मेरा बिलासपुर

सबका साथ देने वालों ने छोड़ा मजदूरों का साथ…मजदूर दिवस पर विजय ने खाया बासी…कहा…भाजपा ने फिर किया अपमान

बिलासपुर—अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने बासी खाया…पेज पसिया का आनन्द लिया। साथ ही भाजपा सरकार और नेताओं पर जमकर निशाना भी साधा। प्रेस नोट जारी कर कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया इलेक्ट्रोल बान्ड की धांधली में मस्त भाजपा  नेताओं को मजदूरों के लिए समय नहीं है। जहां दुनिया के देशों ने अपनी अपनी संस्कृति के अनुसार मजदूर दिवस मनाया।  वही श्रम प्रधान राज्य छत्तीसगढ़ में भाजपा नेताओं में मजदूरों की कोई पूछ परख नहीं हुई। जाहिर सी बात है कि मेवा खाने वालों को बासी अच्छा लगने का सवाल ही नहीं उठता है। भाजपा सरकार ने मजदूरों को मजदूर दिवस पर अस्तित्व को चुनौती दिया है। चुनाव में यही मजदूर अब दम दिखाएंगे। हासिया पर खड़े करने वालों को मजा भी चखाएँगे।

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चुनावी गहमागहमी के बीच मजदूर दिवस पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने अपने निवास पर बासी खाकर मजदूरों के प्रति सम्मान जाहिर किया।  विजय ने कहा कि भारत के विकास में मजदूर अहम और गर्व  करने वाली कड़ी है। मजदूरों के बिना विकास की परिकल्पना नामुमकिन है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मजदूरों के सम्मान में एक मई को बासी बोरे दिवस  मानाने का एलान किाय। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अगुवाई में पूरे प्रदेश ने एक मई को बासी बोरे दिवस के रूप में मनाया।

विजय ने बताया बासी और बोरे छत्तीसगढ़ श्रम संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। भूपेश सरकार ने आम और खास की दूरियों को मिटाने का अभियान चलाया। एक मई को बोरे दिवस मनाने का एलान किया। दुख की बात है कि भाजपा सरकार ने मजदूरों के सम्मान में शुरू.. दिवस को दरकिनार किया है। समझा जा सकता है कि जिस पार्टी ने इलेक्ट्रोरल बान्ड में 600 करोड़ का घोटाला किया उसे मजदूर पसन्द क्यों आएंगे।

विजय ने कहा कांग्रेस ने हमेशा सर्वहारा वर्ग का सम्मान किया है। राहुल गांधी ने न्याय यात्रा कर देश के कोने कोने तक पहुंचकर मजदूरों का सम्मान किया है। आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी गरीबों के साथ ख़ड़ी है। किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। मजदूरों के साथ हुए अपमान का बदला भी लिया जाएगा।

कांग्रेस नेता ने कहा बारे बासी खाने का वैज्ञानिक महत्व है। गर्मी के दिनों में इसका सेवन..मौसम की मार से बचाता है। शरीर भी स्वस्थ्य रहता है। यदि सरकार ने एक मई को बोरे दिवस मनाया होता तो.मजदूरों और गरीबों का ना केवल मनोबल बढ़ता बल्कि नजदीक आने का अवसर भी मिलता।

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