कही-सुनी:बस्तर में भाजपा नेताओं की हत्या के मायने

Shri Mi
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(रवि भोई)बस्तर में नक्सलियों ने एक महीने के भीतर भाजपा के तीन जमीनी नेताओं की हत्या कर दी। इससे साफ़ लग रहा है कि नक्सली इलाके में भाजपा की पहुंच बढ़ रही है। भाजपा के छोटे-बड़े नेता बस्तर पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। धर्मांन्तरण और दूसरे मुद्दों को लेकर बस्तर में पूर्व मंत्री केदार कश्यप और दूसरे नेता लगातार सक्रिय हैं, वहीं अजय जामवाल भी कई बार दौरा कर चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव और नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने भी बस्तर जाकर कार्यकर्ताओं में जोश भरा है। विधानसभा चुनाव के करीब नौ महीने पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का जगदलपुर पहुंचना मायने रखता है।

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जेपी नड्डा 11 फ़रवरी को नारायणपुर जाकर नक्सली हिंसा के शिकार सागर साहू के परिजनों और पार्टीजनों से मिले। राष्ट्रीय अध्यक्ष का नक्सल इलाके में जाना संकेत देता है कि पार्टी 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी से गंभीर है। बस्तर में भाजपा की स्थिति 2018 जैसी नहीं है। अब राज्य में सरकार कांग्रेस की है। बस्तर में भाजपा करो या मरो की रणनीति पर आगे बढ़ रही है, ऐसे में कांग्रेस नेताओं को भी कमर कसनी पड़ेगी।

कहीं पे निगाहें, कहीं पर निशाना

कहा जा रहा है प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री अमरजीत चावला को नोटिस के बहाने पार्टी के एक खेमे ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम पर निशाना साधा है।अमरजीत चावला को मोहन मरकाम का आंख-कान माना जाता है। पीसीसी दफ्तर राजीव भवन में भवन निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष सन्नी अग्रवाल से विवाद के बाद अमरजीत चावला चर्चा में आए। इस घटना के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सन्नी अग्रवाल को पार्टी से सस्पेंड कर दिया और अमरजीत चावला को अपने से जोड़ लिया। कहते हैं मोहन मरकाम ने ही अमरजीत चावला को महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी सौंपी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मोहन मरकाम की मुलाक़ात के दौरान भी कई बार अमरजीत चावला नजर आए।

माना जा रहा है कि पार्टी के एक खेमे को यह उड़ान रास नहीं आया और मौका मिलते ही तीर चला दिया। खबर है कि मोहन मरकाम विरोधी खेमा सन्नी अग्रवाल के मामले में पीसीसी अध्यक्ष के रुख से सहमत नहीं था। अमरजीत चावला पर एक्शन से कुछ कांग्रेसी “कहीं पे निगाहें, कहीं पर निशाना” गाना गुनगुना रहे हैं।

नीरज बंसोड़ की ऊंची छलांग

छत्तीसगढ़ कैडर के 2008 बैच के आईएएस नीरज बंसोड़ के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्राइवेट सेक्रेटरी बनने से कुछ आईएएस और भाजपा नेता बल्ले-बल्ले हैं। अमित शाह से मिलने का माध्यम नीरज बंसोड़ ही रहेंगे। कुछ लोग नीरज बंसोड़ के वहां तक पहुंचने का लिंक तलाश रहे हैं। कहा जा रहा है आरएसएस के कुछ लोगों की सिफारिश पर नीरज बंसोड़ का चयन अमित शाह के प्राइवेट सेक्रेटरी के तौर पर हुआ है। नीरज बंसोड़ मूलतः महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। वे सुकमा, कवर्धा और जांजगीर-चांपा के कलेक्टर, बिलासपुर जिला पंचायत के सीईओ रह चुके हैं। वे संचालक स्वास्थ्य के पद से भारत सरकार में पिछले साल ही प्रतिनियुक्ति पर गए थे। अमित शाह के पीएस बनने को नीरज बंसोड़ के लिए ऊंची छलांग मानी जा रही है। माना जा रहा है कि नीरज बंसोड़ के अमित शाह के दफ्तर में पोस्टिंग से भारत सरकार उनसे छत्तीसगढ़ के बारे में और बहुत कुछ जानकारी ले सकती है।

आईपीएस पर ख़ुफ़िया तंत्र की निगाह

कहते हैं छत्तीसगढ़ के एक सीनियर आईपीएस पर केंद्रीय ख़ुफ़िया तंत्र की निगाह टिकी है। इस आईपीएस के बारे में पिछले कुछ महीनों के भीतर दिल्ली से लेकर रायपुर तक ख़ुफ़िया जानकारी जुटाई गई। इसमें राज्य सरकार से रिश्ते, उनके फैसले और राज्य में कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण में उनकी भूमिका का आंकलन किया गया। कहा जा रहा है आईपीएस के बारे में ख़ुफ़िया तंत्र को कोई खास जानकारी नहीं मिल पाई। इसके कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया , लेकिन ख़ुफ़िया तंत्र आईपीएस पर लगातार वाच किए हुए है।

ईडी के टारगेट में कुछ और आईपीएस

कहते हैं ईडी के निशाने पर आए कुछ आईपीएस अफसरों को राज्य सरकार ने प्राइम पोस्टिंग से हटाकर लूप लाइन में भेज दिया है। कहा जा रहा है अभी 3 -4 आईपीएस ईडी के टारगेट में सीधे आ गए हैं। आने वाले समय में कुछ और आईपीएस अफसरों का नाम ईडी की सूची में दर्ज हो सकता है। ईडी राज्य में अफसर-नेता और सफेदपोश अपराधियों के गठजोड़ की जाँच में लगा है। देखते हैं आगे क्या होता है।

दावेदारों की होड़

विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे कांग्रेस के भीतर दावेदारों की होड़ लगती जा रही है। कहते हैं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के एक करीबी नेता भाटापारा से दावेदारी कर रहे हैं, वहीँ पिछली बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े नेता भी ताल ठोंक रहे हैं। बलौदाबाजार सीट के लिए भी कई दावेदार सामने आने लगे हैं। टिकट के इच्छुक कांग्रेस नेता दौरे कर अपनी जमीन तैयार करने लग गए हैं। कहते हैं जिन विधानसभा सीटों में कांग्रेस के विधायक नहीं हैं, वहां दावेदारों की भीड़ ज्यादा है। इसमें अकलतरा, धमतरी से लेकर जांजगीर तक शामिल हैं। समय बताएगा किस दावेदार की लाटरी लगती है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार और पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक हैं। )
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पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर
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