School पहुंचने में देर हुई तो सीधे सस्पेंड होंगे शिक्षक,BEO के फरमान के बाद मचा बवाल, फेडरेशन ने खोल दिया मोर्चा

जांजगीर।कोई भी कर्मचारी अगर शाला में विलंब से आता है तो उसे कारण बताओ नोटिस नही जारी किया जायेगा बल्कि उसका सीधे निलंबन कर दिया जायेगा और कठोर अनुशंसात्मक कार्यवाही भी की जाएगी । नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध एक आदेश जारी करके करके जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी ने कर्मचारी जगत में खलबली मचा दी है।जिसकी वजह से छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन ने आदेश जारी करने वाले विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

मामला जांजगीर चांपा जिले के नवागढ़ का है। विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक दिवस के दूसरे दिन अपने कार्यालय से एक आदेश जारी किया जिसमें उन्होंने ने सभी संकुल समन्वयकों और संकुल प्रभारियों को लिखा कि जिला कलेक्टर ने समय सीमा की बैठक में निर्देश दिए है कि कोई भी कर्मचारी अगर शाला में विलंब से आता है तो उसे कारण बताओ नोटिस नही जारी किया जायेगा बल्कि उसका सीधे निलंबन कर दिया जायेगा और कठोर अनुशंसात्मक कार्यवाही भी की जाएगी।

लेकिन यहाँ पर मामला कुछ ऐसा हो गया कि नवागढ़ के BEO ने जिला कलेक्टर के मौखिक आदेश की गलत व्याख्या करके पद का दुरुपयोग भी किया दिया है। इस वजह से जिले का विकास खंड पूरे प्रदेश में चर्चा में आ गए है।जिसके कारण शिक्षक नेताओ में रोष है। जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने बताया कि विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी ने जो आदेश शिक्षको के लिए जारी किया है। वह अंग्रेजी हुकूमत के दौर का किया होगा। भारत का कानून भारत की न्याय व्यवस्था किसी को भी एक तरफा निर्णय सुनाने या थोपने की आजादी नही देता है।

मनीष मिश्रा का कहना है कि यदि शिक्षक विलंब से आते है तो अधिकारियो को अधिकार है कि वे कर्मचारी का पक्ष सुनते हुए नियमानुसार कार्यवाही करे । लेकिन स्कूल देर से आने पर क्या सीधे निलंबन करना कानूनी रूप में सम्भव है ..? यदि नही है तो यह पद के दुरुपयोग का मामला बनता है। मामले को जिला प्रशासन के संज्ञान लाने के लिए जिला स्तर की टीम सक्रीय कर दिया गया है।

प्रदेश मीडिया प्रभारी राजू टंडन ने बताया कि छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के सभी पदाधिकारियों ने एक सुर में कहा है कि नवागढ़ विकासखंड के विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग किया है। जिला कलेक्टर के आदेश की गलत व्याख्या की है।इस लिए इस मामले की शिकायत प्रमुख स्कूल शिक्षा सचिव, शिक्षा सचिव ,डीपीआई सहित शिक्षा मंत्री से की जायेगी।जिसके लिए शिव मिश्रा, सुखनंदन यादव, अजय गुप्ता, सी.डी. भट् ,सिराज बक्स, बलराम यादव ,बसंत कौशिक ,कौशल अवस्थी, रंजीत बनर्जी ,अश्वनी कुर्रे विकास मानिकपुरी, हुलेश चन्द्राकर ,उमा पांडे आदित्य गौरव साहू , छोटे लाल साहू, चंद्र प्रकाश तिवारी, आदित्य गौरव साहू, राजकुमार यादव, खिलेश्वरी शांडिल्य ,शेषनाथ पांडे ,सुरेंद्र प्रजापति ,राजू लाल टंडन, मिलेश्वर देशमुख ,बसंत कुमार यादव,संजय प्रधान, राजाराम पटेल, मनोज अंबष्ट,शैलेश गुप्ता, बीपी मेश्राम, एलन साहू, यादवेंद्र गजेंद्र, दुर्गा वर्मा, राजकुमारी भगत, रीता भगत, गायत्री साहू, शांति उके ,जयंती उसेंडी, शकुंतला साहू राजू यादव नोहर चंद्रा राजेश प्रधान , बनमोती भोई तरुण वैष्णव ,सुमन प्रधान जलज थवाईत ,संतराम साहू ,आशा कोरी,इंदु यादव ,आशा पांडेय ,उत्तम बघेल ,गोवर्धन शारके ,छवि पटेल ,संजय प्रधान,अनीता दुबे , लक्ष्मी बघेल, बसंत कुमार यादव, योगेंद्र ठाकुर, केसरी पैकरा, सत्यनारायण यादव, नीलिमा कन्नौजे , भूपेश पाणीग्रही, अजय साहू, श्रीमती प्रभा साहू, दीप्ति बिसेन, सरोज वर्मा, गरिमा शर्मा, चमेली ध्रुव संकीर्तन नंद, हेमेंद्र चंद्रहास, राजवीर किरार, संत कुमार साहू, विनीता साहू,जयंती उसेंडी, पूर्णिमा पांडे सहित कई शिक्षको व संघ के नेताओ का एक मत और निर्णय के खिलाफ कड़ा विरोध है।

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