मेरा बिलासपुर

कोलवासरी जनसुनवाई के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन…कहा..हड़पी गयी आदिवासियों की जमीन..एसीसी प्लान्ट का भी किया विरोध

बिलासपुर — पथर्रा और खरगनी समेत आठ ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि और ग्रामीणों ने प्रस्तावित कोलवासरी की जनसुनवाई को लेकर कलेक्टर कार्यालय का घेराब किया। ग्रामीणो ने बताया कि 11 जून को जनसुनवाई होना है। ग्राम वासियों की मांग है कि क्षेत्र में उद्योग व्यवसाय के नाम पर कोलवाशरी किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। हमने इसके पहले भी महावीर कोल वासरी जनसुनवाई का विरोध किया था। बावजूद इसके एक बार फिर हम ग्रामीणों पर जबरदस्ती कोलवासरी थोपने का प्रयास किया जा रहा है। ग्राम वासी किसी भी सूरत में कोलवासरी नहीं खुलने देंगे।

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 ग्राम पथर्रा समेत खरगहनीि, छेरकाबांधा,खरगहना, खुरदुर,गोकुल नगर, पीपरतराई और भरारी के प्रतिनिधियों समेत एक्टिविस्ट दिलीप अग्रवाल की अगुवाई में ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। दिलीप अग्रवाल समेत ग्राम सरपंचों ने बताया कि ग्राम पथरी,खरगहनी में प्रस्तावित कोलवासरी की जनसुनवाई का विरोध करते हैं। इसके पहले भी हमने कोलवासरी का विरोध किया था। विरोध के मद्देनजर पिछली सुनवाई को शासन ने निरस्त भी किया।

ग्रामीणों ने बताया कि कोलवासरी मेसर्स महावीर कोलवासरी का 11 जून 2024 को जनसुनवाई होनी है। कम्पनी ने शासन को झूठी रिपोर्ट पेश कर मौके पर वर्तमान समय में कोलवासरी संचालित होना बताया है। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। मौके पर ना तो कोई उद्योग है। और ना ही वासरी संचालित है।

 दिलीप अग्रवाल ने बताया कि कोलवासरी खुलने आसपास के गांवों का पर्यावरण प्रदूषित होगा। फसलों की पैदावार खत्म होगी। कोल डस्ट और निकलने वाले अवशिष्ट से जमीन का बंजर होना निश्चित है। किसानों के सामने रोजी रोटी की समस्या होगी। हम जानते है कि कोल डस्ट से खांसी, अस्थमा, सांस की बीमारी सामान्य है। यह जानलेवा भी है। इसलिए हमने फैसला किया है कि पिछळी जनसुनवाई की तरह इसका भी विरोध करेंगे।

प्रधानमंत्री सड़क पर भारी वाहनों का परिवहन

ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पथरी, खरगहनी में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से ग्रामीमों का निस्तार होता है। बावजूद इसके 12 टन क्षमता वाली सड़क पर 40 टन क्षमता वाली गाड़ियों को दौड़ाया जा रहा है। एकमात्र सड़क है जो आसपास के गाँवों को शहर से जोड़ती है। सड़क से 24 घंटे मुरूम, रेत, कोयला का परिवहन किया जाता है। सड़क की हालत बद से बदतर होती जा रही है। सड़क किनारे आँगनबाड़ी, प्राथमिक शाला का संचालित है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क से भारी वाहनों का परिवहन प्रतिबंधित है। बावजूद इसके गाड़ियां धड़ल्ले से चल रही है। मजेदार बात है कि कम्पनी ने अपने प्रोजेक्ट में प्रधानमंत्री सड़क को आमरास्ता बताया है। मामले में जांच कर भारी वाहनों के परिवहन को तत्काल बन्द किया जाए।

पेसा एक्ट का हवाला

ग्रामीणों ने बताया कि खरगहनी , पथर्रा ,बेलमुंडी , छतौना समेत कई ग्रामों में पेसा एक्ट लागू है । सभी गांव आदिवासी बाहुल्य हैं। लेकिन नेहरू नगर बिलासपुर निवासी तथाकथित आदिवासी राजेंद्र सिंह गोड ने आदिवासियों से 52 एकड़ जमीन खरीदा। बाद में राजेन्द्र ने जमीन जैन परिवार को बेच दिया है। लाकडाउन के दौरान  ग्राम सभा में एनओसी भी बनवाया। जबकि इस दौरान ग्राम सभा हुई ही नहीं । तत्कालीन समय शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम को जांच का आदेश दिया था।

कलेक्टर ने दिया जांच का आदेश

ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामीणों की मांग को कलेक्टर ने गंभीरता से लिया है। उन्होने तत्काल कोटा एसडीएम को आदेश दिया कि ग्रामीणों की शिकायतों की जांच करें। आदिवासी जमीन मामले की शिकायत को गंभीरता से लें। साथ ही अन्य पहलुओं से भी अवगत कराएं।

एसीसी प्लान्ट का विरोध
इस दौरान दिलीप अग्रवाल ने ग्राम लोहसी सोन में एसीसी सीमेंट प्लांट की जन सुनवाई निरस्त करने को लेकर आवेदन दिया। कलेक्टर को बताया कि साल 2022 में आयोजित एसीसी सीमेंट प्लांट का ग्रामीणों ने विरोध किया था। शासन ने मौके पर ही जनसुनवाई को निरस्त कर दिया। एक बार फिर 18 जून 2024 को जन सुनवाई प्रस्तावित है। आज भी क्षेत्र में समस्याएं पूर्ववत है। दिलीप ने बताया कि नियमानुसार ईआईए रिपोर्ट की वैद्यता जमा करने के बाद दो साल की होती है। लेकिन तत्कालीन ईआईए रिपोर्ट को 27 महीने हो चुके हैं। जबकि नयी ई.आई.ए. रिपोर्ट ग्राम पंचायतों को भेजना चाहिए। इसके अलावा एससीसी प्लान्ट ने अपने आवेदन में  आधा दर्जन पंचायतों की  अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीरं दिया है। और ना ही रिपोर्ट में भौगौलिक काल खण्ड का उल्लेख है। जबकि आस पास एतिहासिक स्थल भी है। प्लान्ट से मल्हार पौराणिक मंदिर की दूरी मात्र आधा किलोमीटर है। और जंगल में कई महत्वपूर्ण जीव जन्तु और इमारती पेड़ हैं। प्लान्ट खुलने के बाद सब कुछ बरबाद हो जाएगा।

                   

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