जब कुर्सी छोड़कर अदालत से बाहर आए जज..पीड़ित को देखते ही सुनाया फरमान.19 लाख रूपयों का करें भुगतान

बिलासपुर—बहुत कम लेकिन होता है…जब कोई न्यायाधीश अदालत के बाहर पीड़ित से मिले..और तत्काल फरमान भी जारी करे। कुछ ऐसी ही देखने को मिला नेशनल लोक अदालत में प्रकरण की सुनवाई के दौरान। दरअसल सुनवाई के दौरान जब न्यायधीश प्रशांत कुमार शिवहरे को जानकारी मिली कि वादी सुनवाई कार्यक्रम शामिल नहीं हो सकता है।  पीड़ित लकवाग्रस्त है। और कोर्ट के बार एम्बुलेन्स मैं बैठा है। जानकारी के बाद पीड़ित की फरियाद सुनने न्यायधीश गाड़ी के पास पहुंचे। लगवाग्रस्त पीड़ित को न्यायधीश ने गौर से सुना। और फिर तत्काल राहत वाला फरमान जारी कर दिया।
 
                           जिला न्यायालय बिलासपुर में शनिवार को नेशनल लोक अदालत के अष्टम जिला दावा अधिकरण और  नेशनल लोक अदालत खंडपीठ में सुनवाई हुई।  प्रशांत कुमार शिवहरे के न्यायालय में लंबित दुर्घटना दावा प्रकरण रितु मनहरे और अन्य विरूद्ध आशुतोष शुक्ला और अन्य के मामले को सुना गया। । मा्मला आवेदकों और बीमा कंपनी के मध्य के बीच का था।  आपसी समझौते के बाद आवेदकों को 19,00,000  लाख रूपयों का भुगतान कराया गया।
 
             जानकारी के अनुसार मृतक लाखेश्वर मनहरे अपने साथी के साथ 21.12.2019 को मोटरसायकल से सिमगा स्थित अपने रिश्तेदार के गांव मांढरकला के लिए निकला। दामाखेड़ा ओव्हरब्रीज को पार करते समय बिलासपुर की ओर से आ रही एक भारी वाहन के चपेट में आ गया। लाखेश्वर मनहरे की मौके पर ही मौत हो गयी। साथी राहुल उर्फ हरिशंकर और ओमप्रकाश को गंभीर चोट पहुंची।
 
                मामले में मृतक लाखेश्वर मनहरे की पत्नी ऋतु मनहरे, दो पुत्रियां ने पिता विश्राम मनहरे एवं माता शांता मनहरे ने अधिकरण के सामने क्क्षतिपूर्ति का किया। मृतक लाखेश्वर मनहरे के लकवाग्रस्त पिता विश्राम मनहरे को भी लाया गया। लेकिन लगवाग्रस्त पिता विश्राम कोर्ट नहीं पहुंचने के कारण जिला न्यायालय परिसर में ही एम्बुलेन्स में लेटकर फैसला का इन्तजार करते रहे । वकीलों के जिरह के दौरान न्यायधीश प्रशांत को जानकारी मिली कि मृतक का पिता कोर्ट तक नहीं पहुंच सकता। फिर क्या था..न्यायधीश प्रशांत शिवहरे न्यायालय कक्ष से निकलकर सीधे विश्राम मनहरे के पास पहुंच गए।
 
                 एम्बुलेन्स पहुंचकर जिला न्यायधीश शिवहरे ने विश्राम से हालचाल पूछा। शारीरिक असमर्थता पर गंभीरतापूर्वक विचार कर प्रस्तुत राजीनामा को तत्काल स्वीकार किया। साथ ही आवेदकों के पक्ष में बीमा कम्पनी की तरफ से 19 लाख रूपये समझौता राशि दिए जाने का फरमान जारी दिया।
 
 
  पोर्टफोलियो जज ने किया निरीक्षण
 
           पोर्टफोलियो जज ने लोक अदालत की खण्डपीठों का निरीक्षण किया। जानकारी देते चलें कि जिला न्यायालय बिलासपुर और तालुका न्यायालयों में लोक अदालत की कुल 34 खण्डपीठों का गठन किया गया है। जिला बिलासपुर के पोर्टफोलियो जज और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी. सेम. कोशी ने जिला न्यायालय बिलासपुर के सभी खण्डपीठों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार साहू और जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष चन्द्रशेखर बाजपेयी उपस्थित थे। इस दौरान न्यायमूर्ति ने कामकाज को लेकर जिम्मेदार लोगों से संवाद किया।मामले की जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव राकेश सिंह ने दिया है।

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