विधानसभा चुनाव से पहले BJP में बड़े उलटफेर के संकेत,इन्हे मिल सकती है अहम जिम्मेदारी !

Shri Mi
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जयपुर।राजस्थान (rajasthan) में अगले साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनावों (rajasthan assembly election 2023) को लेकर बीजेपी ने कमर कस ली है. बीजेपी नेता मिशन 2023 (bjp mission 2023) के लिए दिल्ली में राज्य के नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया है. हाल में वसुंधरा राजे (vasundhara raje) दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं से मिली जिसकी राजनीतिक हल्कों में काफी चर्चा रही. वहीं अब मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि अगले साल विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश में बीजेपी (rajasthan bjp) किसी नए चेहरे पर दांव खेल सकती है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे सिंधिया को दिल्ली में केंद्र सरकार में कोई पद दे सकती है जिसके बाद राज्य में किसी नए नेता के लिए राहें आसान हो सकती हैं. जानकारी के मुताबिक, बीजेपी राज्य में अशोक गहलोत को टक्कर देने के लिए कांग्रेस के खिलाफ एक मजबूत और नई टीम चुनावों में उतारना चाहती है जिसके लिए आलाकमान फिलहाल बीजेपी नेतृत्व बदलने पर विचार कर रहा है.

बीजेपी के कई नेताओं का कहना है कि पार्टी ने 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों में बिना किसी मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है. वहीं राज्य बीजेपी के कई नेताओं का कहना है कि अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा.

वसुंधरा का होगा दिल्ली पलायन !

बता दें कि राज्य में चुनावों से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया जाता है तो वसुंधरा को चुनाव में जीत मिलने के बाद दुबारा सीएम बनाने को लेकर अब संशय बन गया है. वहीं माना जा रहा है कि राजे केन्द्र में दी गई जगह को स्वीकार कर अपने बेटे का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने की दिशा में भी काम कर सकती है. इसके अलावा बीजेपी को लगता है कि राज्य से राजे को दिल्ली भेजने से राजस्थान के कई बीजेपी नेताओं के रास्ते खुल जाएंगे और बीजेपी कांग्रेस को मजबूती से टक्कर दे पाएंगी.

पूर्वी राजस्थान से बीजेपी की चुनावी एंट्री

गौरतलब है कि बीजेपी इस बार पूर्वी राजस्थान की उन विधानसभा पर फोकस कर रही है जहां 2018 में करारी हार का सामना करना पड़ा था. इसी कड़ी में 2 अप्रैल को जेपी नड्डा सवाई माधोपुर आ रहे हैं जहां वह एक अनुसूचित जनजाति सम्मेलन में शामिल होंगे. पूर्वी राजस्थान के अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, टोंक, सवाईमाधोपुर और दौसा जिलें की विधासनभा सीटें शामिल हैं. 2013 में यहां बीजेपी ने सबसे ज्यादा 28 सीटें जीतीं थीं और कांग्रेस को 7, किरोड़ी लाल मीणा की एनपीपी को 3 और एक सीट बहुजन समाज पार्टी के हाथ आई थी.

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