मेरा बिलासपुर

पर्यटन बोर्ड चैयरमैन अटल, प्रमोद और संतोष कौशिक ने कहा…देश का बच्चा बच्चा मरार समाज का ऋणि..माता शाकम्भरी की कृपा से खुशहाल हुआ प्रदेश

पौष पूर्णिमा उत्सव का आयोजन..सभी ने किया प्रथम शिक्षा को याद

बिलासपुर—पौष पूर्णिमा पर्व को प्रदेश के साथ बिलासपुर में भी धूम धाम से बनाया गया। लोखण्डी में  भोयरा मरार समाज ने गरिमामय वातावरण के बीच माता शाकंम्भरी जयंति उत्सव मनाया। कार्यक्रम में प्रदेश और जिले के दिग्गज नेताओं ने शिरकत किया। अतिथियों ने इस दौरान माता शाकंभरी के साथ ही माता सावित्रि बाई फूले को नमन् किया। प्रदेश के लिए सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। सभी नेताओं ने शाकंभरी जयंति पर प्रकाश भी डाला। कार्यक्रम में मुख्य रूप से पर्यटन बोर्ड चैयरमैन अटल श्रीवास्तव, जिला सहकारी केन्द्रीय मर्यादित बैंक के चैयरमैन प्रमोद नायक. कांग्रेस नेता संतोष कौशिक के अलावा अन्य गणमान्य लोगों ने शिरकत किया।

       अटल श्रीवास्तव ने बताया कि मां शाकम्भरी सुख समृद्धि की देवी है। उनके ही आशीर्वाद से हमारा घर धन धान्य से भरता है। ना केवल भोयरा मरार समाज बल्कि पूरा प्रदेश माता शाकंभरी की आराधना करता है। अटल ने कहा कि छत्तीसगढ़ किसान प्रधान राज्य है। किसान सर्व मंगल कामना के साथ खेती करता है। और माता के आशीर्वाद से ही आज पूरा प्रदेश सुख समृद्धि के साथ खुशियों में झूम रहा है।

 प्रमोद ना्यक ने बताया कि माँ आदिशक्ति जगदम्बा ने शाकंभरी देवी के रूप में सौम्य अवतार लिया। ग्रंथों में कहा गया है कि देवी भगवती ने अकाल और पृथ्वी पर गंभीर खाद्य संकट को कम करने के लिए शाकंभरी का अवतार लिया । जैसा कि उनके नाम से ,स्पष्ट है कि ‘शाक’का अर्थ ‘सब्जी और सब्जी का अर्थ शाकाहारी भोजन से होता है। इसी तरह भारी’ का अर्थ ‘धारक है। इसलिए मां शाकम्भरी को सब्जियों, फलों और हरी पत्तियों की देवी कहा जाता है। माता को फलों और सब्जियों के हरे परिवेश के साथ चित्रित किया जाता है।

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मंच से कांग्रेस नेता संतोष कौशिक ने भी संबोधित किया। उन्होने माता शाकंभरी के बारे में विस्तार से बताया। कौशिक ने बताया कि हमारा देश धर्मपरायण और प्रकृति उपासक है। जिस बात की जानकारी आज से सदियों पहले भारतवासियों को थी…आज जाकर  दुनिया ने माना है। जब तक हम तन मन धन से हरियाली की कल्पना नहीं करेंगे..तब तक विश्व का कल्याण संभव नहीं है। इसी कल्याणकारी देवी का नाम माता शांकभरी है।

 कौशिक ने जोर देकर कहा कि देश मरार समाज का हमेशा ऋणि रहेगा। देश की प्रथम शिक्षिका माता सावित्री फूले और महात्मा ज्योतिबा फूले का जन्म इसी समाज में हुआ। सबसे पहले महात्मा ज्योति राव फूले ने ही महिलाओं के शिक्षा पर जोर दिया। महात्मा ज्योतिबा फूले के सिद्धांतों पर चलकर माता सावित्री फूले ने ता उम्र महिलाओं को सशक्त बनाने अपना जीवन अर्पण कर दिया ।

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