videoःकोटा रेलवे स्टेशन के सामने जंगी प्रदर्शन ..प्रशासन के खिलाफ जमकर हुई नारेबाजी..कांग्रेस नेता विजय ने कहा..नहीं तो रोक देंगे कोयला गाड़ी

बिलासपुर— चालिस से अधिक यात्री गाड़ियों का परिचालन बन्द होने के बाद आम जनता का आक्रोश दिनो दिन बढ़ता जा रहा है। जनता के समर्थन में कांग्रेस ने भी आंदोलन तेज कर दिया है। इसी क्रम में गुरूवार को स्थानीय लोगों के साथ कोटा रेलवे स्टेशन के सामने कांग्रेस नेताओं ने जिला कांग्रेस अध्यक्ष ग्रामीण की अगुवाई में उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता संतोष कौशिक, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष आदित्य अवस्थी समेत अन्य कांग्रेसियों ने रेल प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जाहिर किया।  जिला कांग्रेस अध्यक्ष ग्रामीण ने सीधे सीधे कोयलागाड़ी की पहियों पर ब्रेक लगाने का एलान भी कर दिया। 

                    जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने उपस्थित तीन सौ अधिक लोगों को संबोधित किया। उन्होने कहा कि कि जो काम ब्रिटिश काल में अंग्रेजों ने नही किया। उस जनविरोधी काम को गरीब विरोधी केन्द्र की भाजपा सरकार ने कर दिखाया है। कोटा रेलवे स्टेशन समेत छत्तीसगढ़ के सैकड़ों महत्वपूर्ण ट्रेन स्टापेज को रेल प्रशासन ने बन्द कर दिया। बिलासपुर से सभी दिशाओं में चलने वाली चालिस यात्री गाड़ियों के पहियों पर रेल मंत्रालय ने ब्रेक लगा दिया है।

चहेतों के लिए यात्री गाड़ी बन्द

                रेल प्रशासन के तुगलकी फैसले से जनता में हाहाकार है।  लेकिन केन्द्र सरकार बिजली संकट का अफवाह फैलाकर अडानी और अम्बानी के लिए धकापेल कोयला गाड़ियों को चला रही है।

स्थानीय व्यापार हुआ चौपट

                 विजय केशरवानी ने बताया कि यात्री गाड़ियों के बन्द होने से सबसे बुरा प्रभाव स्थानीय व्यापार पर पड़ा है। गरीबों का तो जीना मुश्किल हो गया है। रात्रि में लगने वाली बेलगहना सब्जी मण्डी बन्द हो गयी है। इससे ना केवल गरीब किसानों और आदिवासियों को नुकसान हुआ है। बल्कि बेलगहना से प्रदेश और प्रदेश बाहर जानी वाली गरीब किसानों की सब्जियां कौड़ी के मोल हो गयी है। कोटा जैसे आदिवासी क्षेदत्र में यदि कोई गरीब बीमार हो जाए ..तो बिलासपुर पहुंचने में उसे 50 रूपयों की जगह पांच हजार रूपये खर्च करना पड़ता है। इस तुगलकी फरमान के खिलाफ प्रत्येक स्टेशन पर आंदोलन किया जा रहा है।

कहां गया कोयला..सिर्फ रिकार्ड बनाते रहे

             केशरवानी ने बताया कि कोरोना काल के दौरान दो साल कोयला का अधाधुंध दोहन किया गया। यात्रियों गाड़ियों को बन्द किए जाने के बाद..रेल प्रशासन ने कभी शेषनाग चलाकर गीनिज बुक में रिकार्ड दर्ज कराया तो..कभी सुदर्शन चलाकर लिम्का बुक में नाम छपवाया। समझ में नही आ रहा है कि दो साल बेरोक टोक कोयला परिवहन और उत्खनन तो हुआ। लेकिन कोयला गया कहां। जनता को सब मालूम है। अंधेरगर्दी को किसी भी सूरत में बर्दास्त नही किया जाएगा। 

एफआईआर वापस लेने की मांग

                 वरिष्ठ कांग्रेस नेता संतोष कौशिक ने कहा कि रेलवे प्रशासन को बन्द यात्री गाड़ियों को चलाना ही होगा। आंदोलन तब तक चलेगा जब तक केन्द्र सरकार यात्री गाड़ियों को सुचारू रूप से शुरू करने का एलान नही करती है। गरीबों का जीना मुश्किल हो गया है। मोदी की नीतियों को जनता समझ चुकी है। भाजपा सरकार सबका नहीं बल्कि दो लोगों का ही विकास कर रही है। इसके अलावा हमारी मांग है कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने वालों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को भी रेल प्रशासन वापस ले।

आदिवासी क्षेत्र का जीना मुश्किल

                ब्लाक कांग्रेस आदित्य अवस्थी ने बताया कि रेल प्रशासन की दादागिरी को किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं  करेंगे। कोटा स्टेशन का ब्रिटिश काल से ही महत्व रहा है। यहां छोटी बड़ी सभी गाड़िया रूकती रही है। लेकिन तानाशाह केन्द्र सरकार की नीतियों ने आदिवासी क्षेत्र की जनता का जीना मुश्किल कर दिया है।

 उग्र आंदोलन की धमकी

          धरना प्रदर्शन के बाद विजय केशरवानी की अगुवाई में उपस्थित सभी कांग्रेसी स्थानीय लोगों के साथ स्टेशन मास्टर को जीएम के नाम मांग पत्र दिया। विजय केशरवानी ने एलान किया कि यदि  रेल मंत्री बिलासपुर आते हैं तो कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल जनता की परेशानियों को सामने रखेगा। यदि जनता की मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया तो फिर उग्र रेल रोका आंदोलन कर कोयला गाड़ी की पहियों पर ब्रेक लगा दिया जाए। लेकिन इसके पहले जीएम कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

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