शाम को हुए निर्णय पर शिक्षको को संतुष्ट नही करा पाए फेडरेशन प्रमुखों की अनुपस्थिति में भीड़ का हिस्सा बन कर सरकार और संघ को जम कर कोसा वही कुछ शिक्षक नेता भीड़ को देख कर नई रणनीति बनाने में लगे रहे है। इन सब मे किरकिरी सरकार की जरूर हुई है समय रहते यह सब सुलझा लिया जाता तो आज शायद प्रदेश भर से शिक्षक रायपुर में नही जुटते।

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