बैसवारी फाग की गूँज में गुम हो गई ढोलक की आवाज़… जब दो साल बाद होली मिलन समारोह में इकट्ठा हुआ कान्यकुब़्ज समाज

आजु गिरिजापति ख्यालै होरी..

भस्म अंग शिरि गंग बिराजै, जटा मुकुट लट फेरी।

बाएं अंग जग जननि भवानी, नचै जो गिनी घेरी।

…..बैसवारी फ़ाग की ये लाइनें जब बिलासपुर के इमली पारा रोड पर बने कान्यकुब्ज भवन में गूंज रही थी….. तब वहां बज रहे दो बड़े – बड़े ढोल की आवाज भी फाग गाने वालों की आवाज से दब गई थी….। ढोलक का स्वर लोगों के स्वर की गूंज के आगे धीमा पड़ गया था…. और पूरे हाल में सिर्फ फाग गाने वालों की आवाज ही गूंज रही थी….। रविवार की शाम बिलासपुर के कान्यकुब़्ज़ भवन में होली मिलन के दौरान  यह नजारा इस  ओर इशारा कर रहा था कि सामूहिक आवाज के आगे किसी भी वाद्य यंत्र की गूंज फीकी पड़ सकती है….। और कोई भी  सामाज़िक संगठन सामूहिकता का सबसे उदाहरण माने जाते हैं।

दो  साल कोरोना के दौर में गुजरे और सोशल डिस्टेंसिंग के कारण इस तरह के आयोजन नहीं हो सके थे। लेकिन नवीनीकरण के बाद नए ढंग से तैयार हुए  कान्यकुब्ज भवन में इस बार का आयोजन कुछ अलग था । होली मिलन के नाम पर एक जगह इकट्ठा हुए लोगों के चेहरे बता रहे थे कि उन्हे ऐसे आयोजन का कब़ से इंतज़ार था । हालात सामान्य होने के बाद ज़लसे में सक्रिय हिस्सेदारी निभाकर लोगों ने भी यह संदेश दे दिया कि ज़िंदगी पूरी तरह से पटरी पर आ गई है। अब मेलज़ोल का सिलसिला पहले की तरह ज़ारी रहेगा। यह इत्तफ़ाक की बात है कि यह मौक़ा होली के उस त्यौहार के बहाने सभी को मिला, ज़ो त्यौहार नई उमंग-नए जोश- नए सृज़न का संदेश देता है….।  इसी समय पतझड़ के बाद पेड़ की डालियों में नई कोपले लगती हैं…. और प्रकृति भी नए ऋंगार के साथ नया रूप लेकर सामने आती है…।

कान्यकुब़्ज़ समाज़ के होली मिलन समारोह में इसे कोई भी महसूस कर सक़ता था । जहाँ  पूरा हाल लोगों से खचाखच भरा था…. जिसमें बड़ी तादाद में महिलाएं भी शामिल थी। शुरुआत में समाज के लोगों ने बैसवारी फ़ाग प्रस्तुत किया। बैसवारी फाग का यह सिलसिला पिछले 100 साल से शहर में लगातार चल रहा है। कान्यकुब्ज नवयुवक समिति ने इसे जारी रखा है और बसंत पंचमी से लेकर होली तक घर-घर में इसका आयोजन होता है। 2 साल बाद जब लोग होली मिलन समारोह में शिरकत करने आए तो फ़ाग की स्वर लहरियों में डूबकर झूम उठे। अतिथि के रूप में आए बिलासपुर के विधायक शैलेश पाण्डेय भी अपने आपको रोक नहीं पाए और सभी के साथ बैठकर ढ़ोलक बजाते दिकाई दिए । खास बात यह भी रही की समाज की नई पीढ़ी ने भी इस सिलसिले को आगे बढ़ाने में अपनी सक्रिय हिस्सेदारी निभाई है और समाज के कई बच्चे बेहतरीन ढंग से ढोलक बजाने के साथ ही फाग गायन में भी सिद्धहस्त हो गए हैं। नई पीढ़ी के इन किशोर – नौजवानों ने भी अपना फाग गायन प्रस्तुत किया। नई पीढ़ी के इन बच्चों को कार्यक्रम के दौरान सम्मानित भी किया गया। इस मौक़े पर ख़परी ( पथरिया ) से आए समाज़ के लोगों ने भी बैसवारी फाग प्रस्तुत किया ।  

कान्यकुब्ज नवयुवक समिति लगातार समाज के लोगों को जोड़ने में लगी है और भवन का पुनर्निर्माण कर अपनी सक्रियता और समर्पण की मिसाल पेश की है। होली मिलन समारोह में शामिल हुए समाज के लोगों ने इसकी जमकर तारीफ भी की। होली मिलन समारोह में  अतिथि के रूप में अटल बिहारी बाजपेई विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति अरुण दिवाकर बाजपेई ,बिलासपुर के विधायक शैलेश पांडे पार्षद सुवर्णा शुक्ला और वरिष्ठ पत्रकार रूद्र अवस्थी शामिल हुए। अपने संबोधन में कुलपति प्रोफेसर अरुण दिवाकर बाजपेई ने समाज में शिक्षा के प्रसार के साथ ही नई पीढ़ी को शिक्षित और सक्षम बनाने के लिए सतत प्रयास का आह्वान किया। उन्होंने नई पीढ़ी को संस्कार देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की। बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे ने भी  समाज के योगदान को रेखांकित किय़ा । उन्होंने भरोसा दिलाया कि कान्यकुब्ज समाज भवन में लिफ्ट की व्यवस्था शीघ्र ही की जाएगी।

कार्यक्रम की शुरुआत में नवयुवक कान्यकुब्ज समिति के अध्यक्ष राम प्रसाद शुक्ला ने स्वागत भाषण दिया। सचिव अरविंद दीक्षित ने समिति की ओर से किए गए कार्यों का ब्यौरा पेश किया । उन्होंने खासतौर से कोरोना काल के दौरान जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए सभी के सहयोग से संचालित गतिविधियों की जानकारी दी ।पार्षद सुवर्णा शुक्ला ने भी कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को होली पर्व की शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम का संचालन गोपाल मिश्रा ने किया और कोषाध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने आभार व्यक्त किया। इस मौके पर समाज के वरिष्ठ जन का सम्मान किया गया। जिनमें गोविंद प्रसाद बाजपेई सहित कई बुजुर्ग दंपति शामिल थे। कार्यक्रम में पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश बाजपेयी, शैलेष बाज़पेयी, मनोज़ शुक्ला, प्रकाश तिवारी, अनिल तिवारी,  डॉ. राजीव अवस्थी, कृष्ण मुरारी पाण्डेय , रीतेश शुक़्ला, स्वप्निल शुक़्ला, सुनील शुक़्ला, सिद्धांशु मिश्रा, दिव्य प्रकाश दुबे, अशोक त्रिवेदी, रश्मि मिश्रा, गायत्री तिवारी आदि बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए ।

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