हाइपोफ्रेक्नेड तकनीक से होगा कैंसर का इलाज,डॉक्टरों ने बताया,ऐसी पद्धति.जिसका अर्थ,कम खर्च,कम समय में सटीक इलाज.दर्द भी कम

बिलासपुर—हाइपोफ्रेक्नेटेड रेडियोथेरेपी मतलब कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली ऐसी तकनीकी जिसमें मरीज को  कम पीड़ा,कम खर्च और कम समय में सटीक पद्धति है। आज अपोलो अस्पताल में पत्रकार वार्ता में कैंसर रोग विशेषज्ञ, डॉ.अमित वर्मा,डॉ.राहुल मिश्रा और डॉ.फरीदा ने यह जानकारी दी। डॉक्टरों की टीम ने बताया कि विश्व में कैंसर के इलाज में नई नई  तकनीकि का प्रयोग हो रहा है। और उसका परिणाम भी बेहतर आ रहा है। हाइपोफ्रेक्नेड तकनीकि इसमें से एक है। देश दुनिया के बाद अब यह सुविधा पूरी विश्वनीयता के साथ आज अपोलो अस्पताल में भी उपलब्ध है। 
       कुछ साल पहले तक हम जानते थे कि कैंसर रोग का मतलब लाइलाज बीमारी है। लेकिन समय के साथ विज्ञा्न और विशेषज्ञों ने इस लाइलाज बीमारी पर लगाम लगाया है। इलाज के लिए नई नई तकनीकि का अविष्कार हुआ। और  कैंसर के रोगी भी ठीक हुए। दुनिया ने एक बार फिर कैंसर के सटीक इलाज को लेकर नई तकनीकि को सामने लाया है। हाइपोफ्रेक्नेटेड इसमें से एक है। 
          देश के जाने माने  ऑन्कोलाजिस्ट डाॅ राहुल मिश्रा ने बताया कि चिकित्सा की दुनिया में मई महीना को युरोलाॅजी कैंसर जागरूकता माह और ब्रेन कैसर एवं ट्यूमर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। अपोलो में भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। प्रेस वार्ता में सवाल जवाब के दौरान डॉ. मिश्रा ने बताया कि हाइपोफ्रेक्नेटेड रेडियोथेरेपी कैंसर के खिलाफ हाल फिलहाल विश्व में सबसे नवीन और कारगार रणनीति है। 
                         इस तकनीक से रेडियेशन थेरेपी की संख्या में पुराने पद्धति से कम होती है। इसमें साईड इफेक्ट की जानकारी भी जल्दी मिल जाती है। मरीजों को तकलीफ का भी सामना कम करना पड़ता है। अलावा इलाज भी सटीक होता है। सबसेर बड़ी बात समय और खर्च दोनो ही कम होता है। उन्होने पत्रकारों को बताया कि  हाइपोफ्रेक्नेटेड तकनीकि को फिलहाल देश में दुर्लभ सुविधा के रूप में देखा जाता है। लेकिन खुशी है किअपोलो में रहकर दुर्लभ रेडिएशन पद्धति के जरिए ज्यादा से ज्यादा कैंसर रोगियों को ठीक करने का अवसर मिलेगा। 
          इस अवसर पर वरिष्ठ कैंसर सर्जन डाॅ अमित वर्मा ने बताया कि डॉ. राहुल मिश्रा देश दुनिया में हाइपोफ्रेक्नेटेड तकनीकि से इलाज करने वाले जाने माने डाक्टर हैं। उन्होने एससीजी अहमादाबाद में मरीजों की लम्बे समय तक सेवा किया है। चिकित्सा की दुनिया में बड़ी डिग्रियों में एक एफआरसीआर की डिग्री यूके से हासिल किया। इस बात की खुशी है कि अब वह हमारे टीम का हिस्सा हैं।
                डॉ. वर्मा ने बताया कि नई नवीन तकनीकि से अंचल के कैंसर मरीजों के वरदान साबित होगी। यह भी बताया कि ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी की तकनीक काफी तकलीफदेह होती है। लेकिन नई  तकनीक से सब कुछ आसान हो गया है। पहले पूरे ब्रेस्ट को निकाल दिया जाता था । अब केवल बिमारी वाले हिस्से की ही सजर्री कर बीमार को बचा लिया जाएगा। ओरल कैंसर की सर्जरी  भी आसान हो गयी है। पहले परिस्थिति के अनुसार संपूर्ण जबड़ा को निकाल जाता था। फिर नया जबड़ा बनाया जाता है। लेकिन इस तकनिकी के आने से ना तो जबड़ा निकाला जाएगा और शरीर का कोई हिस्सा ही काटा जाएगा। जाहिर सी बात है कि  चेहरा भी विकृत नहीं होगा।

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