एकता में नज़र आयी गुटीय अंसतुलन की दरार.. छिटके छिटके नजर आए भाजपा के बड़े नेता.. संयुक्त बयान नहीं..दावा..सरकार को उखाड़ फेकेंगे

बिलासपुर— राज्य शासन के सामाजिक,गैर सामाजिक या फिर राजनैतिक कार्यक्रमों को लेकर जारी दिशा निर्देशों वाले आदेश के खिलाफ जिला भारतीय जनता पार्टी ने नेहरू चौक में विशाल धरना प्रदर्शन किया।  रैली के साथ सभी नेता कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने गिरफ्तारी देने कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने रवाना हुए। लेकिन पुलिस की चुस्त दुरूस्त व्यवस्था ने भाजपा नेताओं की भीड़ को थाम लिया। इस दौरान पुलिस और भाजपा नेताओं के बीच जमकर झूमाझटकी हुई। लेकिन भाजपा नेता बेरिकेट छूने में कामयाब नहीं रहे। यद्यपि संख्या बल में भाजपा नेताओं की संख्या हजारों में थी। लेकिन गिरफ्तारी को लेकर भाजपा के बड़े नेताओं के बीच एकमत नहीं दिखाई दिए। और एसडीएम ने निकाहनामा की तरह गिरफ्तारी के तत्काल रिहा किए जाने का मंत्र पढ़ा। 
 
               बहुत दिनो बाद भाजपा ने एक मुद्दा बनाया। और छत्तीसगढ़ प्रभारी डी.पुरन्देश्वरी और नितिन नवीन के दिशा निर्देश पर प्रदेश स्तर पर मुद्दा को लेकर जेल भरो आंदोलन का फैसला किया गया। अलग अलग जिलों को वरिष्ठ नेताओं को भीड़ जुटाने से लेकर टेन्ट तम्बू लगाने तक की जिम्मेदारी दी गयी। बिलासपुर में यह जिम्मेदारी नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल को सौंपा गया। 
    
                            निर्धारित शेड्यूल के अनुसार अलग अलग विधानसभा से नेताओं ने भीड़ जुटाने कोई कसर नहीं छोड़ा। जैसा की कयास लगाया जा रहा था कि नेहरू चौक में आयोजित प्रदर्शन में दस हजार के करीब भाजपा कार्यकर्ता दिखाई देंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं। बिलासपुर विधानसभा से सर्वाधिक भीड़ देखने को मिली। और फिर अन्य विधानसभा क्षेत्रों से हजार की तुलना में सैकड़ों में भीड़ देखने को मिला। मंच से नेताओं ने राज्य सरकार को बिना पानी पिए जमकर घेरा। धरम,अमर, बांधी  रजनीश सिंह समेत सभी नेताओं ने कहा कि भूपेश सरकार प्रदेश में आपातकाल की स्थिति पैदा करने जा रही है। लेकिन भाजपा दुबारा आपातकाल की स्थिति को पैदा नहीं देगी।ो
 
            मंच पर करीब दो घंटे से अधिक भाषणवाजी के दौरान सभी नेताओं ने एक दूसरे को कोट किया। लेकिन यह तारतम्य कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचने के साथ ही गुटीय अंसतुलन एकता पर भारी पडता नजर आया। बड़े नेताओं के बीच कुछ बातें हुई और एक के चाहने के बाद भी दूसरे और तीसरे नेता ने इशारों ही इशारों में वाटर केनन चलाने से पुलिस को रोक दिया।
 
          इतना ही नहीं जब एसडीएम ने गिरफ्तारी को लेकर चर्चा किया तो देखते ही देखते एक बड़े नेता समर्थकों ने गिरफ्तारी देने से ना केवल इंकार किया। बल्कि पूरी भीड़ बेरिकेट्स से छट गयी। और दूसरा नेता अलग थलग नजर आए। जबकि भीड़ में बेलतरा और मस्तूरी विधायक भीड़ से अपने आप को दूर कर लिया। हां इस दौरान जरूर तखतपुर छाया विधायक ने नेता प्रतिपक्ष के साथ जरूर खड़ी नजर आयी। लेकिन संयुक्त आंदोलन का अन्त तक संयुक्त बयान सामने नहीं आया।
            कुल मिलाकर इस दौरान काफी हद तक आंदोलन तो सफल नजर आया। लेकिन इन तमाम गतिविधियों से एकता की दीवार पर पड़ी दरार को भी लोगों ने देखा। अब देखने वाली बात होगी कि इस दरार को डी.पुरेंश्वरी और नीतिन नवीन किस भरते हैं। समीक्षकों की माने दरार को भरना है तो मुश्किल लेकिन यदि फेवीक्विक जैसा कुछ हुआ तो जरूर कुछ संभव है।

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