अब इस पुल को भी गिराकर मानेंगे रेत माफिया..बेखौफ कर रहे उत्खनन..तुर्काडीह पुल की आयी याद

बिलासपुर–शासन प्रशासन या समाज सेवी लाख चाहें…लेकिन रेत माफिया अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे है। अरपा को मार कर ही दम लेंगे। दिन दहाड़े सेन्दरी स्थित नेशनल हाइवे 4 लेन पुल से चन्द कदम दूर रेत का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है। मजेदार बात है कि जो भी विरोध करने जाता है..रेत माफिया उसे उठा लेने की धमकी देते हैं। साथ ही सीना ठोकते हैं कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। 

                      एक बार फिर रेत माफियों का अवैध रेत उत्खनन का धंधा बेखौफ शुरू हो गया है। जिसके चलते आस पास के लोगों में गहरा आक्रोश है। सेन्दरी के ही कुछ रसूखदार रेत कारोबारी बिना किसी डर के दिन रात रेत की चोरी सीना ठोककर कर रहे हैं। मना करने पर रेत माफिया धमकी देने से बाज नहीं आ रहे हैं ।

                                 मौके पर पहुंचे पत्रकार को स्थानीय लोगों ने बताया कि जिस स्थान पर रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है..उस स्थान से फोर लेन पुल की दूरी मात्रा पचास मीटर है। बावजूद इसके रेत माफियों को इस बात को लेकर कोई परवाह नहीं है। खनिज विभाग के अधिकारी शिकायत के बाद जब मौके पर पहुंचते हैं तो रेत माफिया अपनी गाड़ी और पोकलेन लेकर फरार हो जाते हैं।

                 जानकारी देते चलें कि करीब 8 साल पहले तुर्काडीह पुल के पास भी रेत माफियों ने उत्खकन कर शासन को करोड़ों रूपयों का नुकसान पहुंचाया है। माफियों ने रेत का इतना उत्खनन किया कि पुल का पीलर बेस भी दिखाई देने लगा। संभावित खतते को देखते हुए तत्कालीन समय जिला प्रशासन ने पुल से आवागमन बन्द कर दिया। लाखों रूपयों से मरम्मत के बाद पुल को खोला गया।

                          कमोबेश सेन्दरी स्थित पुल की भी यही स्थिति होने वाली है। पुल से नेशनल हाइवे की फोर लेन सड़क गुजरती है। दूर से ही आसानी से देखा जा सकता है कि मात्र पचास मीटर की दूरी पर प्रतिदिन सुबह 5 बजे से दोपहर तक सैकड़ों हाइवा रेत मुफ्त में उत्खनन किया जाता है। कोई कार्रवाई भी नही होती है। इसके चलते रेत माफियों के हौसले बुन्द है।

                    गुरूवार को करीब साढ़े 9 बजे मौके पर पाया गया कि रेत माफिया अपने आदमियों को खड़ा कर दो पोकलेन से ताबड़तोड़ रेत का उत्खनन करवा रहा है। इतना ही नहीं रेत परिवहन के लिए रास्ता भी तैयार किया जा रहा है। स्थानीय किसान ने बताया कि उनकी जमीन से जबरदस्ती रेत परिवहन के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है। चूंकि माफिया रसूखदार है। इसलिए मुंह बन्द रखने में ही जान की खैर है। कुछ पैसे भी मिल जाते हैं।

                              रेत उत्खनन करने वालों ने बताया कि प्रतिदिन 100 हाइवा रेत निकालते हैं। एक हाइवा रेत तीन हजार रूपयों में बंटता है। पुलिस को भी खिलाना पड़ता है। सरपंच को भी देना पड़ता है। रेत उत्खनन करने वाले यह भी बताया कि बिना सरपंच और नेता के आशीर्वाद बिना इस समय अरपा से रेत निकालना मुश्किल है।

                       बहरहाल  फोर लेन पुल से चन्द कदम दूर सेन्दरी स्थित अरपा नदी से करीब 100 हाइवा रेत का उत्खनन रोजाना किया जा रहा है। नागरिकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने बताया कि य़दि रेत का अवैध उत्खनन नही रोका गया तो उग्र आंदोलन करेंगे। हम फोर लेन पुल को तुर्काडीह पुल नहीं बनने देंगे। मामले में जिला प्रशासन प्रमुख कलेक्टर से भी शिकायत करेंगे।   

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